Sunday, 28 July 2013

मैं अपने आप को झुठला रही हूँ

फ़रेब ए आरज़ू ही खा रही हूँ 
मैं अपने आप को झुठला रही हूँ 

किसी के नाम से रुसवा रही हूँ 
किसी को चाह के पछता रही हूँ

ये चाहत,ये वफायें ये तड़पना
मैं इनके नाम से घबरा रही हूँ

हैं क्यूँ उलझे हुए रिश्तों के धागे
इसी उलझन को मैं सुलझा रही हूँ

कोई साथी कोई महरम नहीं था
भरी दुनिया में भी तन्हा रही हूँ

समझना ही नहीं जो चाहता कुछ
उसी पत्थर से सर टकरा रही हूँ

ख़लिश बन कर खटकते हैं जो अब भी
उन्ही ज़ख्मो को मैं सहला रही हूँ

मुझे ये शेर गोई रास आयी
उसी से दिल सिया बहला रही हूँ


वो तो दिल में ही मेरे बसा मिल गया

ढूँढ़ती थी जिसे वो  पता मिल गया 
वो तो दिल में ही मेरे बसा मिल गया

तेरी रहमत से सब कुछ मिला है मुझे 
मेरी कश्ती को इक नाख़ुदा मिल गया 

मेरे रब ने दिया शायरी का हुनर 
मुझको जीने का इक आसरा मिल गया 

जब अँधेरे ने आकर के घेरा मुझे 
तू मुझे हमसफ़र रहनुमा मिल गया 

ऐसी रहमत हुई तेरी उन पर ख़ुदा 
राह भटके थे जो रास्ता मिल गया 

हर रविश से मेरी,मेरा वाकिफ़ ख़ुदा 
नाम का तेरे रब  आसरा मिल गया 

दिल उसी का ही सोने सा निखरा मिला 
मुश्किलों से मुझको तपा मिल गया 

जो गुनाहों से ख़ुद हो न पाया रिहा 
वोही दूजे का दिल जाँचता मिल गया 

यह जो संसार है घर नहीं है मेरा 
मुझको अपना सही अब पता मिल गया 


dhoondhti thi jise  wo pata mil gaya  
 wo to dil mein hi  mere,basaa mil gaya.

Teri rehmat se sab kuch mila hai mujhe
 Meri kashti ko ik, Nakhuda mil gaya..

mere rab ne diya shayari ka hunar 
mujhko jeene ka ik Aasra mil gaya 

jab Andhere ne aakar ke  ghera mujhe 
Tu mujhe humsafar, Rahnuma mil gaya

aisi rahmat hui teri un par khuda 
raah bhatke  unhe rasta mil gaya 

Har ravish se meri, mera waakif Khuda
naam ka  tere  rab aasra mil gaya 

dil usi ka hi sone sa nikhra mila 
mushkile se jo mujhko tapaa mil gaya 

jo gunaho se khud ho na paya riha 
Wohee  duje ke dil  jaanchata mil gaya 

Yeh jo sansaar hai ghar nahin hai mera
mujhko apna sahi ab pata mil gaya 


Friday, 26 July 2013

दिल दुखाने वाली बाते भूल जाना चाहिए



अब ख़ुशी का भी कोई हमको बहाना चाहिए
दिल दुखाने वाली बाते भूल जाना चाहिए

रौशनी की इक किरण जीवन में चमके तो ज़रा
कुछ तो जीने का हसीं हमको बहाना चाहिए

तेरे घर डोली पे आई आज अर्थी पे चली
आज दुल्हन सा मुझे फिर से सजाना चाहिए

सारे रिश्तों को निभाया जो विरासत में मिले
हाँ मगर दिल के भी रिश्तों को निभाना चाहिए

चार दिन की मुख़्तसर सी जिंदगी है ये सिया
प्यार से सबसे यहाँ मिलना मिलाना चाहिए

ab khushi ka bhi koi humko bahana chahiye
Dil dukhane wali baate bhool jana chahiye

roshni ki ik kiran jeevan mein chamke to zara
kuch to jeene ka haseen humko bahana chahiye

tere ghar doli pe aai aaj arhti pe chali
aaj dulhan sa mujhe fir se sajana chahiye

saare rishto ko nibhaya jo virasat mein mile
haan magar dil ke bhi rishto'n ko nibhana chahiye

char din ki mukhtsar si zindgi hai ye siya
pyaar se sabse yahan milna milaana chahiye

Tuesday, 23 July 2013

भूल पाई न वो हादसा आज तक

मेरे सर पे है माँ की दुआ आज तक 
हो न पाया तभी कुछ बुरा आज तक 

छोड़ तन्हा मुझे जब गई थी तू माँ 
भूल पाई न वो हादसा आज तक 

छावं की जुस्तजू में रही उम्र भर 
धूप रोके रही रास्ता आज तक 

तेरे बिन जी रही हूँ अकेले मगर 
रास आई न आब ओ हवा आज तक

मुझको कोई शिकायत नहीं आपसे
क्या किया मैंने कोई गिला आज तक

मेरे दिल को दुखाता रहा जो सदा
उसको देती रही मैं दुआ आज तक

कब तलक़ प्यार मुझसे किया आपने
उसने पूछा तो बस कह दिया आज तक

सारी दुनिया में मैंने तलाशा मगर
तेरे जैसा कोई कब मिला आज तक

उसने एहसान मुझ पर किये बारहा
और माँगा नहीं कुछ सिला आज तक

फ़र्ज़ बेटी बहू का ना भूली कभी
सारे रिश्ते रही मैं निभा आज तक

दो परिवार की लाज ओढ़े हुए
मैंने रक्खी हैं उजली रिदा आज तक

मुद्दतों बाद वो आज आये है घर
वक़्त उनको नहीं था मिला आज तक

इक कमी रह गयी तो गिनाया गया
नेकियों का मिला कब सिला आज तक

mere sar pe hai ma ki dua aaj tak
ho na paya tabhi kuch bura aaj tak

chhod tanha mujhe tu gai thi jo ma
bhul pai na wo haadsaa aaj tak

chavn ki justju mein rahi umr bhar
dhoop roke rahi rasta aaj tak

tere bin ji rahi hun akele magar.
ras aai na aab-o-hawa aaj tak.

mujh ko koi shikayat nahin aapse
kya kiya maine koyi gila aaj tak

mere dil ko dukhata raha jo sada
usko deti rahi main dua aaj tak

kab talak pyar mujhse kiya aapne
. usne poocha to bas kah diya aaj tak.

sari duniya mein maine talasha magar
tere jesa koi na mila aaj tak

usne ehsan mujhpar kiye ba-raha
aur manga nahi,n kuch bhi sila aajtak

sari duniya mein maine talasha magar
tere jesa koi kab mila aaj tak

farz beti bahu ka n bhuli kabhi
sare rishte rahi main nibha aaj tak

do parivaar ki laaj odhe hue
maine rakhi hai ujli rida aaj tak

Muddaton baad wo aaj aaye hain ghar
waqt unko nahi tha Mila aaj tak

ik kami rah gai to ginaya gaya
nekiyo'n ka mila kab sila aaj tak

Monday, 22 July 2013

मुझको सब्र ओ करार दे या रब

दिल से उसको उतार दे या रब 
मुझको सब्र ओ करार दे या रब 

रात दिन बस तेरी इबादत हो
ज़िंदगी यूं संवार दे या रब

नूर से तेरे जगमगा उट्ठू
मुझको ऐसे निखार दे या रब

जिसने दिल को मेरे दुखाया है
उसको खुशियाँ हज़ार दे या रब

अब तो बदले खिज़ा का ये मौसम
मुझको फ़स्ल ए बहार दे या रब

ग़म से थोड़ी निजात मिल जाए
इतनी किस्मत संवार दे या रब

बोझ एहसास ए जुर्म का है जो
मेरे दिल से उतार दे या रब

जिनके सर पे न कोई साया है
उनकी किस्मत संवार दे या रब

युहीं चमके सुहाग की बिंदिया
मुझको ऐसा सिंगार दे या रब

छीन ली मुझसे मेरी माँ तुमने
माँ के जैसा तू प्यार दे या रब

dil se usko utaar de ya rab
mujhko sabr o qarar de ya rab

Raat din bas teri ibadat ho
Zindgi yun guzaar de ya rab

noor se tere jagmaga uttho'n
zindgi yuun nikhar de ya rab

jisne dil ko mere dukhaya hai
usko Khushiyan hazaar de ya rab

ab to badle khiza'n ka ye mausam
mjhko fasl e bahaar de ya rab

Gham se thodi najaat mil jaae,
itni qismat saNwaar de yaa rab

Bojh ehsas e jurm ka hai jo
mere dil se utaar de ya rab.

jinke sar pe na koi saya hai
unki kismat sanvaar de ya rab

yuheen chmke suhag ki bindiyaa
mujhko aisa singaar de ya rab

cheen li tumne meri ma mujhse
ma ke jaisa tu pyaar de ya rab

Saturday, 20 July 2013

मैं बता दूंगी तुम्हें वो भी कहानी एक दिन

बात जो सबसे पड़ी मुझको छुपानी एक दिन 
मैं बता दूंगी तुम्हें वो भी कहानी एक दिन 

अपने रिश्तों को कभी जिसने तवज्जों ही न दी
घेर लेगी उसको सबकी बदगुमानी एक दिन 

 उम्र भर नाकामियां जिसके मुक़द्दर में रहीं 
हो गई मशहूर उस की हर कहानी एक दिन

जब कभी घबरा उठी तो माँ ने समझाया मुझे 
ग़म न कर संवेरेगी तेरी ज़िंदगानी एक दिन

सच की खातिर जो जिए और ज़ुल्म से लड़ते रहे 
हक़ दिलाएगी उन्हें ये हक़बयानी एक दिन 

जो ज़मीं की इस कशिश में खो गए हैं ऐ सिया !
उनको डस लेगी बलाए आसमानी एक दिन

baat jo sabse padi mujhko chupaani ek din 
main bata dungi tumhe wo bhi kahani ek din 

apne rishto'n ko kabhi jisne tawjjo hi na di 
gher legi usko sabki  badgumani ek din 

umr bhar nakamiya jiske muqddar mein rahi'n 
 ho gayi mashoor uski har  kahani ek din 

jab kabhi ghabra uthi to ma ne samjhya mujhe 
gham na kar sanveri teri zindgani ek din 

sach ki khatir jo jiye aur zulm se ladte rahe 
haq dilaegi unhe ye haq bayani ek din....

jo zamee'n ki is kashish mein kho gaye hain aye siya 
unko das legi balae aasmaani ek din ....

Monday, 15 July 2013

तेरे ग़म बेशुमार क्या करती

फिर तेरा ऐतबार क्या करती 
लेके ग़म बेशुमार क्या करती 

चार दीवारी घर की रास आई 
तेरी देहलीज़ पार क्या करती 

छोड़ कर जा रहा था जो मुझको 
रोके उससे गुहार क्या करती 

तुमने जब इस तरह से ठुकराया 
मिन्नते बार बार क्या करती

जिसकी फ़ितरत में बेहयाई हो
उसको मैं शर्मसार क्या करती

मेरे एहसास मर गए जैसे
ज़ख्म अपने शुमार क्या करती

जो खिज़ां की मैं हो गयी आदी
इंतज़ार ए बहार क्या करती

मेरे ग़म से न वास्ता जिनको
ऐसे रिश्तों से प्यार क्या करती

मैं तो सादावरी की क़ायल हूँ
तुम बताओ सिंगार क्या करती

मेरे अल्फ़ाज़ खो गए जैसे
अपने शेरो में धार क्या करती

था अक़ीदत का एक नशा मुझ पर
मैं इलाज ए खुमार क्या करती

fir tera aitbaar kya karti
leke gham beshumaar kya karti

char deewari ghar ki raas aayi
teri dehleez paar kya karti

chhor kar ja raha tha jo mujhko
ro ke usse guhaar kya karti

tumne kuch is tarah se thukraya
minnte bar bar kya karti

jiski fitrat mein behya'ai ho
usko main shamsaar kya karti

mere ehsaas mar gaye jaise
zakhm apne shumaar kya karti

jo khizan ki main ho gayi aadi
intzaar e bahaar kya karti

mere gham se na wasata jinko
aise rishto se pyaar kya karti

main to sadavari ki qayal hoon
tum batao singaar kya karti

mere alfaaz kho gaye jaise
apne shero mein dhaar kya karti

tha aqeedat ka ek nasha mujh par
to ilaaj e khumaar kya karti

siya

ग़मो को हमने पिरोया है शायरी कर ली



इबादतों में तेरी ऐसी ज़िंदगी कर ली 
सुकून दिल को मिला हमने बंदगी कर ली 

हुई उदास जो तन्हा यूँ खुद को बहलाया 
ग़मो को हमने पिरोया है शायरी कर ली 

निभाया एहद ए वफ़ा हमने इतनी शिद्दत से 
जला के शम्मा मोहब्बत की शायरी कर ली 

वो तोड़ बैठे है क्यों सारे सिलसिले मुझसे 
बताये आज वो क्यों हमसे बेरुखी कर ली 

नहीं है अब कोई ख्वाहिश मुझे बहारों की 
के मैंने अब तो खिज़ा से ही दोस्ती कर ली 

सिया वही के जिन्हें दोस्ती का दावा था 
वो बदगुमाँ हुए हमसे दुश्मनी कर ली 

Ibadato'n Mein teri aise zindgi kar li 
sukoon dil ko mila humne bandagi kar li 

hui udas jo tanha yun khud ko bahlaya 
ghamo'n ko humne piroya hai shayari kar li 

nibhaya ehd e wafa humne unse shiddat se 
jala ke shmma mohbbaat ki roushani kar li 

wo tod baithe hain kyo saare silsile mujhse 
bataye aaj wo kyo humse berukhi kar li 

nahi hai ab koi khwahish mujhe baharo ki 
ke humne ab to khiza se hi dosti kar li 

'Siya' wahee ke jinhe dosti ka dawa tha 
wo badguman hue humse dushmani kar li

Saturday, 13 July 2013

बहुत उलझा दिया है ज़िंदगी ने

सितम ढाया हैं मुझ पर हर किसी ने 
बहुत उलझा दिया है ज़िंदगी ने 

दुखाया दिल तुम्हारी दिल्लगी ने
हमें तो मार डाला सादगी ने

हुई बेबस जहाँ में इस क़दर मैं
मुझे धोखे दिए हैं हर किसी ने

हुजूमे-गम से है बेहाल इतना
सकूं छीना है दिल का बेक़ली ने

दिल ए नादाँ मुझे इतना बता दे
ख़ुशी क्या दी तुझे इस ज़िंदगी ने

बिखर जाये न मेरा आशियाना
बड़ी मुश्किल से तिनके तिनके बीने

तेरे बिन अब तलक़ आया न जीना
रुलाया माँ बहुत तेरी कमी ने

जिसे हमदर्द जाना अपना माना
हमारे दिल को तोड़ा है उसी ने

ख़फ़ा इतने हो क्यूँ ये तो बताओ
तुम्हें भड़का दिया है क्या किसी ने

मेरे मांझी ये तेरा ही करम है
किनारों पर भी डूबे हैं सफ़ीने

सभी की है यहाँ अपनी ही दुनिया
न मेरा हाल भी पूछा किसी ने

खिज़ां के रंग से आजिज़ थी अब तक
लुभाया दिल गुलों की ताज़गी ने

कभी कुछ देर तो घर में रहा कर
किया रुसवा तेरी आवारगी ने

अगर संवेदना दिल में नहीं है
तो फिर तू लाख जा काशी मदीने

हुई मायूस जब मैं ज़िंदगी से
मुझे जीना सिखाया शायरी ने

sitam dhaya hai mujh par har kisi ne
bahut uljha diya hai zindgi ne

dukhya dil tumahari dillgi ne
hame to mar dala sadgi ne

hui bebas jaha'n mein is qadar main
mujhe dhokhe diye hai'n har kisi ne

hujoom e gham se hain behaal itna
sakoo'n cheena hai dil ka beqali ne

Dil e nadaa'n mujhe itna bata de ,
Khushi kya di tujhe is zindagi ne.

bikhar jaye na mera aashiyana
badi mushkil se tinke tinke bee'ne

tere bin ab talaq aaya na jeena
rulaya ma bahut teri kami ne

jise humdard jana apna mana
hamare dil ko toda hai usi ne

khafa itne ho kyun ye to batao
tumhe bhdka diya hai kya kisi ne

sabhi ki hai yahan apni hi duniya
n mera haal bhi pucha kisi ne

Khizaa'n ke rang se aajiz thi ab tak
Lubhaaya dil gulo'n ki taazgi ne.

mere majhi ye tera hi karam hai
kinaro par bhi doobe hain safeene

kabhi kuch der to ghar mein raha kar
kiya rusva teri awargi ne

agar samvedna dil mein nahi hai
to fir tu lakh ja kashi madeene

hui mayus jab main zindgi se
mujhe jeena sikhaya shayari ne

Thursday, 11 July 2013

nazm kashmaksh


चंद लफ़्ज़ों में बयाँ दर्द भला कैसे हो 
ऐसी पेचीदा हकीकत का बयाँ कैसे हो 
जिस हक़ीक़त को भी अफसाना बना दे दुनिया 
आग सीने में मेरे और बढ़ा  दे दुनिया 
ऐसा अफसाना सुनाने से मिलेगा भी क्या 
दर्द को अपने बढ़ाने से मिलेगा भी क्या

लफ़्ज़ गूंगे हुए अब, दर्द सुनाएँ किसको 
भूल ही जाये चलो दिल से भुलायें उसको
दिल को सदमों के सिवा और मिला भी क्या है 
साँस चलती है फ़कत और रहा भी क्या है
बात जो दिल में थी वो न किसी से कह पाए 
लज्ज़त-ए-गम का ये अहसास भी न सह पाए ...

chand lafzo'n mein byan dard bhala kaise ho 
aisi pecheeda haqeeqat ka byan kaise ho 
jis haqeeqat ko bhi afsaana bana de duniya 
aag seene mein mere aur badha  de duniya 
aisa afsana sunnane se milega bhi kya 
dard ko apne badhne se milega bhi kya 

lafz gonge hue ab,dard sunaye kisko 
bhul hi jaye chalo dil se bhulaaye usko 
dil ko sadmo'n ke siwa aur mila bhi kya hai
saan's  chalti hai faqat aur raha  bhi kya hai 
baat jo dil mein thi wo na kisi se kah paaye 
lazzat e gham ka ye ehsaas bhi na sah paaye 

siya

मोह माया सब तृष्णा समझा


सार जगत का सच्चा समझा 
मोह माया सब तृष्णा समझा 

वक़्त बुरा जब आया हम पे
तब हमने हर रिश्ता समझा

छोड़ दिया है साथ सभी ने
जिनको हमने अपना समझा

दुनिया की इस भीड़ में मैंने
खुद को कितना तनहा समझा

फिर खुशियों के पल आयेगे
हर सपने को सच्चा समझा

दुःख की इन लम्बी राहों का
कितना आसां रस्ता समझा

सिया भरम न टूटा अब तक
सच को भी इक सपना समझा

SIYA

Saturday, 6 July 2013

अपने को इतने गौर से देखा न कीजिये

आईना रख के सामने बैठा न कीजिये 
अपने को इतने गौर से देखा न कीजिये 

यादों की ज़िंदगी का भरोसा न कीजिये 
बिस्तर को आँसुवों से भिगोया न कीजिये 

इस रोग का इलाज़ नहीं है कहीं जनाब 
पहरों किसी की सोच में डूबा न कीजिये 

एहसास यूँ करेंगे तो दिल पे बन आएगी 
ऐसे किसी के वास्ते रोया न कीजिये

कितने नक़ाब ओढ़े है हर आदमी यहाँ
आइना लेके शहर में घूमा न कीजिये

रिश्तों का कुछ तो आप भी रक्खा करें लिहाज़
हर बात को बढ़ा के उछाला न कीजिये

बरसों के बाद खुशियों की दस्तक सुनाई दी
इस घर में ग़म का कोई भी चर्चा न कीजिये

मेयार ए इश्क़ आपने समझा नहीं है क्या ?
दुनिया के सामने हमें रुसवा न कीजिये

तंग आ गए है आपकी इन बंदिशों से हम
ऐसा न कीजिये कभी वैसा न कीजिये

फिरते है लोग मुट्ठे में अपनी नमक लिए
यूं ज़ख्म दूसरों को दिखाया न कीजिये

कुछ तो हमें सकूं से जीने भी दे ज़रा
सांसों पे मेरी आप यूँ क़ब्ज़ा न कीजिये

अपनी ज़बान पे भी कभी कायम रहे ज़रा
झूठा कभी भी आप यूँ दावा न कीजिये

आदाबे दोस्ती का तकाज़ा है ये सिया
गैरों के सामने कोई चर्चा न कीजिये

aina rakh ke saamne baitha na kijiye
apne ko itne gaur se dekha na kijiye

yodon ki zindgi ka bhrosa na kijiye
bistar ko ansuvon se bhigoya na kijiye ..

is rog ka ilaaz nahi hai kaheen janab
pahroN kisi ki soch mein duba na kijiye

ehsaas yun karengeN  to dil pe ban aayegi
aise kisi ke waste roya na kijiye

kitne naqab odhe hain har aadmi yahan
aaina leke shahar mein ghuma na kijiye

rishton ka kuch to aap bhi rakkha kareN lihaz
har baat ko badha ke uchala na kijiye

rishton ka kuch to aap bhi rakkha kare lihaz
har baat ko badha ke uchala na kijiye

me'Yaar e ishq aapne samjha nahi hai kya
duniya ke saamne hame Rusvaa Na Kijiye

tang aa gaye hai aapki in bandishon se hum
aisa na kijiye kabhi vaisa na kijiye

firte hai log mutthi mein apni namak liye
yoon zakhm dusro'n ko dikhaya na kijiye

kuch to hame sukooN se jeene bhi de zara
sason pe miri aap yun qabza na kijiye

apni zabaaN pe bhi kabhi qayaam rahe zara
jhootha kabhi aap yun dawa na kijiye

Aadab e dosti ka taqaza hai aye siya
ghairon kee samne koi charcha na kijiye

जाने क्यों लोग हमसे जलते हैं

हम तो हँस कर ही सबसे मिलते हैं 
जाने क्यों लोग हमसे जलते हैं 

अब ये दुनिया फरेब लगती है 
आज कल घर से कम निकलते हैं 

ऐसे रिश्तों को क्या सहेजे हम 
जो बुरे वक़्त पे बदलते हैं 

आईना देखकर हो क्यूँ हैराँ 
एक दिन रूप रंग ढलते हैं 

वो ही है कामयाब दुनिया में 
वक़्त के साथ जो बदलते हैं 

घर से निकले तो बस यहीं सोचा 
हादसे साथ साथ चलते हैं 

कितना इंसान हो गया हिंसक 
देख कर जानवर दहलते हैं 

चापलूसों की जिंदगी मत पूछ 
भीख की रोटियों पे पलते हैं 

रोज़ ही कुछ चिराग़ बुझते हैं 
 रोज़ ही कुछ चिराग़ जलते हैं 

क्यूँ हैं इंसान में हसद इतनी 
लेके नफरत क्यूँ दिल में जलते हैं 

मेरे बच्चे ज़हीन हैं इतने 
ये खिलौनों से कब बहलते हैं 

आँधियाँ जो दिए जलाती है 
वो दिए ज़ुल्मतों को खलते हैं 

तंज ख़ुद ही कर लिया जाए 
आइये ज़ाएका बदलते हैं 

hum to hans kar hi sabse milte hain 
jane kyun log humse jalte hain

ab ye duniya fareb lagti hai 
aaj kal ghar se kam nikalte hain ...

ise rishton ko kya saheje hum jo bure waqt pe badalate hain 

wo hi hai qamyaab duniya mein 
waqt ke saath jo badalte hain 

Aaina dekh kar ho kyun hairaan 
ek din roop rang dhalte hain

ghar se nikle to bus yaheen socha 
hadse sath sath chalte hain

kitna insaan ho gaya hinsak 
dekh kar janvar dahalate hain

chaapluso'n ki zindgi mat puch 
bheek ki rotiyon pe palte hain

mere bachche zaheen hain itne 
ye khilone se kab bahalte hain

roz hi kuch chirag bujhte hain 
roz hi kuch charag jalte hain

kyun hain insan mein hasad itni 
le ke nafrat kyun dil mein jalte hain

andhiyaan jo diye jalaati hai 
wo diye zulmato'n ko khalte hain

tanz khud pe hi kar liya jaaye 
aaiye zaika badalate hain

मेरे साथ चलने वाले सभी लोग थक गए हैं

कई छावं ढूढ़ते है तो कई ठिठक गए हैं 
मेरे साथ चलने वाले सभी लोग थक गए हैं 

मुझे दुःख नहीं है इसका मैं तबाह हो गयी हूँ 
मेरा  एक घर जला  तो कई घर चमक गए हैं 

जो  खड़े थे सर उठाये उन्हें आँधियों ने तोडा 
हैं वहीं सही सलामत जो शज़र लचक गए हैं 

मेरी ज़िन्दगी में जबसे तेरा प्यार आ गया है 
मेरी खिल उठी है राते मेरे दिन महक गए हैं 

मिरा  दिल धड़क धड़क के मुझे क्यों सता रहा है
तेरा शोर सुनते सुनते मेरे कान पक गए हैं 

वो जो डर गए थकन से वो खड़े रहे किनारे 
जिन्हें शौक़ था सफ़र का वहीं दूर तक गए हैं 

मैं ये सोचती थी उनसे ये कहूँगी वो कहूँगी 
मेरे सामने वो आये तो अधर चिपक गए हैं 

जिन्हें पी रही थी छिप कर मैं सिया कई बरस से 
मेरे आँसुवों  से दिल के वहीं ग़म छलक गए हैं 


kai chavn dhundhte hain to kai thithak gaye hain
mire sath chalne wale sabhi log thak gaye hain

mujhe dukh nahi hai iska main tabaah ho gayi hoon 
mera ek ghar jala to kai ghar chamak gaye hain 

jo khade the sar uthaye, unhe aandhiyon ne toda 
hain waheen sahi salamat jo shazar lachak gaye hain 

meri zindgi mein jabse tira pyaar aa gaya hai 
miri khil uthi hai raate mere din mahak gaye hain 

mira dil dhadak dhadak ke mujhe kyo sata raha hai
tera shor sunte sunte mere kaan pak gaye hain 

wo jo dar gaye thakan se wo khade rahe kinaare 
jinhe shouq tha safar ka waheen door tak gaye hain 

main ye sochti thi unse ye kahungi wo kahungi 
mere saamne wo aaye to adhar chipak gaye hain

jinhe pee rahi thi chip kar main siya kai baras se 
mere aansuon se dil waheen gham chalak gaye hain



मेरे चेहरे पा नयी धूल उड़ा दी किसने

जुस्तजू मंजिले जानां की बढ़ा  दी किसने
मेरे चेहरे पा  नयी धूल उड़ा दी किसने 

इनमें रहती थी मेरे यार की सूरत हर वक़्त 
मेरी आँखों से ये  तस्वीर हटा दी किसने 

मेरे सीने में उतर आती हैं इसकी टीसे 
कोहसारों में ये आवाज़ लगा दी किसने 

था मेरे शहर का माहौल बहुत ही अच्छा 
चंद जुमलों से मगर आग लगा दी किसने 

बात बनती हुई हर बार बिगड़ जाती है
मेरे विश्वास की बुनियाद हिला  दी किसने

आँख से दिल में चले आये है महबूब मेरे 
बात बिगड़ी हुई इस बार बना दी किसने 

 किसका ये एक अमल ग़ैर मुनासिब ठहरा 
छत गिराना थी ये दीवार गिरा  दी किसने 

justjoo manizil e jana ki badha di kisne
mere chehre pa nayi dhool uda di kisne 

in mein rahti thi mere yaar ki surat har waqt 
meri aankho se ye tasveer hata di kisne 

mere sene mein utar aati hai iski teese 
kohsaaro'n mein ye aawaz laga di kisne 

tha mere shahar ka mahoul bahut hi achcha 
chand jumlo'n se ye fhir aag laga di kisne 

baat banti hui har baar bigad jaati hai 
mere vishvaas ki buniyaad hila di kisne