Thursday, 11 July 2013

मोह माया सब तृष्णा समझा


सार जगत का सच्चा समझा 
मोह माया सब तृष्णा समझा 

वक़्त बुरा जब आया हम पे
तब हमने हर रिश्ता समझा

छोड़ दिया है साथ सभी ने
जिनको हमने अपना समझा

दुनिया की इस भीड़ में मैंने
खुद को कितना तनहा समझा

फिर खुशियों के पल आयेगे
हर सपने को सच्चा समझा

दुःख की इन लम्बी राहों का
कितना आसां रस्ता समझा

सिया भरम न टूटा अब तक
सच को भी इक सपना समझा

SIYA

1 comment:

  1. फिर खुशियों के पल आयेगे
    हर सपने को सच्चा समझा

    दुःख की इन लम्बी राहों का
    कितना आसां रस्ता समझा

    सिया भरम न टूटा अब तक
    सच को भी इक सपना समझा

    फिर खुशियों के पल आयेगे
    हर सपने को सच्चा समझा

    वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

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