Wednesday, 20 May 2015

मुझ पर तेरा फिर से इक एहसान हुआ

दिल में मेरे पैदा फिर अरमान हुआ
मुझ पर तेरा फिर से इक एहसान हुआ
जाने कैसा ये मेरा सम्मान हुआ
मुझको लगता है मेरा अपमान हुआ
वक़्त ने मेरे चेहरे पर ये क्या लिक्खा
देख के मुझको आईना हैरान हुआ
जान बूझ कर हमने धोका खाया है
सोच समझ कर भी ये दिल नादान हुआ
जिसकी ख़ातिर दुनिया से मैं ग़ाफ़िल थी
आज हुनर वोही मेरी पहचान हुआ
इन होठों पर हँसी न आये आज के बाद
ज़ारी मेरे हक़ में ये फरमान हुआ,
दुनिया ने किस दौर में किसको बख़्शा हैं
सीता का भी इस जग में अपमान हुआ
siya

Tuesday, 19 May 2015

रब से मांगी हुई दुआ हो तुम

मेरी चाहत की इंतेहा हो तुम
रब से मांगी हुई दुआ हो तुम
इतनी मुद्दत के बाद ये जाना
ज़िंदगानी का फ़लसफ़ा हो तुम
ख़ुद को देखूँ तो, तुम नज़र आओ
अक्स मेरा है आईना हो तुम
दिल के आगे मैं हार बैठी हूँ
जानती हूँ की बेवफा हो तुम
मेरी ख़ुशियाँ हैं तुमसे वाबस्ता
क्या बताऊ तुम्हें की क्या हो तुम
उड़ गए होश देख कर तुमको
मैं हूँ बेख़ुद मेरा नशा हो तुम
ज़ख्म मेरे महकने लगते है
मेरे हर दर्द की दवा हो तुम
siya

Wednesday, 13 May 2015

उसकी बातो में दम नहीं होता

मुझको यूँहीं भरम नहीं होता
उसकी बातो में दम नहीं होता
कितने खुदगर्ज़ ओ बेमुरव्वत हो
तुमको एहसास ग़म नहीं होता
दिल तो पत्थर का हो गया तेरा
मेरे अश्क़ों से नम नहीं होता
दिल तो छलनी किया है अपनों ने
इतना ग़ैरों में दम नहीं होता
इसका कोई ईलाज है तो बता
दर्द दिल का ये कम नहीं होता 

सांस लेना भी हो गया भारी

ख़्वाहिशों पर थी कैफियत तारी 
सांस लेना भी हो गया भारी 

कोई चेहरा रहा निगाहों में 
रात आँखों में काट गयी सारी 

इब्तिदा किसने की मोहब्बत की 
सिलसिला आज भी हैं ये ज़ारी 

सिर्फ इक बात मैंने ठानी है 
यूँहीं रखना है  अपनी ख़ुद्दारी 

थी बहुत दूर मंज़िल ए मक़सूद 
हर क़दम पर थी एक दुश्वारी 

बस्तियाँ फूँकने को काफ़ी है 
सिर्फ हल्की सी एक चिंगारी 

हम ज़माने में रह गए पीछे 
क्या करे हम में थी वफ़ादारी 

लोग नादान तुमको कहने लगे 
इतनी अच्छी नहीं हैं होशियारी 

पूछ मत हाल अब हमारा तू 
एक दिल है हज़ार बीमारी 

आप तो बदहवास हो बैठे 
मैं निभाती रही रवादारी 

जिस्म तो हार ही चुका था सिया 
हौसला फिर भी मैं नहीं हारी 

Khwaahishon par thi "Kaifiyat" taari 
Saans Lena Bhi ho gaya bhari 

koyi chehra raha nigahon mein 
raat aankho mein kat gayi saari 

ibteda kisne ki mohbbat ki 
silsila aaj bhi hain  wo  zaari

sirf ik baat maine thaani hai 
yuheen rakhni hai  apni khuddari 

thi bahut der manzil e maqsood 
har qadam par thi ek dushvaari 

bastiyan foonkne ko kaafi hain 
sirf halki si ek chingaari 

hum zamne mein rah gaye peeche 
kya kare hum mein thi wafadari 

log naadan tumko kahne lage 
itni achchi nahi hain hoshiyaari  

puch mat haal ab hamara tu 
ek dil hai hazaar bemaari 

aap to badhawas ho baithe 
main nibhati rahi rawadaari 

jism to haar hi chuka tha siya 
hausla phir bhi main nahi haari 

Friday, 8 May 2015

मेरा हर काम कल पे टल रहा है

अँधेरा सा हुआ  , दिन ढल रहा है 
मेरा हर काम कल पे टल रहा है 

बज़ाहिर खुश्क सी आँखे है लेकिन 
ये सेहरा भी कभी जल थल रहा है 

गला घोंटा गया है सच का लेकिन 
 यहाँ पर झूठ अब तक फल रहा है 

गुज़रती जा रही है ज़िंदगानी 
बताये क्या तुम्हें क्या चल रहा है 

बड़ी शिद्दत से इक सपना अधूरा
मेरी आँखों में कब से  पल रहा है  

हिक़ारत से इसे न आज देखो 
कभी इसका सुनहरा कल रहा है 

क़सीदे पढ़ रहा था कल जो मेरे 
उसे अब नाम मेरा खल रहा है 

ग़मो की धूप है सारे जहाँ में 
हमारे सर पे सूरज जल रहा है 

मैं जिसको ओढ़ कर निकली थी सर पे  
तुम्हारे नाम का आँचल रहा है 



Tuesday, 5 May 2015

दवा लगे न लगे हमको कुछ दुआ ही लगे

मर्ज़ है कौन सा आखिर ये कुछ पता ही लगे
दवा लगे न लगे हमको कुछ दुआ ही लगे 

हर एक रूह में इक दर्द सा छुपा ही लगे
हर एक शख़्स क्यूँ खुद से ख़फ़ा ख़फ़ा ही लगे
जहाँ भी है वो दुआ है के खैरियत से हो
मिले भले न मिले उसका कुछ पता ही लगे
नहीं है कोई जो बे -ऐब नस्ल ए आदम में
वो देवता हैं तो मुझको भी देवता ही लगे
न जाने कितने मोहब्बत के रंग हैं उसमें
मैं जब भी देखूँ वो चेहरा नया नया ही लगे
क्यों उसको रहती हैं हम से शिकायतें इतनी
भला भी काम हमारा जिसे बुरा ही लगे
शब ए हयात की ये शम्मा बुझने वाली है
चराग़ ए दिल को हमारे ज़रा हवा ही लगे
siya

Monday, 4 May 2015

नहीं कुछ फर्क भी शाम- ओ -सहर में

फ़िज़ा रहती है कोहरे के असर में
नहीं कुछ फर्क भी शाम- ओ -सहर में

तुम्हें ये भी नहीं मालूम शायद
सभी तनहा हैं जीवन के सफर में

मुझे मिलना नहीं है अब किसी से
बहुत खुश हूँ मैं तनहा अपने घर में

तेरे दिल तक पहुँचना चाहते हैं
अभी ठहरे हैं हम तेरी नज़र में

फ़क़ीराना तबियत पायी मैंने
ये दौलत ख़ाक़ है मेरी नज़र में

मेरा घर साथ ही चलता है मेरे
कहीं भी मैं अगर निकलूं सफर में