Friday, 18 April 2014

बिन तेरे कुछ मुझे सूझता ही नहीं

tere dar ke siwa rasta he nahin 
bin tere kuch mujhe sujhta he nahi 

sirf mahboob ke wasl se hai shifa 
ishq ke marz ki kuch dawa hi nahi

kyu na ye jaan uspe nichavar karu'n
uske jaIsa koi chahta hi nahiN

jhoothe ilzaam mujhpe lagata hai jo 
wo mujhe theek se janta hi nahin

khudgarz is zamane se mujhko siya
nekiyo.n ka mila kuch sila hi nahin

be zameeri ki bhi intehaa ho gai
jurm kar ke kahe ;main bura hi nahin

तेरे दर के सिवा रास्ता ही नहीं
बिन तेरे कुछ मुझे सूझता ही नहीं

सिर्फ मेहबूब के वस्ल से है शिफ़ा
इश्क़ के मर्ज़ की कुछ दवा ही नहीं

क्यों न ये जान उसपे निछावर करूँ
उसके जैसा कोई चाहता ही नहीं

झूठे इल्ज़ाम मुझपे लगाता है जो
वो मुझे ठीक से जानता ही नहीं

बे ज़मीरी कि भी इन्तेहाँ हो गयी
जुर्म करके कहे, मैं बुरा तो नहीं

ख़ुदग़रज़ इस ज़माने से मुझको सिया
नेकियों का मिला कुछ सिला ही नहीं 

Thursday, 17 April 2014

रिश्तों के सूखे है उपवन

रिक्त हुआ है मन का आँगन 
रिश्तों के सूखे है उपवन

महज़ औपचारिकता बरतें 
कहाँ दिलों में है अपनापन 

चकनाचूर हुए है सपनें 
छलनी छलनी है मेरा मन 

इक तूफ़ान उठा है दिल में 
अश्क़ों से भीगा है दामन

उनको दर्द सुनाये क्योंकर
पत्थर जैसा है जिनका मन

ऐसे भी कुछ क्षण आते हैं
मुश्किल हो जाता है जीवन

Tuesday, 15 April 2014

यूं लग रहा है किसी ने मुझे पुकारा हो

ख़ुदा करे मेरी मंज़िल का ये इशारा हो
यूं लग रहा है किसी ने मुझे पुकारा हो
नज़र जमाये हुवे हूँ भटक नहीं सकती
अँधेरी शब है ,तुम्हीं रहनुमा सितारा हो
उलझती रहती हूँ तन्हाइयों से ख़ुद अपनी
तो कैसे साथ किसी का मुझे ग़वारा हो
सबक़ लिया है गुज़िश्ता ख़ताओं से अपनी
ख़्याल रखती हूँ धोखा न फिर दुबारा हो
मैं उसको देख के पत्थर की हो चुकी जैसे
वो मेरी आँख में ठहरा हुआ नज़ारा हो
कभी तो ख़त्म सराबों का हो सफर या रब
मैं मौज हूँ तो मेरा तू ही बस किनारा हो
मैं अपना राख सा जीवन टटोलती हूँ सिया
कहीं दबा कोई एहसास का शरारा हो
khuda kare meri manzil ka ye ishara ho
.yoon lag raha hai kisi ne mujhe pukara ho
nazar jamaye huve hoon .bhatak nahi'n sakti
andheri shab hai,. tum hi rahenuma sitara ho
ulajhti rahti hoon tanhaiyon se khud apni
to kaise saath kisi ka mujhe gawara ho
sabaq liya hai guzishta khatao'n se main ne
khayal rakhti hoon .dhoka na phir dobara ho
main usko dekh ke pathar ki hohi chuki jaise ...
wo meri aankh me thahra huwa nazara ho
kabhi to khtam saraabo'n ka ho safar ya rab
main mauj hoon to mera tu hi bus kinaara ho
main apna raakh sa jeevan tatolati hoon siya
kaheen daba koyi ehsas ka sharara ho
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Monday, 14 April 2014

है मगर अंदर से वो टूटा हुआ

एक चेहरा जो बहुत हँसता हुआ 
है मगर अंदर से वो टूटा हुआ 

सांस लेती हूँ तो उठता है धुवाँ 
किसने देखा दिल मेरा जलता हुआ 

वो जो कसमें खा रहा था कल तलक़ 
उसका सच फिर आज क्यों झूठा हुआ

क्यूँ मेरा मासूम दिल घबरायें है 
हर घडी रहता है क्यूँ सहमा हुआ

आओ कुछ पल तो सुकूँ से काट लें
जब तलक़ है दर्द ये सोया हुआ

ज़ख्म देने वाले तेरा शुक्रिया
सोचती हूँ जो हुआ अच्छा हुआ

सच कभी बहरूप भरता ही नहीं
सच के आगे झूठ फिर रुस्वा हुआ

मुझसे दामन सब्र का छूटा नहीं
जो रज़ा उसकी थी बस वैसा हुआ

टूट के बरसी घटा दिल पर मेरे
दिल में है तूफ़ान सा उठता हुआ

कौन सुनता है यहाँ किसको पड़ी
ये जहाँ गूंगा हुआ बहरा हुआ

आँधियाँ हों बारिशें हों धूप हो
पाओगे जीवन मेरा ठहरा हुआ

सीख ले अब बिन मेरे जीना सिया
चल दिया उठ कर वो ये कहता हुआ

Ek Chehra Jo Bohat Hansata hua
hai' magar andar se wo tuta hua

sans leti hoon to uth'ta hai dhuva'n
kisne dekha dil mera jalta hua

wo to qasmein kha raha tha kal talak .
uska shach phir aaj kiyon jhoota hua

kyun mera maasoom dil ghabraye hai
har ghadi rahta hai kyun sahma hua

aao kuch pal to sukoo'n se kaat le'n
jab talaq hai Dard ye soya hua

Zakham dene wale tera shukria
sochti hoon jo hua achcha hua

sach kabhi bahroop bharta hi nahi ..
sach ke aage jhooth phir rusva hua

mujh se daman sabr ka choota nahi ....
jo raza uski thi bas waisa huwa

Toot Ke Barsi ghata Dil Par mere
dil mein hai tufaan sa uth'ta hua

kaun sunta hai yahan kisko padi
ye jahan gunga hua bahra hua

waqt ki ho dhoop ya ho aandhiya'n
paoge jeevan mera thahra hua

seekh le ab bin mere jeena siya
chal dia uth kar wo ye Kahta Hua

Saturday, 12 April 2014

chand sher

गुल को छूते ही महकती है हवा वैसे ही 
नेक सोहबत से ख्यालात बदल जाते है

gul ko choote hi mahakti hai hawa vaise hi 
nek sohbat se khyalaat badal jaate hain

siya
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teri nigaah ne anmol kar diya mujh ko
nahi'N to zarre ko duniya mein kaun puche hai

तेरी निग़ाह ने अनमोल कर दिया मुझको
नहीं तो ज़र्रे को दुनिया में कौन पूछे है 
siya 
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hijr ki aag khud hi sukhegi
main ne phaela liya hai nam aanchal

हिज्र की आग खुद ही सूखेगी 
मैंने फैला लिया है नम आँचल 
siya 
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इस दिले ज़ार की हालत पे करम फ़रमाओ
नर्म लहजे से कभी बात भी कर लो मुझसे

is dil e zaar ki haalat pe karam farmaaon
narm lahje se kabhi baat bhi kar lo mujhse

siya
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zamane ne bahut daulat kama li 
magar daman mohbbat se hai khali 

ज़माने ने बहुत दौलत कमा ली 
मगर दामन मोहब्बत से है खाली 
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kis ki dastak hai phir dar e dil par
jiska andaz tere jaisa hai 

किसकी दस्तक है फिर दरे दिल पर 
जिसका अंदाज़ तेरे जैसा है

siya
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bahenge ab na qatere aansuvo'n ke
khusi ka ab rawaa'n dariya hua hai 

बहेंगे अब न क़तरे आँसुवों के
 ख़ुशी का अब रवाँ दरिया हुआ है 
siya
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tarbiyat bhi badal saki na unhe
parvarish mein hi kuch kami hongi

तरबियत भी बदल सकी न उन्हें 
परवरिश में ही कुछ कमी होगी 
siya
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aankho mein nami aur labo par hai tabbsum
uspe bhi ye kahna ke adakaar nahiN hai  
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मांगने जाउंगी किस किस से वफ़ा की  दौलत
 ले तेरे सामने ये दस्ते दुआ रक्खा है
mangne jaungi kis kis se wafa ki daulat
 le tere saamne ye dast e dua rakkha hai 
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सर्द सन्नाटा हमें खा जाएगा 
आओ फिर से कोई हंगामा करें
sard sannata hame kha jayeega 
aao phir se koyi hungama kareN
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वो घबराना वो शर्माना हया आँखों में होती थी 
कभी ऐसे भी दिन थे जब वफ़ा आँखों में होती थी 
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 हादसे गुज़रे है दिल पर मेरे दो चार अभी 
दर्द थम जाएगा लगते नहीं आसार अभी 
 Hadsay guzre hai dil par mere  Do Chaar abhi
 dard tham jayega lagte nahiN aasaar abhi 

siya
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इतनी मुद्दत के बाद ये जाना
ज़िंदगानी का फ़लसफ़ा हो तुम 

itni muddat ke baad jaana
Zindagani ka falsafa ho tum

siya
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{Save Water! Save Life}
कल की तस्वीर यहीं होगी जनाब ए आली 
हमको पीने का भी पानी न मय्यसर होगा 
kal ki tasweer yaheeN hogi janab e aali 
humko peene ka bhi paani n mayysar hoga

siya
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बे ख़याली में जिन्हें तू छोड़ कर जाता रहा
 तेरी यादों के वो कुछ लम्हें हमारे पास हैं 

Be-khayali mein jinhe tu chor kar jata raha
 teri yaadon ke wo kuch lamhe hamaare paas hain 

siya
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किया है नाज़ जो क़तरे ने खुद पर
 समंदर हँस रहा है दूर जाकर
kiya hai naaz qatre ko khud par
 samandar hans raha hai door jaakar

siya

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हमारे ख्बाब  कुछ  टूटे हैं  ऐसे तेरी राहों में
के अब देहलीज़ पर पलकों के भी आने से डरते है
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एहसास के ज़ख्मों पे भी रखती नहीं मरहम
 जीवन से कुछ इस तरह मैं नाराज़ हुई हूँ 

ehsaas ke zakhmon pe bhi rakhti nahi marham
 jeevan se kuch is tarah main naraaz hui hoon .....

siya
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बहुत है आजकल फुर्सत हुआ क्या 
तेरे दिल से कोई रुखसत हुआ क्या 
bahut hai aajkal fursat hua kya 
tere dil se koi rukhsat hua kya 

siya 
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सूरज बड़े ग़ुरूर से निकला था ए सिया
 कोहरे ने आ के ढक दिया उसके जमाल को 
suraj bahut ghuroor se nikla tha aye siya
kohre ne aa ke dhak diya uske jamaal ko

siya
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हँसते रोते हमने सारा जीवन यहीं गुज़ार दिया
 कुछ लोगों ने नफरत की और कुछ लोगों ने प्यार दिया

hanste rote humne sara jeevan yaheeN guzaar diya 
kuch logoN ne nafrat ki aur kuch logoN ne pyaar diya 
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किया है दर्द ने घर मेरे दिल में 
ख़ुशी में भी छलक आते हैं आँसू
kiya hai dard ne ghar mere dil mein 
khushi mein bhi chalak aate hai'N aansuN

siya
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रिश्तों की कायनात  में सिमटी हुई मै
मुद्द्त से अपने आप को भूली हुई हूँ मै

rishto ki kaynaat mein simti hui main
muddat se apne aap ko bhuli hui hooN main 

कुछ न कुछ सर पे मुसल्लत है मुसीबत बन कर
ज़िंदगी में कहाँ आराम कभी मिलता है 
kuch n kuch sar pe musllat hai musibat ban kar
 zindgi mein kahan aaram kahaN milta hai 
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रेल की  पटरी के जैसा साथ हम चलते रहे
 दूरियां जो दिल के अंदर थी अभी मौजूद हैं 

rail ki patri ke jaisa sath hum chalte rahe 
duriyan jo dil ke andar thi abhi maujud hain 

अब न वो दिन हैं न वो तुम तुम हो मगर जाने क्यूँ 
फाँस इक दिल में लगी अब भी चुभन देती है

Ab na wo din haiN  na wo tum ho magar jaane kyun 
phaNs ik dil mein lagi ab bhi chubhan deti hai 

 …………………………………………। 

गर्दिश -ए-वक़्त ने हालात ही बदल डाले
मेरे अपनों के ख्यालात ही बदल डाल

gardish e waqt ne halaat hi badal daal
 mere apno ke khyalaat hi badal daale
......................................................

कुछ न कुछ सर पे मुसल्लत है मुसीबत बन कर
ज़िंदगी में कहाँ आराम कभी मिलता है 
kuch n kuch sar pe musllat hai musibat ban kar
 zindgi mein kahan aaram kahaN milta hai 
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रेल की  पटरी के जैसा साथ हम चलते रहे
 दूरियां जो दिल के अंदर थी अभी मौजूद हैं 

rail ki patri ke jaisa sath hum chalte rahe 
duriyan jo dil ke andar thi abhi maujud hain 

अब न वो दिन हैं न वो तुम तुम हो मगर जाने क्यूँ 
फाँस इक दिल में लगी अब भी चुभन देती है

Ab na wo din haiN  na wo tum ho magar jaane kyun 
phaNs ik dil mein lagi ab bhi chubhan deti hai 

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गर्दिश -ए-वक़्त ने हालात ही बदल डाले
मेरे अपनों के ख्यालात ही बदल डाल

gardish e waqt ne halaat hi badal daal
 mere apno ke khyalaat hi badal daale
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Friday, 4 April 2014

कभी हद्दों से तो बाहर मैं जा नहीं सकती


नज़र से खुद को मैं अपनी गिरा नहीं सकती
कभी हद्दों से तो बाहर मैं जा नहीं सकती
मेरे वजूद में तहज़ीब साँस लेती है
जदीद तर्ज़ पे खुद को गँवा नहीं सकती
किसी ने शहर में अफ़वाह ये उड़ा दी है
चराग़ लेके मैं आँधी में जा नहीं सकती
किये है तुमने जो एहसान बारहा मुझ पर
ये क़र्ज़ मर के भी तेरा चुका नहीं सकती
वो एक दिल मैं जिसे आइना समझती हूँ
मैं उसके सामने चेहरा छुपा नहीं सकती
तेरे फ़रेब ने मोहतात कर दिया मुझको
मैं दिल पे और नए ज़ख्म खा नहीं सकती
अजीब लोग है अपनी ग़रज़ से मिलते हैं
सिया मैं उनसे ताल्लुक़ निभा नहीं सकती
nazar se khud ko main apni gira nahin sakti
kabhi hado'n se to bahar main ja nahi sakti
mere wajood me tahzeeb saans leti hai .
jadeed tarz pe khud ko ganwa nahi sakti
kisi ne shahar mein afwaah kyun uda di hai
charagh leke main aandhi mein ja nahin sakti
kiye hain tumne jo ehsaan barha mujhpar
ye qarz mar ke bhi tera chuka nahi sakti
wo ek dil main jise aaeina samajhti hoon .
main uske saamne chehra chupa nahi sakti
tere fareb ne mohtat kar diya mujh ko
main dil pe aur naye zakhm kha nahin sakti
ajeeb log hain apni gharaz se milte hain ..
siya main unse ta'alluq nibha nahi sakti

Thursday, 3 April 2014

किसके क़दमों में ये सर अपना झुका रक्खा था

मैंने चाहत का खुदा किसको बना रक्खा था 
किसके क़दमों में ये सर अपना झुका रक्खा था 

हाँ वहीं ख्वाब तो टूटे हैं मेरी आँखों से 
मैंने मुद्दत से जिसे दिल में बसा रक्खा था 

झूठी खुशियों का ठिकाना ही नहीं है कोई 
ग़म का सरमाया कहाँ दिल से जुदा रक्खा था 

आज इक आस के पंछी का गला घोंट दिया
खाना ए दिल में बहुत शोर मचा रक्खा था

मुझको दुनिया की समझ आई नहीं क्यूँ अब तक
उसका हर झूठ क्यों सच मैंने बना रक्खा था

कल की शब् मुझ पे सिया कितनी अजब गुज़री थी
दिल पे हैरत ने अजब रंग जमा रक्खा था

maine chahat ka khuda kisko bana rakkha tha
kiske qadmon mein yeh sar apna jhuka rakkha tha

haan waheen khwaab to tute hain meri anakho se
main ne muddat se jinhein dil me bsa rakha tha

jhooti khushiyon ka thikhna hi nahi hai koi
gham ka sarmaya .kahaan dil se juda rakha tha

aaj ik aas ke panchi ka gala ghont diya .
khana e dil me bahot shor macha rakha tha

mujhko duniya kee samajh aayi nahin kyun ab tak
uska har jhooth kyu sach maine bana rakkha tha

kal ki shab mujh pe siya kitni ajab guzri thee .
dil pe hairat ne ajab rang jama rakh thaa