Tuesday, 19 August 2014

शब ए फ़ुरक़त में फिर ताज़ा ग़ज़ल तहरीर होती है

मेरे अश्कों से दिल की बेकली तशहीर होती है
 शब ए फ़ुरक़त में फिर ताज़ा ग़ज़ल तहरीर होती है

हमारे ज़ेहन ओ दिल में होती है यकसानियत जिस दम 
तभी जाकर मुकम्मल ख़वाब की ताबीर होती है 

मुझे बाँधे हुए रखती है यादों से हर इक लम्हा 
बहुत मज़बूत इस रिश्ते की ये ज़ंजीर होती है 

किसी के इश्क़ में जीना उसी की याद में मरना 
सुना करते हैं उल्फ़त की यहीं तक़दीर होती है 

खुली हो या हो पलकें बंद बस तुझको ही पाती हूँ 
इन आँखों में हर इक लम्हा तेरी तस्वीर होती है 

जो हर दम याद में राँझे के अपने गीत गाती हो 
वो मैं होती हूँ या मुझमें छिपी इक हीर होती है 

तुम्हारी ही  ज़ुबाँ में हम तुम्हें कुछ कह तो दे लेकिन
हमारे पावँ में तहज़ीब की जंज़ीर होती है 
 
वो हमको मिल न पाया आखरिश तो ये समझ आया 
भला ऐसी कहाँ हर शख़्स की तक़दीर होती है 

धनक के सारे रंग इस के लिए मख़सूस होते है 
मोहब्बत क्या, ख़ुशी और ग़म की  इक तस्वीर होती है 

मेरी हर साँस तेरा नाम ही जपती रहे हर दम 
यहीँ इस दिल के काग़ज़ पर लिखी तहरीर होती है 


mere ashko'n se dil ki bekali tash'heer hoti hai. Shab-e-furqat me phir taaza ghazal tahreer hoti hai

Hamaare zehn o dil meN hoti hai yaksaaniyat jis dam
Tabhi jaakar mukammal khwaab ki t'abeer hoti hai.

mujhe bandhe hue rakhti hai yadon se har ik lamha 
Bahut mazboot is rishte ki ye zanjeer hoti hai

Kisi ke ishq me'n jeena usi ki yaad me'n marna :
Suna karte hai'n ulfat ki yahi taqdeer hoti hai.

Tumhari hi zubaan me hum tumhe khuch kah bhi den lekin Hamare paaun me tahzib ki zanjeer hoti hai
khuli ho ya ho palke'n band bus tujhko hi paati hoon 
in aankho mein har ik lamha teri tasweer hoti hai 

Jo har dam yaad me'n Raanjha ke apne geet gaati ho .
wo main hoti hoon ya mujh mein chipi ik heer hoti hai 

wo Humko mil na paaya akhrish to ye samajh aaya Bhala aisi kahaN har shakhs ki taqdeer hoti hai

Dhanak ke saare rang is ke liye makhsoos hote hai.
Muhabbat kya, khushi aur gham ki ik tasveer hoti hai

meri har sans tera naam hi japti rahe har dam yaheen is dil ke kaghaz par likhi tehrer hoti hai
  

Saturday, 16 August 2014

चाहा था जिसको मैंने वो जाने किधर गया



शीराज़ा ज़िंदगी का कुछ ऐसे बिखर गया 
चाहा था जिसको मैंने वो जाने किधर गया 

जज़्बों में उसके आती हैं सच्चाईयाँ नज़र 
उसका हर एक लफ़्ज़ ही  दिल में उतर गया 

कुछ काम अब नहीं है तेरी याद के सिवा 
दे कर तू इंतज़ार का ऐसा हुनर गया 

एहसास ही नहीं था गुज़रते समय का कुछ 
तुझसे मिली तो वक़्त का पहिया ठहर गया 

हर एक आईने को अधूरी लगी थी मैं 
उसकी नज़र से मेरा सरापा सँवर गया 

बस कुछ हसीन लम्हों की सौग़ात देके वो 
दामन मेरी हयात का यादों से भर गया 

कैसे छुपाऊँ चेहरे की मैं ये उदासियाँ 
खुशियां समेट वो मेरी, अपनी डगर गया 

तुम रास्ते में मेरा कहीं छोड़ दो न साथ
जब ये ख़याल आया तो दिल मेरा डर गया  

उससे मिले बिना रही बेचैन मैं सिया 
मिलकर जो बिछड़ा और अकेला वो कर गया 

sheeraza zindgi ka kuch aise bikhar gaya 
Chaha tha jisko maine  wo jane kidhar gaya

jazbon uske aati hain  sachyiyan nazar
uska har ik lafz hi dil mein utar gaya 

kuch kaam ab nahi hai teri yaad ke siwa 
de kar tu intezaar ka aisa hunar gaya

har ek aaine ko adhuri lagi thi main 
uski nazar se mera sarapa sanwar gaya 

ehsaas  hi nahi tha guzarte samaey ka kuch 
 tujh se mili to waqt ka pahiya  thahar gaya

bus kuch haseen  lamho ki  soghaat de ke wo
Daman meri hayaat ka yado'n se bhar gaya

kaise chupau'n chehre ki main ye udasiyan 
Khushiyan samet wo meri, apni dagar gaya 

Tum.raaste main mera kahi chor do na saatth
jab ye  khyaal aaya to dil mera dar gaya  

uss se mile bina rahi be chain main siya 
mil kar jo bichda  aur akela  wo kar gaya

..

Wednesday, 13 August 2014

देश प्रेम की अलख जगायें



आओ हम सब आज़ादी का जश्न मनायें
भारत माँ के वीरों का यशगान सुनायें
हमें मिली आज़ादी जिनके बलिदानो से।
उन वीरों को याद करें हम न बिसरायें
संकट आया तो सब अपना काम भूल कर
लोहे की दीवार से डट जाएँ सरहद पर
धन्य है वो माँ जिसने ऐसे लाल जने है
देश की ख़ातिर जो क़ुर्बान हुए हैं हँसकर
सूरज जिसको किरणों की माला पहनाता
धवल हिमालय इसके सर की शान बढ़ाता
इस गुलशन को प्रेम से आओ हम महकायें
जन जन में हम देश प्रेम की अलख जगायें
नफरत की दीवार गिराना है हम सबको
जन विकास की मंज़िल पाना है हम सबको
आओ हम सब एक ही सुर में मिल कर गायें
देश के हित में भारतवासी इक हो जायें ,,

मेरे सवाल का शायद कोई जवाब नहीं

निगाह मुझसे मिलाने की उनमें ताब नहीं 
मेरे सवाल का शायद कोई जवाब नहीं 

बहुत दिनों से कोई दिल में इज़्तिराब नहीं 
समाया आँखों में अब और कोई ख़वाब नहीं 

मेरी अना तो अभी सरबुलंद है मुझ में 
मुझे शिकस्त भी दे कर वो कामयाब नहीं

ख़ुदा का शुक्र है,शर्म ओ हया सलामत है 
वो आईना है मगर मैं भी बे-हिजाब नहीं

बहार आने को आई समाँ नहीं बदला
खिले है ख़ार हर इक शाख़ पर गुलाब नहीं

यहाँ दिमाग़ नहीं दिल की होती है तालीम
हुजूर इश्क़ के मक़तब का कुछ निसाब नहीं

हिजाब में है हर इक राज़ मेरी हस्ती का
ज़माना शौक़ से पढ़ ले ये वो किताब नहीं

कोई बताये के सम्भलें तो किस तरह सम्भलें
मिली हैं ठोकरें इतनी की कुछ हिसाब नहीं

हाँ मेरे फन से मुनव्वर है इक जहाँ लेकिन
मैं एक ज़र्रा ए ख़ाकी हूँ आफताब नहीं

सिया सुकून से बाक़ी है जो गुज़र जाए
अब और रंज सहूँ इतनी मुझ में ताब नहीं

Nigaah mujhse milane ki un mein taab nahi
mere sawal ka shayad koyi jawab nahin

bahut dino se mere dil mein Izteraab nahi'n
samaya aankho mein ab aur koyi khwaab nahi'n

meri ana to abhi sarbuland hai mujh mein
mujhe shikast bhi de kar wo kamyaab nahi'n

khuda ka shukr hai, sharm o haya salamat hai
wo aaina hai magar main bhi be-hijaab nahin

bahaar aane ko aayi sama'N nahee'N badla
khile hain khar har ik shaakh per gulaab nahi'N

yahan dimagh nahin dil ki hoti hai taaleem
hujoor ishk ke matab ka kuch nisab nahi'n

koi bataaye ke sambhle'N to kis tarah sambhle'N
mili hai'n thokre'N itni ki kuch hisaab nahi'N

Hijaab mei hai har eik raaz meri hasti ka
zamana shouq se padh le ye wo kitab nahee'N

haa'N mere fun se munwwar hai ik jahan lekin
Main aik zarra e khaki hun aaftaab nahi

siya sukoon se baki hai jo guzar jaaye
Ab aur ranj sahooN itni mujh men taab nahi'N..

Monday, 11 August 2014

Desh Bhakti Geet

आओ हम सब आज़ादी का जश्न मनाये 
भेदभाव का उंच नीच का फ़र्क मिटायें 

हमसे बैर जो लेने आये मुँह की खायें 
आँख उठा कर दुश्मन हमको देख न पायें 

हिन्दुस्तां की धरती पर सब इक जुट होकर 
नफ़रत की ये  खड़ी हुई  दीवार गिरायें 

देश पे अपने प्राण न्योछावर कर दें हँस कर
 ऐसा मन में देश-प्रेम का भाव जगायें 

 हिन्दुस्तानी माताएँ अपने बच्चों को 
अमर शहीद जवानों के यशगान सुनायें 

एक वतन है एक हमारी धरती माता 
देश के हित की ख़ातिर हम भी इक हो जाए  

Sunday, 10 August 2014

माज़ी से अपने रोशनी पाते रहेंगे हम



तारीकी ए हयात मिटाते रहेंगे हम
माज़ी से अपने रोशनी पाते रहेंगे हम 

ज़ख़्मों से जिस्म ओ जाँ को सजाते रहेंगे हम
ता - उम्र तेरे नाज़ उठाते रहेंगे हम

सौदाइयों को तेरे कोई शग़ल चाहिए 
तेरी गली में ख़ाक़ उड़ाते रहेंगे हम 

शायद हमारे हाल पे आये उन्हें तरस 
रूदाद ए ग़म उन्ही को सुनाते रहेंगे हम 

भाता नहीं तुम्हारा खफ़ा होना हर घडी 
कब तक बताओ तुमको मनाते रहेंगे हम 

नफरत का दौर दे न सकेगा कभी शिकस्त 
इंसानियत का पाठ पढ़ाते रहेंगे हम 

 तनहा गुज़र गया सिया मौसम बहार का 
यादों में उनकी अश्क़ बहाते रहेंगे हम 

Taareeki-e-hayaat mitaate rahenge hum 
maazi se apne roshni paate rahenge hum

zakhmo'n se jism o jaa.n ko sajate rahenge ham
 ta -umr tere  naaz  uthate rahenge  hum

saudayion ko tere koyi shaghl chahiye
teri gali mein khaaq udaate rahenge hum

Shayad hamare haal pe aaye unhe taras 
rudaad-e-gham unhi ko Sunate rahenge hum 

bhata nahi'n tumhara khafa hona har ghadi 
kab tak batao tumko manaate rahenge hum 

nafrat ka dour de na sake ga kabhi  shikast.. 
 insaniyet ka paath padate rahenge hum

 . tahna guzar gaya siya  Mausam bahar ka 
Yado'n mein unki  ashk bahaate rahe'nge hum.\

Saturday, 9 August 2014

आपकी नज़रों से पढ़ लेती हूँ सूरत आपकी

ग़म भुला कर मुस्कुरा देना है आदत आपकी
आपकी नज़रों से पढ़ लेती हूँ सूरत आपकी

ज़िंदगी में हर क़दम पर है ज़रूरत आपकी 
मेरे दिल पे  हो गयी है अब हुक़ूमत आपकी 

आपको मरक़ज़ में रख कर आँखें करती हैं तवाफ़ 
इस तरह करती रही हूँ मैं इबादत आपकी

आप जितना भी छुपाना चाहे छुप सकता नहीं 
आप का ये हाल करता है वज़ाहत आपकी 

आपको मासूमियत और सादगी से क्या मिला 
जान ले लेगी किसी दिन ये शराफ़त आपकी 

आपका आज़ुर्दा  होना कब गँवारा था हमें 
कैसे देखें ये बताये ऐसी हालत आपकी 

शक्ल ए इंसान में फ़रिश्ता पा लिया मैंने सिया
बस गयी हर एक धड़कन में अक़ीदत आपकी  ..

gham bhulakar muskra dena hai aadat aapki 
aapki nazro'n se padh leti hoon surat aapki 

zindagi mein har qadam par hai zarurat aapki 
mere dil pe ho gayi hai ab huqumat aapki 

aapko marqaz mein rakh kar aankhen karti hai tawaf
is tarha karti rahi hoon main ibadat aapki 

”Aap jitna bhi chupana chahe'n  chup sakta nahi'n 
aapka ye haal karta hai wazahat aapki 

aapko masumiyat aur sadgi se kya mila 
jaan le legi kisi din ye shrafat aapki 

aapka  aazurda hona kab ganwara tha hame'n 
kaise dekhe'n  ye bataye aisi haalat aapki 

shakl e insaan mein farishta pa liya maine siya 
bas gayi har ek dhadkan mein aqeedat aapki