Monday, 1 September 2014

मंज़िल को मेरी और भी दुश्वार कर दिया

बद सूरती ने राह की बेज़ार  कर दिया 
मंज़िल को मेरी और भी दुश्वार कर दिया 

छोटी सी बात थी उसे तकरार कर दिया
किस्सा ये घर का था सर ए बाज़ार कर दिया 

हुस्न ओ कशिश में प्यार की खोया  हुआ था दिल
 ठोकर से अपनी वक़्त ने बेदार कर दिया 

मासूमियत का ओढ़ के आये थे जो  नक़ाब 
 उनको तो दूर से ही नमस्कार कर दिया

कुछ ख़ास दोस्तों के हुए इस तरह करम 
मुझसे  मेरे क़बीले को बेज़ार कर दिया 

आये थे लोग शम ए हिदायत लिए हुए 
हमने तो उनको साहब ए किरदार कर दिया 

है मेरी ख़ुदशनासी ये हरगिज़ अना नहीं 
बस एहतियात ने मुझे ख़ुद्दार कर  दिया 

Badsoorati ne raah ki bezaar kar diya 
Manzil ko meri aur bhi dushwaar kar diya
choti si baat thi use takraar kar diya kissa ye ghar ka tha sar e bazaar kar diya
Husn-o-kashish me'n pyar ki khoya hua tha dil 
Thokar se apni waqt ne bedaar kar diya
masumiyat ka odh ke aaye the jo naqab unko to door se hi namskaar kar diya
Kuchh khaas dosto'n ke hue is tarah karam :
Mujh se mere qabeele ko bezaar kar diya.
Aaye the log sham-e-hidaayat liye hue
Hamne unhe'n bhi saahib-e-kirdaar kar diya
Hai meri khudshanasi ye hargiz ana nahi
bus ehtiyaat ne mujhe khudaar kar diya.

Friday, 29 August 2014

प्यार से कटते जो दिन रात बहुत अच्छा था

थाम कर चलते मेरा हाथ बहुत अच्छा था 
प्यार से कटते जो दिन रात बहुत अच्छा था

तुमसे कह देते हर इक बात बहुत अच्छा था 
ग़र बदलते न ये हालात बहुत अच्छा था|

काश अश्को को न आँखों में छुपाया होता 
चीख उठते जो ये जज़बात बहुत अच्छा था 

उम्र सारी ही कटी अपनी तो तन्हाई में 
आप देते जो मेरा साथ बहुत अच्छा था

कम से कम खुद से बिछड़ने का गिला न रहता
हम जो सह लेते ये सदमात बहुत अच्छा था

ठहरे पानी सी वो खामोश मोहब्बत उसकी . ....
होती चाहत की जो बरसात बहुत अच्छा था

रूह आजाद हुई जिस्म से एक रोज़ सिया
उसने जितना भी दिया साथ बहुत अच्छा था.

तमाम उम्र के पल पल का मैं हिसाब लिखू

जो साथ दे ये क़लम तो  नयी किताब लिखूं    
 तमाम उम्र के पल  पल का मैं हिसाब लिखू   
   
हरेक सफ़हे पे मैं ग़म  बिखेर   दूं अपने  
जो सारी उम्र मिले हैं मुझे  अज़ाब लिखूं

तमाम सायों को पैकर में ढलती जाऊँ 
तमाम उम्र जो देखे   वह सारे ख़्वाब   लिखूं

हज़ार ग़म हो मगर हँस के सामना कर ले
 उसी के वास्ते खुश दिल का मैं ख़िताब लिखू 

मिले उसे मेरी  सारी ही नेकियों का सिला
मैं उसके नाम "सिया" अपना सब  सवाब लिखूं

Jo saath de ye qalam to nai kitaab likhu'n 
 Tamaam umr ke pal pal ka mai'n hisaab likhu'n.

har ek safhe pe main gham bikher dun apne
jo sari umr mile hai mujhe ajaab likhun  

Tamaam saayo'n ko paikar me'n dhaalti jaau'n 
Tamaam umr jo dekhe wo sare khwab likhu'n.

hazaar gham ho magar hans ke samna kar le 
usi ke waste khush dil ka main khitaab likhu'n 

Mile use meri saari hi nekiyo'n ka sila :
 Main uske naam siya apne sab sawaab likhu'n

तुम्हारे खत के सब अल्फ़ाज़ लगते है नगीने से



सजाया तुमने हर एहसास कुछ ऐसे क़रीने से 
तुम्हारे खत के सारे लफ़्ज़  लगते है नगीने से

मैं शेरों में भला कब तक पिरोऊँ दर्द के किस्से 
इधर आ ए ख़मोशी अब लगा लूँ तुझको सीने से

हमारा दिल परेशां हो गया है दश्त ए वहशत में
बहुत दुश्वारियाँ हैं ज़िंदगी में कुछ महीने से

न हम शंकर न हम सुकरात लेकिन हक़ के हामी हैं 
कहाँ डरते हैं हम भी ज़िंदगी का ज़हर पीने से

ये जब आता है आँखो से ज़ियादा ही बरसता है 
हसद रहने लगी है मुझको सावन के महीने से

sajaya tumne har ehsaas kuch aise kareene se 
tumahare khat ke sare lafz  lagte hai nageene se

main shero'n me'n bhala kab tak pirou'n dard ke kisse
Idhar aa ai khamoshi ab laga loo'n tujhko seene se.

hamara dil paresha'n ho gaya hai dasht-e wehshat mein
bahut dushvaariya'n hain zindgi mein kuch maheene se

Na ham Shankar na ham suqraat lekin haq ke haami hai"n 
Kaha'n darte hai'n ham bhi zindagi ka zehr peene se

Ye jab aata hai aankho'n se ziyaada hi barasta hai :
Hasad rahne lagi hai mujhko saawan ke maheene se.
..

Thursday, 28 August 2014

ज़िंदगी अब मुझे सताने लगी


ख़ौफ़ तन्हाइयों से खाने लगी
ज़िंदगी अब मुझे सताने लगी

जाने इस नींद को हुआ क्या है
रात भर ये मुझे जगाने लगी

ज़िंदगी के उदास लम्हों में
ग़र्द मायूसियों की छाने लगी

अभी पिछला ही ख्वाब टूटा था
फिर नया ख़्वाब इक सजाने लगी

कोई लम्हा ख़ुशी का आया तो
मेरी तक़दीर मुँह चिढ़ाने लगी

दफ़्न उसको वहीं पे कर देंगे
कोई हसरत जो सर उठाने लगी

ज़िंदगी ने तो आज़माया है
मौत भी आँख अब मिलाने लगी

Khauf tanhayion Se khane lagi
zindgi ab mujhe satane lagi

Jaane is neend ko hua kya hai
raat bhar ye mujhe jagane lagi

Zindagi k udaas lamhon mein
gard_mayoosiyon ki chhane lagi

abhi pichla hi khwab tuta tha
phir naya khwab ik sajane lagi

koyi lamha khushi ka aaya to
meri taqdeer munh chidhane lagi

dafn uskoo waheen pe kar denge
koyi hasrat jo sar uthane lagi

zindagi ne to aazamaya hai
maut bhi aankh ab dikhane lagi

Tuesday, 19 August 2014

शब ए फ़ुरक़त में फिर ताज़ा ग़ज़ल तहरीर होती है

मेरे अश्कों से दिल की बेकली तशहीर होती है
 शब ए फ़ुरक़त में फिर ताज़ा ग़ज़ल तहरीर होती है

हमारे ज़ेहन ओ दिल में होती है यकसानियत जिस दम 
तभी जाकर मुकम्मल ख़वाब की ताबीर होती है 

मुझे बाँधे हुए रखती है यादों से हर इक लम्हा 
बहुत मज़बूत इस रिश्ते की ये ज़ंजीर होती है 

किसी के इश्क़ में जीना उसी की याद में मरना 
सुना करते हैं उल्फ़त की यहीं तक़दीर होती है 

खुली हो या हो पलकें बंद बस तुझको ही पाती हूँ 
इन आँखों में हर इक लम्हा तेरी तस्वीर होती है 

जो हर दम याद में राँझे के अपने गीत गाती हो 
वो मैं होती हूँ या मुझमें छिपी इक हीर होती है 

तुम्हारी ही  ज़ुबाँ में हम तुम्हें कुछ कह तो दे लेकिन
हमारे पावँ में तहज़ीब की जंज़ीर होती है 
 
वो हमको मिल न पाया आखरिश तो ये समझ आया 
भला ऐसी कहाँ हर शख़्स की तक़दीर होती है 

धनक के सारे रंग इस के लिए मख़सूस होते है 
मोहब्बत क्या, ख़ुशी और ग़म की  इक तस्वीर होती है 

मेरी हर साँस तेरा नाम ही जपती रहे हर दम 
यहीँ इस दिल के काग़ज़ पर लिखी तहरीर होती है 


mere ashko'n se dil ki bekali tash'heer hoti hai. Shab-e-furqat me phir taaza ghazal tahreer hoti hai

Hamaare zehn o dil meN hoti hai yaksaaniyat jis dam
Tabhi jaakar mukammal khwaab ki t'abeer hoti hai.

mujhe bandhe hue rakhti hai yadon se har ik lamha 
Bahut mazboot is rishte ki ye zanjeer hoti hai

Kisi ke ishq me'n jeena usi ki yaad me'n marna :
Suna karte hai'n ulfat ki yahi taqdeer hoti hai.

Tumhari hi zubaan me hum tumhe khuch kah bhi den lekin Hamare paaun me tahzib ki zanjeer hoti hai
khuli ho ya ho palke'n band bus tujhko hi paati hoon 
in aankho mein har ik lamha teri tasweer hoti hai 

Jo har dam yaad me'n Raanjha ke apne geet gaati ho .
wo main hoti hoon ya mujh mein chipi ik heer hoti hai 

wo Humko mil na paaya akhrish to ye samajh aaya Bhala aisi kahaN har shakhs ki taqdeer hoti hai

Dhanak ke saare rang is ke liye makhsoos hote hai.
Muhabbat kya, khushi aur gham ki ik tasveer hoti hai

meri har sans tera naam hi japti rahe har dam yaheen is dil ke kaghaz par likhi tehrer hoti hai
  

Saturday, 16 August 2014

चाहा था जिसको मैंने वो जाने किधर गया



शीराज़ा ज़िंदगी का कुछ ऐसे बिखर गया 
चाहा था जिसको मैंने वो जाने किधर गया 

जज़्बों में उसके आती हैं सच्चाईयाँ नज़र 
उसका हर एक लफ़्ज़ ही  दिल में उतर गया 

कुछ काम अब नहीं है तेरी याद के सिवा 
दे कर तू इंतज़ार का ऐसा हुनर गया 

एहसास ही नहीं था गुज़रते समय का कुछ 
तुझसे मिली तो वक़्त का पहिया ठहर गया 

हर एक आईने को अधूरी लगी थी मैं 
उसकी नज़र से मेरा सरापा सँवर गया 

बस कुछ हसीन लम्हों की सौग़ात देके वो 
दामन मेरी हयात का यादों से भर गया 

कैसे छुपाऊँ चेहरे की मैं ये उदासियाँ 
खुशियां समेट वो मेरी, अपनी डगर गया 

तुम रास्ते में मेरा कहीं छोड़ दो न साथ
जब ये ख़याल आया तो दिल मेरा डर गया  

उससे मिले बिना रही बेचैन मैं सिया 
मिलकर जो बिछड़ा और अकेला वो कर गया 

sheeraza zindgi ka kuch aise bikhar gaya 
Chaha tha jisko maine  wo jane kidhar gaya

jazbon uske aati hain  sachyiyan nazar
uska har ik lafz hi dil mein utar gaya 

kuch kaam ab nahi hai teri yaad ke siwa 
de kar tu intezaar ka aisa hunar gaya

har ek aaine ko adhuri lagi thi main 
uski nazar se mera sarapa sanwar gaya 

ehsaas  hi nahi tha guzarte samaey ka kuch 
 tujh se mili to waqt ka pahiya  thahar gaya

bus kuch haseen  lamho ki  soghaat de ke wo
Daman meri hayaat ka yado'n se bhar gaya

kaise chupau'n chehre ki main ye udasiyan 
Khushiyan samet wo meri, apni dagar gaya 

Tum.raaste main mera kahi chor do na saatth
jab ye  khyaal aaya to dil mera dar gaya  

uss se mile bina rahi be chain main siya 
mil kar jo bichda  aur akela  wo kar gaya

..