Saturday, 2 April 2016

जीवन है काँटों का बिछौना
कितना मुश्किल इस पर सोना
उसने जब जी चाहा खेला
दिल को मेरे जान खिलौना
जाओगे या साथ रहोगे !
कुछ तो अपना मूंह खोलो ना !
ज़ालिम प्यार का यहीं नतीजा
दुःख पाना है सुख है खोना
आँसू , आहें और तन्हाई
हिज्र की शब में और क्या होना
ख़ुद ही रस्ता कट जाएगा
तुम भी मेरे साथ चलो ना !
मुझसे एक सहेली बोली
दिल में ख़्वाहिश को मत बोना
सिया ढूँढती हो क्यों कांधा
अच्छा होगा तन्हा रोना
siya

Friday, 25 March 2016

गणतंत्र दिवस की आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनायें

तिरंगा मेरे भारत का रहे ऊँची उड़ानों में
ये लहराता नज़र आये हमेशा आसमानो में

वतन के नाम पर जो हँसके चढ़ जाते हैं सूली पर
ये जज़्बा ये जुनूँ मिलता है भारत के जवानो में

भगत सिंह,चंद्रशेखर और जो अश्फ़ाक़ ओ बिस्मिल थे
भरा था हौसला क़ुर्बानियों का उन जवानो में

मिला था खून जिनका ख़ाक़ में इस देश की
चमकते हैं सितारे बन के वो अब आसमानो में

जवान बेटा वो जिसका लौट कर आया न सरहद से
अभी तक उसके आँसू चुभ रहे है माँ के शानो में

यहीं अहले क़लम पैग़ाम देते है मोहब्बत का
सभी ग़ज़लों में नज़्मों में सभी गीतों में गानो में

tiranga mere bharat ka rahe unchi udaanon men
ye lahrata nazar aaye hamesha aasmanao mein

vatan ke naam par jo hanske chadh jaate hain sooli par
Ye jazba ye junoon milta hain bharat ke jawano mein

Bhagat Singh, Chandrashekhar,aur jo Ashfaqallah the
bhara tha hausla qurbaniyon ka in deewano mein

mila tha khoon jinka khaaq mein is desh ki khatir
chamakte hai sitaare ban ke wo ab aasmano mein

jawan beta wo jiska laut kar aaya na sarhad se
Abhi tak uske ansoo chubh rahe hain maa ke shaanon men

yaheen ahle qalam paigham dete hai mohbbat ka
sabhi ghazlo'n mein nazmo'n mein sabhi geeto mein gano mein

दोहे

           


जीवन रूपी नाव को साँसों की है आस 
जाए जब  संसार से कुछ न होगा पास 

जो जीवन बेरंग सा दिखता तुम्हे उदास 
उस में भर दो प्रेम के रंगो का उल्लास 

अंतर्मन में झाँक ले  जहाँ प्रभु का वास 
 उसके सिमरन से मिटे जनम जनम की प्यास 

ए मनवा तू ही बता काहे रहे उदास 
तुझ पर तो रहती सदा रब की दृष्टि ख़ास 

कण कण में अनुभव हुआ  जब से तेरा वास 
रोम रोम में बस गया  श्रद्धा और विश्वास





Wednesday, 16 March 2016

geet

किस से प्रीत करूँ मैं बोलो किसको मीत लिखूँ
शब्द अधूरे से हैं मेरे कैसे गीत लिखूँ
जब कोई तस्वीर बनाऊँ अक्स बिखरता जाए
जो भी रंग भरु मैं उसमें वही उतरता जाए 
हार मान लूँ इसको अपनी या फिर जीत लिखूँ
किस से प्रीत करूँ मैं बोलो किसको मीत लिखूँ
सीख न पायी क्यों अब तक मैं इस दुनिया के ढंग
समझ न पाऊँ कौन है बैरी कौन है मेरे संग
मैं नादान भला दुनिया की कैसे रीत लिखूँ
किस से प्रीत करूँ मैं बोलो किसको मीत लिखूँ
अपनी परछाईं से अक्सर डर जाती हूँ मैं
देखके बेहिस दुनिया घुट कर मर जाती हूँ मैं
अपनी हालत से घबराकर मैं भयभीत लिखूं
किस से प्रीत करूँ मैं बोलो किसको मीत लिखूँ
kis se preet karu'n main bolo kisko meet likhu'n
shadb adhure se hain mere kaise geet likhu'n
jab koyi tasweer banau, aks bikharata jaaye
jo bhi rang bharu'n main usmein wahi utarata jaaye
haar maanlu isko apni ya phir jeet likhu'n
kis se preet karu'n main bolo kisko meet likhu'n
seekh na paayi kyo ab tak main is duniya ke dhangh
samajh n paayi kaun hai bairi kaun hai mere sang
main nadaan hoon duniya teri kaise reet likhu'n
kis se preet karu'n main bolo kisko meet likhu'n
apni parchayi se aksar dar jaati hoon main
dekh ke behis duniya ghut kar mar jaati hoon main
apni halaat se ghabarakar main bhaibheet likhun
kis se preet karu'n main bolo kisko meet likhu'n
siya
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ghazal

छोड़ के अपनों को जो आई 
उसकी क़द्र न की हरजाई
जिसने दुनिया तेरी बसाई
उसमें ढूंढ़ी सिर्फ बुराई
मेहबूबा पर पढ़े क़सीदे
घर की ज़ीनत नज़र न आई
तूने अपनी ऐश की ख़ातिर
अपनी दौलत खूब लुटाई
और किफ़ायत करके उसने
बरती तेरी नेक कमाई
लाज का घूंघट काढ के जिसने
दोनों घर की लाज बढ़ाई
जिसने जीवनसाथी बनकर
मरते दम तक खूब निभायी
कसे चुटकले सबने उसपर
सबने उसकी हँसी उड़ाई
chhor ke apno ko jo aayi
uski qadr n ki harjaayi
jisne duniya teri basayi
usmein dhudhi sirf buraayi
mehbooba par padhe qaseede
ghar ki zeenat nazar n aayi
tune apni aish ki khaatir
apni daulat khoob lutaayi
aur qifayat karke usne
barti teri nek kamaayi
laaj ka ghunght kaadh ke jisne
dono ghar ki laaj badhayi
jisne jeevan saath ban kar
marte dam tak khoob nibhayi
kase chutkale sabne us par
sabne uski hansi udaaayi

Tuesday, 15 March 2016

रास आने लगी असीरी भी

छोड़ी जिसके लिए अमीरी भी
रास आई न वो फ़क़ीरी भी
क़ैद से हम रिहाई क्या मांगे
दिल को भाने लगी असीरी भी
मेरी फितरत में दोनों शामिल हैं
बादशाही भी और फ़क़ीरी भी
चंद सांसे भी कब ख़रीद सके
काम आई कहाँ अमीरी भी
काट दे तेरी जुस्तजू में सिया
ये जवानी भी और पीरी भी
chori jiske liye ameeri bhi
raas aayi n wo faqeeri bhi
qaid se hum rihaai kya mange
dil ko bhane lagi aseeri bhi
meri fitrat mein dono shamil hain
baadshahi bhi aur faqeeri bhi ..
chand sanse bhi kab khreed sake
kaam aayi nahi ameeri bhi
kaat de teri justjoo mein siya
ye jawani bhi aur peeri bhi
siya

Monday, 29 February 2016

punjabi ghazal

बापू वीरा ते माँ प्यारी
सारे टुर गए वारी वारी
रब दा भाना मनना पैंदा
दिल ते रख के पत्थर भारी
दिल न होर दुखाओ साडा
अग्गे घट हां दुःखा दी मारी
सह सह के दिल हो गया होला
हुन मैं हारी, हुन मैं हारी
ऐस दुनिया विच जी नईयों लगदा
कद आनी ये साडी वारी
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