Tuesday, 17 March 2015

रिश्ते लहू के आज सभी सर्द हो गये


पत्ते शजर के सब्ज थे जो ज़र्द  हो गए 
रिश्ते लहू के आज सभी सर्द हो गये

क्या आज कोई काम उन्हें हमसे पड़ गया
दुश्मन हमारे किस लिए हमदर्द गए 

मासूम बच्चियों को निशाना बना लिया 
और ये समझ रहे के हम  मर्द हो गए 

औरत में ढूँढें  त्याग, दया, सहनशीलता 
औरत के नाम सारे ये दुःख  दर्द हो गए 

राहे वफ़ा में किसको मिली मंज़िले सिया 
कितने ही राही रास्ते की गर्द हो  गए

Wednesday, 11 March 2015

फिर उदासी ने ली है अंगड़ाई

फिर उदासी ने ली है अंगड़ाई 
शाम कमरे यूँ उतर  आई 

अब कहीं कुछ नज़र नहीं आता 
ज़िंदगी !तू मुझे कहाँ  लायी 

घर से बाहर मं किस तरह निकलूं 
पावँ रोके हुए है तन्हाई 

इश्क़ अब हो गया है बाज़ारू 
हर तरह है वफ़ा के सौदाई 

शोहरतों के सफ़र में हूँ लेकिन 
उससे आगे है मेरी रुसवाई

तू भी होगा मेरी तरह  तनहा 
चाँद देखा तो तेरी  याद आई 

मेरे घर में है शोर मातम का 
बज रही है कहीं पे  शहनाई 

Monday, 9 March 2015

ख़ुदा से बंदे यहीं दुआ कर


सभी का दुनिया में तू भला कर
ख़ुदा से  बंदे यहीं दुआ कर
 

पयाम अम्न ओ अमान दे कर 
अगर है इंसा तो हक़ अदा कर

करू मैं कब तक तेरी हिफाज़त
तू अपनी मंज़िल का खुद पता कर

गले तलक़ आ गया है पानी
तू आज कोई तो फैसला कर

ये धूप ग़म की जला रही है
हवा के रुख का ज़रा पता कर

ये साँस चलती हैं तेरी जब तक
तू ज़िंदगी से यूँहीं लड़ा कर

भले ही दुनिया खिलाफ होगी
तू सच से लेकिन नहीं डरा कर

हैं उसकी आँखे उदास कितनी
करे वो एहसान मुस्कुरा कर

किसे दूँ इलज़ाम ए बेवफाई
किसी कहूँ मैं के तू वफ़ा कर

उसे भी देती हूँ मैं दुआऐं
चला गया जो ये दिल दुखा कर

भला किसी का न कर सके तो
कभी किसी का भी मत बुरा कर

नज़र में जिसकी चुभे उजाले
चला गया वो दिए बुझा कर

Saturday, 7 March 2015

नारी दिवस और शक्ति दिवस पर संसार की समस्त महिलाओं को मेरी हार्दिक शुभकामनायें ”



आज की नारी है तू करले स्वयं अपना उद्धार
अपने हक़ को पाना तेरा जन्म सिद्ध अधिकार
धरती जैसी सहनशीलता मत मानो आधार
मत चुप रहना ,और न करना जुल्म कभी स्वीकार
क़दम क़दम पर होता आया तुझ पर अत्याचार
रोज़ कहीें लुटती है अस्मत, कहीं पड़े दुत्काार
वक़्त पड़े तो दुर्गा,काली का लेकर अवतार
जग से पाप मिटा दे,कर दे दुष्टो का संहार
तू शक्ति है तू भक्ति है कर ले ये स्वीकार
तेरे सती धर्म के आगे यम ने मानी हार
कहीं गर्भ में जन्म से पहले दी जाती है मार
अपने घर में होता तुझसे दुश्मन सा व्यवहार
पत्नी ,बहन ,कभी माँ ,बेटी बन कर देती प्यार
गर नारी न होती तो कैसे चलता संसार
सिया

ज़िंदगी का सफ़र मुहाल हुआ

आज ये सोच कर मलाल हुआ 
कोई मेरा न हमख़याल हुआ 

मौत की राह हो गयी आसान 
ज़िंदगी का सफ़र मुहाल हुआ 

साथ ख़ुशियों ने मेरा छोड़ दिया 
ख्वाब इक फिर से पायमाल हुआ 

ज़ख्म से पुर हुआ मेरा दामन 
शिद्दते ग़म से दिल निहाल हुआ 

जिस्म में रूह अब नहीं रहती 
अब ये तेरे बग़ैर  हाल हुआ 

वो मेरा ग़म समझ नहीं पाया 
और मुझसे  न अर्ज़े हाल हुआ 

कोई लम्हा भी ऐसा कब गुज़रा 
मुझको तेरा न जब ख्याल हुआ 

कौन सी हसरतों का खून है ये 
मेरा दामन लहू से लाल हुआ 

लाश ख़्वाबों की ढो के हँसती हूँ 
हाय ये ज़ब्त भी कमाल हुआ 

फिर भी ख़्वाबों से परे एक हकीकत देखी

यूँ तो इस दिल ने तिरे प्यार की शिद्दत देखी
फिर भी ख़्वाबों से परे एक हकीकत देखी

रोक पायी न कभी आँख के अपनी आँसू
जब भी होते हुए बेटी कोई रुखसत देखी

यूँ लगा प्यार की मेरे कोई कीमत ही नहीं
उनकी आँखों में जब अपने लिए नफरत देखी

आज रोटी  की हक़ीक़त मुझे मालूम हुई
भूखे मासूम की बातों में जो वहशत देखीं

चाह दौलत की मुझे थी न कभी शोहरत की
 घर की हर अपने अमल में छुपी  इज़्ज़त देखी

Yu'n to is dil ne tire pyar ki shiddat dekhi
Phir bhi khwabo'n se pare aur haqeeqat dekhi.

Rok paai na kabhi aankh ke apni aansu
Jab bhi hote hue beti koi rukhsat dekhi.

Yu'n laga pyar ki mere koi qeemat hi nahi'n
Sab ki aankho'n me'n jab apne liye nafrat dekhi

Aaj roti ki haqeeqat mujhe m'aloom hui
Bhookhe m'asoom ki baato'n me'n jo wahshat dekhi.

Chaah daulat ki mujhe thi na kabhi shohrat ki
Ghar ki har apne amal me'n chhupi izzat dekhi.

Friday, 6 March 2015

देगा नुकसान ये मुस्कुराना बहुत

अश्क़ पड़ जायेंगे फिर बहाना बहुत 
देगा नुकसान  ये मुस्कुराना बहुत 

ज़ब्त करने की अब हम में ताकत कहाँ 
आपका हो गया आज़माना बहुत 

आप रिश्ता निभाना नहीं जानते 
 जाईयें हो चुका दोस्ताना बहुत 

जिसने मासूम फूलों को ज़ख़्मी किया 
उसकी  हरकत थी ये कायराना बहुत 

नन्ही कलियाँ मसल कर वो हँसते रहे 
क़हक़हे उनके थे वहशियाना बहुत 

इक बुरा हादसा भूल पायी न वो 
लाख चाहा है उसने भुलाना बहुत

ashq pad jaayenge phir bahana bahut 
dega nuksaan ye muskurana bahut 

zabt karne ki ab hum mein taakat kahan 
aapka ho gaya aazmana bahut 

aap rishta nibhana nahi janate 
jaiye'n ho chuka  dostana bahut 

jisne  masoom pholon ko zakhmi kiya 
uski harkat thi  ye kayrana  bahut 

Nanhin kaliyan masal kar wo  hanste rahe
 qahqahe  unke the wahshiyana bahut 

ik bura hadsa bhool paayi  na wo 
lakh chaha hai usne bhulana bahut 





siya