Saturday, 13 July 2013

बहुत उलझा दिया है ज़िंदगी ने

सितम ढाया हैं मुझ पर हर किसी ने 
बहुत उलझा दिया है ज़िंदगी ने 

दुखाया दिल तुम्हारी दिल्लगी ने
हमें तो मार डाला सादगी ने

हुई बेबस जहाँ में इस क़दर मैं
मुझे धोखे दिए हैं हर किसी ने

हुजूमे-गम से है बेहाल इतना
सकूं छीना है दिल का बेक़ली ने

दिल ए नादाँ मुझे इतना बता दे
ख़ुशी क्या दी तुझे इस ज़िंदगी ने

बिखर जाये न मेरा आशियाना
बड़ी मुश्किल से तिनके तिनके बीने

तेरे बिन अब तलक़ आया न जीना
रुलाया माँ बहुत तेरी कमी ने

जिसे हमदर्द जाना अपना माना
हमारे दिल को तोड़ा है उसी ने

ख़फ़ा इतने हो क्यूँ ये तो बताओ
तुम्हें भड़का दिया है क्या किसी ने

मेरे मांझी ये तेरा ही करम है
किनारों पर भी डूबे हैं सफ़ीने

सभी की है यहाँ अपनी ही दुनिया
न मेरा हाल भी पूछा किसी ने

खिज़ां के रंग से आजिज़ थी अब तक
लुभाया दिल गुलों की ताज़गी ने

कभी कुछ देर तो घर में रहा कर
किया रुसवा तेरी आवारगी ने

अगर संवेदना दिल में नहीं है
तो फिर तू लाख जा काशी मदीने

हुई मायूस जब मैं ज़िंदगी से
मुझे जीना सिखाया शायरी ने

sitam dhaya hai mujh par har kisi ne
bahut uljha diya hai zindgi ne

dukhya dil tumahari dillgi ne
hame to mar dala sadgi ne

hui bebas jaha'n mein is qadar main
mujhe dhokhe diye hai'n har kisi ne

hujoom e gham se hain behaal itna
sakoo'n cheena hai dil ka beqali ne

Dil e nadaa'n mujhe itna bata de ,
Khushi kya di tujhe is zindagi ne.

bikhar jaye na mera aashiyana
badi mushkil se tinke tinke bee'ne

tere bin ab talaq aaya na jeena
rulaya ma bahut teri kami ne

jise humdard jana apna mana
hamare dil ko toda hai usi ne

khafa itne ho kyun ye to batao
tumhe bhdka diya hai kya kisi ne

sabhi ki hai yahan apni hi duniya
n mera haal bhi pucha kisi ne

Khizaa'n ke rang se aajiz thi ab tak
Lubhaaya dil gulo'n ki taazgi ne.

mere majhi ye tera hi karam hai
kinaro par bhi doobe hain safeene

kabhi kuch der to ghar mein raha kar
kiya rusva teri awargi ne

agar samvedna dil mein nahi hai
to fir tu lakh ja kashi madeene

hui mayus jab main zindgi se
mujhe jeena sikhaya shayari ne

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