Monday, 15 July 2013

ग़मो को हमने पिरोया है शायरी कर ली



इबादतों में तेरी ऐसी ज़िंदगी कर ली 
सुकून दिल को मिला हमने बंदगी कर ली 

हुई उदास जो तन्हा यूँ खुद को बहलाया 
ग़मो को हमने पिरोया है शायरी कर ली 

निभाया एहद ए वफ़ा हमने इतनी शिद्दत से 
जला के शम्मा मोहब्बत की शायरी कर ली 

वो तोड़ बैठे है क्यों सारे सिलसिले मुझसे 
बताये आज वो क्यों हमसे बेरुखी कर ली 

नहीं है अब कोई ख्वाहिश मुझे बहारों की 
के मैंने अब तो खिज़ा से ही दोस्ती कर ली 

सिया वही के जिन्हें दोस्ती का दावा था 
वो बदगुमाँ हुए हमसे दुश्मनी कर ली 

Ibadato'n Mein teri aise zindgi kar li 
sukoon dil ko mila humne bandagi kar li 

hui udas jo tanha yun khud ko bahlaya 
ghamo'n ko humne piroya hai shayari kar li 

nibhaya ehd e wafa humne unse shiddat se 
jala ke shmma mohbbaat ki roushani kar li 

wo tod baithe hain kyo saare silsile mujhse 
bataye aaj wo kyo humse berukhi kar li 

nahi hai ab koi khwahish mujhe baharo ki 
ke humne ab to khiza se hi dosti kar li 

'Siya' wahee ke jinhe dosti ka dawa tha 
wo badguman hue humse dushmani kar li

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