Sunday, 28 July 2013

वो तो दिल में ही मेरे बसा मिल गया

ढूँढ़ती थी जिसे वो  पता मिल गया 
वो तो दिल में ही मेरे बसा मिल गया

तेरी रहमत से सब कुछ मिला है मुझे 
मेरी कश्ती को इक नाख़ुदा मिल गया 

मेरे रब ने दिया शायरी का हुनर 
मुझको जीने का इक आसरा मिल गया 

जब अँधेरे ने आकर के घेरा मुझे 
तू मुझे हमसफ़र रहनुमा मिल गया 

ऐसी रहमत हुई तेरी उन पर ख़ुदा 
राह भटके थे जो रास्ता मिल गया 

हर रविश से मेरी,मेरा वाकिफ़ ख़ुदा 
नाम का तेरे रब  आसरा मिल गया 

दिल उसी का ही सोने सा निखरा मिला 
मुश्किलों से मुझको तपा मिल गया 

जो गुनाहों से ख़ुद हो न पाया रिहा 
वोही दूजे का दिल जाँचता मिल गया 

यह जो संसार है घर नहीं है मेरा 
मुझको अपना सही अब पता मिल गया 


dhoondhti thi jise  wo pata mil gaya  
 wo to dil mein hi  mere,basaa mil gaya.

Teri rehmat se sab kuch mila hai mujhe
 Meri kashti ko ik, Nakhuda mil gaya..

mere rab ne diya shayari ka hunar 
mujhko jeene ka ik Aasra mil gaya 

jab Andhere ne aakar ke  ghera mujhe 
Tu mujhe humsafar, Rahnuma mil gaya

aisi rahmat hui teri un par khuda 
raah bhatke  unhe rasta mil gaya 

Har ravish se meri, mera waakif Khuda
naam ka  tere  rab aasra mil gaya 

dil usi ka hi sone sa nikhra mila 
mushkile se jo mujhko tapaa mil gaya 

jo gunaho se khud ho na paya riha 
Wohee  duje ke dil  jaanchata mil gaya 

Yeh jo sansaar hai ghar nahin hai mera
mujhko apna sahi ab pata mil gaya 


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