Saturday, 6 July 2013

मेरे चेहरे पा नयी धूल उड़ा दी किसने

जुस्तजू मंजिले जानां की बढ़ा  दी किसने
मेरे चेहरे पा  नयी धूल उड़ा दी किसने 

इनमें रहती थी मेरे यार की सूरत हर वक़्त 
मेरी आँखों से ये  तस्वीर हटा दी किसने 

मेरे सीने में उतर आती हैं इसकी टीसे 
कोहसारों में ये आवाज़ लगा दी किसने 

था मेरे शहर का माहौल बहुत ही अच्छा 
चंद जुमलों से मगर आग लगा दी किसने 

बात बनती हुई हर बार बिगड़ जाती है
मेरे विश्वास की बुनियाद हिला  दी किसने

आँख से दिल में चले आये है महबूब मेरे 
बात बिगड़ी हुई इस बार बना दी किसने 

 किसका ये एक अमल ग़ैर मुनासिब ठहरा 
छत गिराना थी ये दीवार गिरा  दी किसने 

justjoo manizil e jana ki badha di kisne
mere chehre pa nayi dhool uda di kisne 

in mein rahti thi mere yaar ki surat har waqt 
meri aankho se ye tasveer hata di kisne 

mere sene mein utar aati hai iski teese 
kohsaaro'n mein ye aawaz laga di kisne 

tha mere shahar ka mahoul bahut hi achcha 
chand jumlo'n se ye fhir aag laga di kisne 

baat banti hui har baar bigad jaati hai 
mere vishvaas ki buniyaad hila di kisne 

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