Wednesday, 26 February 2014

आशियाँ लुट गया है चाहत का

ऐसा टूटा भ्रम मोहब्बत का 
आशियाँ लुट गया है चाहत का 

कैसे तुमको पुकारती बोलो 
दरमयां था सवाल ग़ैरत का 

तेरी जिद्द थी ग़ुरूर था क्या था 
जो सबब बन गया बगावत का 

कैसे गुज़री उदास शाम मेरी 
हाल मत पूछ दिल की हालत का

बीते लम्हें टटोलती हूँ मैं
एक पल भी मिले जो फुर्सत का

मेरे सर पे करम रहा हरदम
मेरे ख़ालिक़ तुम्हारी रहमत का

झूठ का आज बोलबाला है
हर तरफ दौर है सियासत का

चल सिया अब यहाँ से कूच करे
वक़्त अब आ गया है हिजरत का

aisa tuta bharam mohbbat ka
aashiyaan lut gaya hai chahat ka

kaise tumko pukarati bolo
darmyaN tha sawal ghairat ka

teri zidd thi ghurur tha kya tha
jo sabab ban gaya bagavat ka

kaise guzri udaas shaam meri
haal mat puch dil ki halaat ka

beete lamhe tatolti hoon main
ek pal bhi mile jo fursat ka

mere sar pe raha karam hardam
mire khaliq tumahari rahmat ka

jhooth ka aaj bolbala hai
har taraf daur hai siyasat ka

chal siya ab yahan se kunch kare
waqt ab aa gaya hai hijrat ka

Tuesday, 18 February 2014

नज़्म … उसको तो बस जाना था


तुझे मुबारक दुनिया तेरी 
जो है ज़िम्मेवारी तेरी 
वो जो तेरे अपने है 
उनके भी कुछ सपने है 
अपना क्या है रह लेंगे
ग़म शेरों में कह लेंगे
हम दिल को बहला लेंगे
ये कह कर समझा लेंगे
जिसको अपना माना था
वो तो इक बेग़ाना था
उसने कहाँ निभाना था
उसको तो बस जाना था

tujhe mubarak duniya teri
jo hain zimmewari teri
wo jo tere apne hai
unke bhi kuch sapne hai
apna kya hai rah lenge
gham shero'N mein kah lenge
hum dil ko bahla lenge
ye kah kar samjha lenge
jisko apna mana tha
wo to ik begaana tha
usne kahan nibhana tha
usko to bus jana tha

SIYA

Monday, 17 February 2014

नज़्म…… हो सके तो मुझे भुला देना




तेरी यादों ने जब भी आ घेरा
दिल पे ग़म ने लगा लिया  डेरा 
अश्क़ आँखों से यूँ बरसते है 
रोज़ हम एक मौत मरते है 

टीस दिल में उतर सी जाती है 
रूह मेरी सिहर सी जाती है 
इस क़दर दम सा घुटने  लगता है 
और दिल में धुवाँ सा उठता है 

तल्ख़ बाते जो दिल जलाती है 
मेरी सांसे उखड सी जाती है 
थरथराने लगे बदन मेरा
 सहमा सहमा रहे ये मन मेरा 


ज़ब्त दिल पे नहीं रहा बाक़ी 
अब क्या सुनना कहा रहा बाकी 
इस क़दर दिल पे चोट खायी है 
अब तो इतनी सी बस दुहाई है 
अब न मुझको कोई सदा देना 
हो सके तो मुझे भुला देना 

teri yadoN ne jab bhi aa ghera dil pe gham ne laga liya dera ashk anakhoN hai yun bikharate roz hum ek maut marte hai

tees dil mein utar si jaati hai 
rooh meri sihar si jaati hai
is qadar dam sa ghutne lagta hai 
aur dil mein dhuan sa uthata hai 

talkh baate jo dil jalaati hai
meri sanse ukhad se jaati hai 
thartharane  lage badan mera
sahma sahma rahe ye  man mera 

zabt  dil pe nahiN raha baki
ab kya sunna kaha raha baki 
is qadar dil pe chhot khayi hai 
ab to itni si bus duhayi hai 
ab na mujhko koyi sada dena 
ho sake to mujhe bhula dena 




हैं दिलों से खेलने का ये हुनर बड़ा पुराना

थी तुम्हारी तो हमेशा से अदायें आशिक़ाना 
हैं दिलों से खेलने का ये हुनर बड़ा पुराना 

तुम्हें याद मैं न आऊँ, मुझे तुम भी भूल जाना 
मुझे अब है दूर जाना, मेरे पास तुम न आना 

नयी रोज़ इक मुसीबत,नया रोज़ इक तमाशा 
मेरे सब्र को न हरगिज़,कभी अब यूँ आज़माना

मेरे दिल के आईने में कई बाल आ चुके हैं 
तेरा नाम तक जुबां पे मुझे अब नहीं है लाना

नहीं ये मेरी है मंज़िल, नहीं ये मेरा ठिकाना
मेरा दिल उठा जहाँ से,मुझे दूर सबसे जाना

thi tumahari to hamesha se AdayeN- Aashiqaanah
haiN DiloN se khelne ka ye hunar bahut puarana

Tumhe Yaad Mai na Aaun, mujhe tum bhi bhul jana
mujhe ab hai door jana, mere paas tum na aana

Nayi roz ik Musibat naya roz ik tamasha
mera sabr ko na hargiz kabhi ab yun aazmana

Mire Dil Ke Aaiine Men kayi baal aa chuke hai
tera nam tak zubaan mujhe ab nahiN hai lana

nahi ye meri hai manzil nahi ye thikaana
mera dil Utha zahaan .mujhe door sabse jana

siya

Sunday, 16 February 2014

और सपने भी तार तार हुए

तल्ख़ लफ़्ज़ो के ऐसे वार हुए
तीर जैसे जिगर के पार हुए

लम्हा लम्हा बिखर गयी  साँसे 
और  सपने भी तार तार हुए 

दरबदर आज हम भटकते है 
उनकी चाहत में ऐसे ख़वार हुए 

आज दिल को ज़रा सा समझाया 
आज फिर हम न बेक़रार हुए

दिल की  बस्ती उजाड़ ली  हमने 
वो ज़रा भी न शर्मसार हुए 

वो तो बस खेलते रहे दिल से 
आज तक हम न होशियार हुए 

दोष किस पर धरे सिया हम तो 
सिर्फ  हालात के शिकार हुए 

talkh lafzoN se aise waar hue 
teer jaise jigar ke paar hue 

Lamha Lamha bikhar rahi sanse 
aur sapne bhi tar tar hue 

dar badar aaj hum bhatkate hai 
unki chahat mein aise khwaar hue 

aaj dil ko zara sa samjhaya
aaj phir hum na beqarar hue 

dil ki basti ujadane li humne 
wo zara bhi na sharmsaar hue

wo to bus khelte  rahe  dil se
aaj tak hum na  hoshiyaar hue 
  

Dosh kis par dhareiN Siya ham to /
sirf haalat ke  shikaar hue 


Saturday, 15 February 2014

नज़्म _ तुम्हारी याद



कहाँ है  नींद आँखों में 
पटकती सर उदासी है
सितम की खाक़ से लिपटी 
थकन है बदहवासी  है

मेरे आँसू भिगोते  है 
मेरा तकिया मेरा बिस्तर
चले ये नब्ज़ भी मद्दम 
तवाज़ुन में नहीं धड़कन
तुम्हारे बाद से अब तक 
तो  मेरा हाल है बद्दतर 

नहीं जो साथ तू मेरे 
मुझे हर पल लगे सदियां 
बड़ी मुश्किल से कटती है 
उदासी में मेरी घड़िया 

मैं  इतनी क्यूँ परेशां हूँ 
 हुई है भूल ये कैसी 
 जमी है आईने पे
 
कब से मेरे धूल ये कैसी


समझ में ये नहीं आता 
नहीं जिससे कोई नाता 
वो क्यूँ कर याद आता है 
वहीं क्यूँ दिल को भाता है 


मैं बेख़ुद सी ही रहती हूँ मुझे कुछ होश आने दो उसे मत याद आने दो ख़ुदाया भूल जाने दो




siya

Friday, 14 February 2014

नतीजा फिर वहीं तन्हाइयों में दिन गुज़रता है

मुसीबत के समय दिल सब्र के साये में रहता है 
घने बादल का सीना चीर के सूरज निकलता है 

कोई उम्मीद बंधती है तो बंध कर टूट जाती है 
नतीजा फिर वहीं तन्हाइयों में दिन गुज़रता है 

हमें खुद मंज़िल ए मक़सूद तक लाती है हर मुश्किल 
के हर रस्ता हमारे पावँ छू कर साथ चलता है 

मेरा ये दिल मेरी धड़कन मेरी साँसें मेरा जीवन 
तुम्हारे नाम का ये विर्द सुब्ह ओ शाम करता है 

कभी चाहत कभी नफरत कभी गुस्सा कभी राहत 
मिज़ाज ए यार तो तेवर नए हर दिन बदलता है 

वहीं गलिया वहीं कूचे वहीं गुड़िया वही झूले 
जो बचपन याद आ जाए तो दिल अब भी मचलता है 

ये तितली फूल जुगनू और ये गाता हुआ दरिया 
जहाँ में जो भी चलता है तेरी मर्ज़ी से चलता है 

किसी का कोई भी अपना नहीं है ये भी सच है पर 
सिया मैं राम की हूँ राम मेरे साथ रहता है
मैंने चाहत का ख़ुदा तुझको बना रक्खा है
तेरे क़दमों में सर अपना झुका रक्खा है

सब्र है जिस में मोहब्बत है वफ़ा भी दिल में
एक औरत ने ही घर,घर को बना रक्खा है

दिल में जिसकी न मुरव्वत है न आँखों में लिहाज़
कोई बतलाये के इस दुनिया में क्या रक्खा है

जिसके दिल में है मोहब्बत वही बसता है ख़ुदा
फिर क्यों दुनिया ने ख़ता इसको बना रक्खा है

झूठी खुशियों का ठिकाना भी नहीं है कोई
हमने ग़म को न कभी दिल से जुदा रक्खा है

फिर वोही ख्वाब से टूटे है मेरी आँखों से
हमने मुद्दत से जिसे दिल में बसा रक्खा है

तुझसे मिल पाऊ ये अब ख्वाब सा लगता है कोई
दिल का दर फिर भी अभी हमने खुला रक्खा है

अपने दिल से मैं बता उसको निकालू कैसे
जिसको दिन रात ख्यालों में बसा रक्खा है

दोस्त बन बन के कुरेदो न मेरे ज़ख्मों को
मैंने सीने में बड़ा दर्द छुपा रक्खा है

मुझको दुनिया की समझ आई नहीं है अब तक
उसका हर झूठ क्यों सच मैंने बना रक्खा है

क्या बताऊ ये सिया दिल पे है गुज़री क्या क्या
दिल पे हैरत ने अजब रंग जमा रक्खा है

maine chahat ka khuda tujhko bana rakkha hai
tere qadmon mein yeh sar apna jhuka rakkha hai

sabr hai jis mein mohbbat hai wafa bhi dil mein
ek aurat ne hi ghar, ghar ko bana rakkha hai

dil mein jiski na murawat hai na aankho mein lihaz
koi batlaye ke is duniya mein kya rakkha hai

jiske dil mei hai mohbbat waheen basta hai khuda
phir kyo duniya ne khata isko bata rakkha hai

jhoothi khushiyon ka thikana bhi nahi hai koyi
humne gham ko na kabhi dil se juda rakkha hai

phhir Wohi Khwaab Se Toote Hai Meri Aankhon se
humne muddat se jise dil mein saja rakkha hai

tujh se mil pau ye ab khwaab sa lagta hai koyi
Dil ka Dar phir bhi abhi humne khula rakkha hai

Apne dil se main bata usko nikaalu kaise
jisko din raat khayaalon mein basa rakkha hai

dost ban ban ke kuredo nah mere zakhmo ko
maine seene mein bada dard chupa rakha hai

mujhko duniya kee samajh aayi nahin hai ab tak
uska har jhooth kyu sach maine bana rakkha hai

kya batau ye siya dil pe hai guzari kya kya
Dil Pe Hairat Ne Ajab Rang Jama Rakha Ha

ek rachna mere valentine ke naam ..........Happy Valentines Day!




मेरे मनमंदिर के बस भगवान् तुम्ही हो 
इस देहि में बन कर रहते प्राण तुम्ही हो 

यह अनमोल दिए तोहफ़े ख़ुशियों के तुमने 
इन होठों पे आयी जो मुस्कान तुम्ही हो

इक अटूट बंधन सा है ये साथ हमारा
प्रेम ,आस्था और मेरा अभिमान तुम्ही हो

पुण्य किया था मैंने जो पाया है तुमको
पूजा अर्चन भक्ति मेरा ध्यान तुम्ही हो

प्यासे मन को सागर जैसा प्यार मिला है
तुम्ही अर्थ हो इस जीवन के ज्ञान तुम्ही हो

Tuesday, 4 February 2014

दुनिया के तमाशों में गिरफ्तार नहीं है


वो दिल जो तेरी याद से बेज़ार नहीं है दुनिया के तमाशों में गिरफ्तार नहीं है इस दौर में तो बर्फ की मानिंद हैं रिश्ते
गर्मी भी नहीं दिल में कोई प्यार नहीं है
अल्फाज़ से तुमने मेरे दिल के किये टुकड़े
हाँ हाथ में बेशक कोई  हथियार नहीं है

औरत की तो सब अग्नि परीक्षा के है तालिब
कोई भी मगर राम सा किरदार नहीं है

घर को भी मेरे चाहिए एक धूप का टुकड़ा
भाती मुझे ऊँची  तेरी दीवार नहीं है

जाड़े में ठिठुरते हुए फुटपाथ पे सोयें
कितने है जिनका कोई भी घरबार नहीं है

सस्ती है पसीने से सिया शायरी मेरी
ग़ज़लों का मेरी कोई खरीदार नहीं है ...


wo dil jo teri yaad se bezaar nahin hai 
duniya ke tamashoN  mein girftaar nahi hai

alfaz se tumne  mere dil ke kiye tukde 
haan hath mein beshaq  koi hathiyaar nahiN hai 

aurat ki to sab agni prekcha ke hai talib
koyi bhi magar raam sa qirdaar nahiN hai

ghar ko bhi mere chahiye ek dhoop ka tukda 
bhati mujhe unchi  tiri deewar nahiN hai 

jaade mein thithurteN hue footpath pe soyen
kitne hai jinka koyi gharbaar nahiN hai

sasti hai paseene se siya shayari meri
ghazlon ka meri koi khareedar nahi hai




Sunday, 2 February 2014

वो अपना है पराया तो नहीं है


वो अपना है पराया तो नहीं है
मुझे दिल से निकाला तो नहीं है

तुम्हारे दिल तलक आऊं तो कैसे 
ये कोई आम रस्ता तो नहीं है 

तुम्हारे अक्स जैसा कोई चेहरा 
मेरी आँखों में ठहरा तो नहीं है 

ग़लतफ़हमी दिलो में है यक़ीनन 
मगर रिश्ता ये  टूटा तो  नहीं है

बहुत चर्चे हैं उसकी सादगी के 
मगर वो शख्स अच्छा तो नहीं है 

वो मेरा दर्द समझे भी तो कैसे
 मेरे जैसा वो  तन्हा तो नहीं है 

मिलेगी उसको भी एक रोज़ मंज़िल 
थका ही है वो भटका तो नहीं है 

है जीने के लिए पैसा ज़रूरी 
मगर सब कुछ ही पैसा तो  नहीं है 

मैं फिर से गूँथ लूँगी हार अपना 
 वो टूटा है प बिखरा तो नहीं है

बहुत ही साफ़ है दिल सच में उसका 
सिया का  घर है गन्दा तो नहीं है 


है दुनिया खूबसूरत तो सिया ये 
मेरे दिल की तमन्ना तो नहीं है