Monday, 17 February 2014

हैं दिलों से खेलने का ये हुनर बड़ा पुराना

थी तुम्हारी तो हमेशा से अदायें आशिक़ाना 
हैं दिलों से खेलने का ये हुनर बड़ा पुराना 

तुम्हें याद मैं न आऊँ, मुझे तुम भी भूल जाना 
मुझे अब है दूर जाना, मेरे पास तुम न आना 

नयी रोज़ इक मुसीबत,नया रोज़ इक तमाशा 
मेरे सब्र को न हरगिज़,कभी अब यूँ आज़माना

मेरे दिल के आईने में कई बाल आ चुके हैं 
तेरा नाम तक जुबां पे मुझे अब नहीं है लाना

नहीं ये मेरी है मंज़िल, नहीं ये मेरा ठिकाना
मेरा दिल उठा जहाँ से,मुझे दूर सबसे जाना

thi tumahari to hamesha se AdayeN- Aashiqaanah
haiN DiloN se khelne ka ye hunar bahut puarana

Tumhe Yaad Mai na Aaun, mujhe tum bhi bhul jana
mujhe ab hai door jana, mere paas tum na aana

Nayi roz ik Musibat naya roz ik tamasha
mera sabr ko na hargiz kabhi ab yun aazmana

Mire Dil Ke Aaiine Men kayi baal aa chuke hai
tera nam tak zubaan mujhe ab nahiN hai lana

nahi ye meri hai manzil nahi ye thikaana
mera dil Utha zahaan .mujhe door sabse jana

siya

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