Friday, 29 July 2011

क्यों उसे रोज़ याद आते हो

ये जो तुम मुझ पे ज़ुल्म ढाते हो
क्यों मेरा सब्र आजमाते हो

 जल ना जाये कहीं तुम्हारे हाथ '
तुम जो औरो के घर जलाते हो

इम्तिहान इश्क करने वालों का
ग़म के मारों को क्यों सताते हो

हम पे पहले भी लोग हस्ते है
क्यूँ तमाशा हमें बनाते हो

अपने आंसू का ग़म नहीं हमको
हम हैं खुश तुम जो मुस्कुराते हो

हारना जीत हैं मोहब्बत में
हार से फिर क्यों खौफ खाते हो

 
जब 'सिया' से नहीं कोई रिश्ता
क्यों उसे रोज़ याद आते हो


Yeh jo tum mujh pe zulm dhhate ho
Kya mira sabr aazmaate हो


JAL NA JAYEN KAHIN TUMHARE HAATH
Tum jo auroN ka ghar jalate ho

ImtihaN ishq kerne walon ka
Gam ke maroN ko kyuun satate ho

Hum pe pahle hi log hanste hain
KyuuN tamasha hamen banate ho

Apne aansoo ka Gham nahin hum ko
Hum hain khush tum jo muskurate ho

Haarna jeet hai moHabbat meN
Haar se phir bhi Khauf khate ho

 Jab “Siya” se nahiN koyee rishta

kyuun usey roz yaad aate ho

Sunday, 24 July 2011

तू है मेरा तो फासिला क्यूं है


इक उदासी का सिलसिला क्यूं है 
तू है मेरा तो फासिला क्यूं  है 

हिज्र में तेरे रात-दिन की तड़प 
इस मुहब्बत का ये सिला क्यूं है 

मेरी क़िस्मत को सोचती हूँ मैं 
तुझसा बेदर्द ही मिला क्यूं है 

जब कोई वास्ता नहीं बाहम 
तेरी यादों का काफिला क्यूं है 

राह कोई हो, पार कर लेंगे 
आज दिल में ये हौसला क्यूं है 

जिस्म में रूह यूँ लगे है "सिया" 
दश्ते वीरां में ये किला क्यूं है 

Saturday, 23 July 2011

तुझ बिन न ही दिन कटता है, न कटती है रात.....

तुझ बिन न ही दिन कटता है, न कटती है रात!
तुझ बिन मुझको नहीं सुहाती, कोई भी सौगात!

आ हमदम तू पास हमारे, चलो बहायें प्रेम की धारा!
तुझसे ही हैं जीवन मेरा, तू ही जीने का है  सहारा!

अब इतना न तडपा हमको, थाम जरा जज्बात!
तुझ बिन मुझको नहीं सुहाती, कोई भी सौगात......

दुनिया तो है प्यार की दुश्मन, दुनिया से क्या डरना!
प्यार किया है तुझको अब तक, प्यार तुझी को करना!

इन हाथों में दे दे हमदम, तू अपना रेशम सा हाथ!
तुझ बिन न ही दिन कटता है, न कटती है रात.....

तेरे बिन बेचैनी है अब, न मिलता आराम!
तेरे याद में गुजर रही है, मेरी सुबहो-शाम!

आजा अब तू पास सिया के , प्यार की करलें मीठी बात!
तुझ बिन न ही दिन कटता है, न कटती है रात...

बेनाम ख़त

आज उनका ख़त मुझे बेनाम आया 
शाम आयेंगे फ़क़त पैग़ाम आया 

पास आकर दिल की कोई बात कर 
ये लिखा उसने तो कुछ आराम आया 

आंसुओं से भीग कर तर ही हुआ 
जिस वरक आपका इक नाम आया 

आपकी ख़ुश्बू से वो लबरेज़ था 
जब मेरे नज़दीक वो गुलफाम आया 

डूब कर इस ज़िन्दगी को देखना 
ये हुनर सच आज मेरे काम आया


है ज़हर उसमें मुझे मालूम सिया
बादे -मुद्दत हाथ में इक जाम आया 

तुम मुझे जितना आजमाते हो

तुम मुझे जितना आजमाते हो 
दिल से उतने ही  दूर जाते हो 

यूँ न देखो नज़र से दुश्मन की 
शक की आदत में क्यूं जलाते हो 

इम्तेहां मेरा ले रहे हो मगर 
मुझमे आके ही डूब जाते हो 

कितने नाकाम से मरासिम हैं 
क्यूं तमाशा उन्हें बनाते हो 

सांस दर सांस मौत का आलम 
तुम तो बस यूं ही  मुस्कुराते हो

"सिया  सब जीत जाएँ नामुमकिन"
हार से फिर क्यूं खौफ़ खाते हो

Wednesday, 20 July 2011

मुझे तब याद कर लेना

मिले लम्हे जो फ़ुरसत के मुझे तब याद कर लेना 
तुझे गर वक़्त मिल जाये, ज़रा बर्बाद कर लेना 

बिछड़ जाने से पहले की निशानी लग रही है ये 
तुम अपने दिल को अब आख़िर कहीं आबाद कर लेना 

नहीं जीना तुम्हारे बिन, तुम्हारे बिन नहीं जीना 
फ़ना हो जाये बस ये दिल यही फ़रियाद कर लेना

निकलना है, निकलते हैं, चले जाते हैं दुनिया से
हमारी कैद से ख़ुद को अभी आज़ाद कर लेना 

तुम्हारी हो गई आदत, नहीं कटते सिया ये दिन
तुम अपने वास्ते कुछ भी नया ईजाद कर लेना

Sunday, 17 July 2011

या किस्मत आजमाई जा रही है

किसी पे जाँ लुटाई जा रही है"
या किस्मत आजमाई जा रही है 

बहेकते जा रहे हैं होश दिल के 
निगाहों से पिलाई जा रही है

हुई कुर्बत तो ऐसा लग रहा है 
मेरी जाँ मुस्कुराई जा रही है 

खिला के गुंचा-ए-दिल को मेरे 
हकीकत अब दिखाई जा रही है 

तुम्हारी राह में जानाँ हमेशा 
नज़र मेरी बिछाई जा रही है 



लूट कर चैन_ओ_सकूं मेरा
मुझसे नज़रे चुरायी जा रही है

बिना उसके सिया जीना है दूभर 
मेरी दुनया मिटाई जा रही है

दर्द हद्द से बढ़ा लिया मैंने

दर्द हद्द से बढ़ा लिया मैंने
संग से दिल लगा लिया मैंने

अब सहर हो या शब की ज़ुल्मत हो 
शिद्दते _ग़म बढ़ा लिया मैंने

तज़किरा आप का नहीं होगा
राज़ दिल में छुपा लिया मैंने

दाग-ए-दिल से जो रौशनी ना हुई
अपना दामन जला लिया मैंने

क्यों वफ़ा का यकीं नहीं उसको
जिसको दिल में समा लिया मैंने

जब भी पूछा किसी ने हाल मेरा
खुद से खुद को हंसा लिया मैंने

ऐ सिया ज़िन्दगी हो हंस हंस कर
हद्द से ज्यादा निभा लिया मैंने

Saturday, 16 July 2011

मेरे लबों पे है हर लफ्ज़ आज टूटा सा

सितारे धुंधले नज़र आए चाँद रूठा सा
था ख्वाब सच्चा मगर लग रहा है झूठा सा

गुजारिशों को शिकायत का नाम मत देना
मेरे लबों पे है हर लफ्ज़ आज टूटा सा

या तू नसीब जगा आ के खुद ही अब मेरा
या मान लूँ की मुक़द्दर है मेरा फूटा सा

खामोश रात है ग़मगीन हैं नज़ारे भी
वो दौर खुशियों का अब हाथ से है छुटा सा

कोई तो होगी यकीनन उसे भी मजबूरी
वगर ना वादा था उसका सिया अनूठा सा

Friday, 15 July 2011

क्या ज़माने का हाल है देखो

ग़म से दिल फट रहा है सीने में
क्या ज़माने का हाल है देखो


बेरहम कितना हो गया इंसा
ये ज़मीन ख़ू से लाल है देखो

इसके दिल में खुदा का खौफ नहीं

ना ही कोई मलाल है देखो


ये हैं इंसा या ये पत्थर है
शर्म है ना ख्याल है देखो


ज़ुल्म ढाता हैं बेगुनाहों पर
सबका जीना मुहाल है देखो


siya

Wednesday, 13 July 2011

मेरा ईमान बस मोहब्बत है ---

इस जहाँ में अमन ही खुशियाँ हो
ये तमन्ना हैं मेरी हसरत है 
यहीं ईमान है नज़र में मेरी
मेरा ईमान बस मोहब्बत है 
आप चाहे इसे गुनाह कहे
इश्क मेरे लिए इबादत है
सच ही कायम रहे ज़माने में
झूठ इंसान की माना फितरत है
तुम बुराई का साथ मत देना
हाँ बुराई से लड़ना हिम्मत है 
इतना उड़ता ना फिर हवाओ में
इस ज़मी पर ही तेरी जन्नत है

सिया 

Sunday, 10 July 2011

मेरे सर पे माँ का हाथ

सीख हुनर चेहरा पढने का
नज़र से जानो दिल की बात


काबिल तो वो कहलाता है
जिसने ना खायी हो मात


नेक कर्म होते है जिसके
उसकी ही है ऊँची जात


चाह नहीं दौलत शोहरत की
बस मांगे अपनों का साथ


कड़ी धूप में छावं की जैसे
मेरे सर पे माँ का हाथ


सुख दुःख आते जाते रहते
दिन आएगा बीते रात

siya

Wednesday, 6 July 2011

रुख हवाओं का बदलना है हमें

घर से बाहर अब निकलना है हमें 
रुख हवाओं का बदलना है हमें 

हमको ये अर्श रास आता नहीं 
इस ज़मीन पर ही चलना है हमें 

मंजिलो पर भी जरुरी है नज़र
रहगुज़र पर भी संभालना है हमें

बस  दिलों में वफ़ा रहे कायम
वफ़ा की शम्मा सा जलना है हमें

रहे -दुनिया है बर्फ की मानिंद
चलते जाना, ना फिसलना है हमें

गर कोई राह दुश्मनी की दिखाए 
उस बुराई को जड़ से  कुचलना है हमें


हम भी सूरज  की तरह अक्सर सिया 
 भूल जाते है की ढलना हैं हमे

Saturday, 2 July 2011

दौलत है भगवान् नहीं

जिसके पास ईमान नहीं, वो अच्छा इंसान नहीं
दौलत रुतबा पा लेना ही, बन्दे तेरी शान नहीं 

दौलत हैं बस एक जरुरत ,दौलत है भगवान् नहीं
हर सामान मिले पैसे से ,पर बिकता ईमान नहीं

जीवन चार दिनों का मेला ,अच्छा ये अभिमान नहीं
जो जीता अपनी खातिर ,उसकी कोई पहचान नहीं

चलना सच्चाई के पथ पर मुश्किल है आसान नहीं
जीवन को दे सही दिशा,तुम हो जाना गुमनाम नहीं

सिया