Wednesday, 6 July 2011

रुख हवाओं का बदलना है हमें

घर से बाहर अब निकलना है हमें 
रुख हवाओं का बदलना है हमें 

हमको ये अर्श रास आता नहीं 
इस ज़मीन पर ही चलना है हमें 

मंजिलो पर भी जरुरी है नज़र
रहगुज़र पर भी संभालना है हमें

बस  दिलों में वफ़ा रहे कायम
वफ़ा की शम्मा सा जलना है हमें

रहे -दुनिया है बर्फ की मानिंद
चलते जाना, ना फिसलना है हमें

गर कोई राह दुश्मनी की दिखाए 
उस बुराई को जड़ से  कुचलना है हमें


हम भी सूरज  की तरह अक्सर सिया 
 भूल जाते है की ढलना हैं हमे

3 comments:

  1. हम भी सूरज की तरह अक्सर सिया
    भूल जाते है की ढलना हैं हमे

    bahut khub siyaa ji

    suraj se judi ek line surya bhanu ji ki yaad aa rahi hai

    hum to suraj hai sard mulko ke
    mood hota hai to nikalte hai

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  2. आज मै पहली बार आपके ब्लाग पर आया हूं। वाकई बहुत अच्छा लगा।

    मंजिलो पर भी जरुरी है नज़र
    रहगुज़र पर भी संभालना है हमें

    बस दिलों में वफ़ा रहे कायम
    वफ़ा की शम्मा सा जलना है हमें

    बहुत सुंदर.

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  3. हम भी सूरज की तरह अक्सर सिया
    भूल जाते है की ढलना हैं हमे
    waah..badhiya gazal kahi hai ..

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