Saturday, 22 September 2012

नफरतों से जवाब मत देना

हसरतों को अज़ाब मत देना 
नफरतों से जवाब मत देना 

बेवफ़ा का ख़िताब मत देना
तुम मुझे इज्तिराब मत देना

उम्र भर की है तिश्नगी मेरी
चंद क़तरे शराब मत देना

तुमने जितने सितम किये अब तक
मुझको उसका हिसाब मत देना

सिर्फ सच बोलना मोहब्बत में
मुझको झूठे जवाब मत देना

कुछ भी देना क़बूल है सब कुछ
रात में आफ़ताब मत देना

बुज़दिली जिनके ख़ून में है "सिया"
तुम उन्हें इन्क़लाब मत देना

hasrato'n ko azaab mat dena
nafratoo'n se jawab mat dena

bewfa ka khitaab mat dena
tum mujhe iztiraab mat dena

umr bhar ki tishnagi meri
chand qatre sharaab mat dena

tumne jitne sitam kiye ab tak
mujhko uska hisaab mat dena

sirf sach bolna mohbbat mein
mujhko jhoothe jawab mat dena

kuch bhi dena qabool hai sab kuch
raat mein aaftaab mat dena

buzdili jinke khoon mein hain "siya"
tum unhe inqlaab mat dena ..

नज़्म


मेरे बच्चे .....
तुम्हें मुबारक़ हो 
ज़िन्दगी के ये खुशनुमा लम्हें 
आसमां की ये वुसअतें सारी 
और धरती की सारी आशीष 
तेरा जीवन हो रौशनी से पुर 
तीरगी तुझको छू के मिट जाए 
तेरे आँगन में हर ख़ुशी नाचे 
ज़िन्दगी तुझसे ज़िन्दगी सीखे 
मुश्किलों को तू खुद करे आसां
तुझको इस दर्ज़ा इल्म हासिल हो
रश्क़ करने लगे सभी तुझ पर
ये दुआ मांगती हूँ मैं रब से
ज्ञान की तुझको रौशनी मिल जाए
तुझको दुनिया की हर ख़ुशी मिल जाए

MERE BACHCHE
TUMHE MUBARAK HO
ZINDGI KE YE KUSHNUMA LAMHE
AASMAA,N KI YE VUS'ATEN SARI
AUR DHARTI KII SARI AASHAISH
TERA JEEVAN HO RAUSHNI SE PUR
TEERGI TUJHKO CHOO KE MIT JAYE
TERE AANGAN ME HAR KUSHI NAACHE
ZINDGI TUJHSE ZINDGI SEEKHE
MUSHKILO'N KO TU KHUD KARE AASAA,N
TUJHKO IS DARJA ILM HASIL HO
RASHK KARNE LAGE,N SABHI TUJH PAR
YE DUA MANGTI HUN MAIN RAB SE
GYAN KI TUJHKO RAUSHNI MIL JAYE
YAANI DUNIYA KI HAR KUSHI MIL JAYE--
 
मेरे बच्चे .....
तुम्हें मुबारक़ हो 
ज़िन्दगी के ये खुशनुमा लम्हें 
आसमां की ये वुसअतें सारी 
और धरती की सारी आशीष 
तेरा जीवन हो रौशनी से पुर 
तीरगी तुझको छू के मिट जाए 
तेरे आँगन में हर ख़ुशी नाचे 
ज़िन्दगी तुझसे ज़िन्दगी सीखे 
मुश्किलों को तू खुद करे आसां
तुझको इस दर्ज़ा इल्म हासिल हो
रश्क़ करने लगे सभी तुझ पर
ये दुआ मांगती हूँ मैं रब से
ज्ञान की तुझको रौशनी मिल जाए
तुझको दुनिया की हर ख़ुशी मिल जाए

MERE BACHCHE
TUMHE MUBARAK HO
ZINDGI KE YE KUSHNUMA LAMHE
AASMAA,N KI YE VUS'ATEN SARI
AUR DHARTI KII SARI AASHAISH
TERA JEEVAN HO RAUSHNI SE PUR
TEERGI TUJHKO CHOO KE MIT JAYE
TERE AANGAN ME HAR KUSHI NAACHE
ZINDGI TUJHSE ZINDGI SEEKHE
MUSHKILO'N KO TU KHUD KARE AASAA,N
TUJHKO IS DARJA ILM HASIL HO
RASHK KARNE LAGE,N SABHI TUJH PAR
YE DUA MANGTI HUN MAIN RAB SE
GYAN KI TUJHKO RAUSHNI MIL JAYE
YAANI DUNIYA KI HAR KUSHI MIL JAYE--

Wednesday, 19 September 2012

हिन्दी दिवस पर विशेष....एक नज़्म


गुरुनानक गुरुगोबिंद की भाषा हिंदी 
भारतीयों के लिए है नयी आशा हिंदी 

मेरा अभिमान है पहचान है भाषा हिंदी
सभ्यता है ये मेरी जान है भाषा हिंदी 

बाल्मीकि के गुलिस्तान की कली है हिंदी 
तुलसी और सूर के आँगन में पली है हिंदी 

अपने दोहों को कहा करते थे हिंदी में कबीर
जिन की हर बात हुआ करती थी पत्थर की लकीर

पन्त की और निराला की अभिलाषा थी
भारतेंदु के लिए मान थी मर्यादा थी

डूबा रहता था सदा मीरा का मन हिंदी में
विरह की मारी वो लिखती थी भजन हिंदी में

हिंदी भाषा की लगन रखते थे दिल में फ़नकार
खानकाहा ही नहीं खुसरों भी हिंदी पे निसार

कितने दिन बीत गए आज भी बाकी है सरूर
गीत तो तुमने भी नीरज के सुने होंगे जरुर

गीत बैरागी ने हिंदी में सुनाया है हमें
इसी भाषा में तो काका ने हंसाया है हमें

याद आती है वो हिंदी की सभी कविताये
किस तरह भूलेगे बच्चन की सभी रचनाये

अपनी भाषा से बनाये रक्खो तुम अपना लगाव
छोड़ कर दूसरी भाषाओ को हिंदी अपनाओ

इसका सम्मान करो दिल से लगाओ इसको
जितना भी हो सके आदर्श बनाओ इसको

Wednesday, 12 September 2012

सादा जीवन गुज़ार लेते काश ..


हर तमन्ना को मार लेते काश ..
सादा जीवन गुज़ार लेते काश ..

पीठ पर जो तुम्हारी आये हैं
तुम वो सीने पे वार लेते काश 

दिल की आँखों से देख कर देखो 
चैन सब्र ओ करार लेते काश 

तेरा बरदान जानकर हम भी
 रंज ओ ग़म बेशुमार लेते काश

ज़िन्दगी तेरे इस्तेआरे को
 लफ्ज़ ए न पाएदार लेते काश

ख़्वाब में तू नज़र तो आया था 
अपनी हस्ती को वार लेते काश 

गुफ़्तगू का सलीक़ा आ जाता 
मेरे लहजे की धार लेते काश

बेहिसी का हिसार तोडना था 
ज़ख्म दिल पर हज़ार लेते काश 

मुश्किलें सारी दूर हो जाती 
तुम सिया को पुकार लेते काश 

har tamanna ko maar lete kash 
saada jeevan guzaar lete kash 

peeth par jo tumahari aaye hai'n
tum wo seene pe war lete kash 

dil ki aankho'n se dekh kar tujhko 
chain sar o qaraar lete kash 

tere bardaan jaan kar hum bhi 
ranj o gham beshumar lete kash 

zindgi tere isteaare ko
 lafz e na paidaar lete kash 

khwaab mein tu nazar to aaya tha 
apni hasti ko waar lete kash 

guftgoo ka saleeqa aa jaata 
mere lahje ki dhaar lete kash 

behisi ka hisaar todna tha 
zakhm dil par hazaar lete kash 

mushkile saari door ho jaati
 tum siya ko pukaar lete kash

लब चटखते हैं मुस्कुराने से

रंज इतने मिले ज़माने से 
लब चटखते हैं मुस्कुराने से 

धुंधली धुंधली सी पड़ गयी यादें 
ज़ख्म भी हो गए पुराने से 

मत बनाओ ये कांच के रिश्ते 
टूट जायेगे आज़माने से 

तीरगी शब् की कम नहीं होगी 
घर के अन्दर दिये जलाने से

अक्ल ने दिल को कर दिया हुशियार
बच गए हम फ़रेब खाने से

हो ही जायेगे सब रिहा इक दिन
छूट जायेगे क़ैदखाने से

ए सिया तंग आया चुकी हूँ मैं
हौसला की चिता जलाने से .....

ranz itne mile zamane se
lab chatkhte hai muskuraane se

dhundhli dhundhli se pad gayi yaade
zakhm bhi ho gaye puraane se

mat banao ye kanch ke rishte
tut jayege aazmaane se

teergi shab ki kam nahi hoti
ghar ke andar diya jalaane se

akl ne dil ko kar diya hushiyaar
bach gaye hum fareb khane se

ho hi jaayege sab riha ik din
chhoot jaayege qaidkhane se

aye siya tang aa chuki hoon main
houslo'n ki chita jalaane se

उजाला हो न सका फिर भी हर किसी के लिए

चराग़ ए राह जलाया था रौशनी के लिए 
उजाला हो न सका फिर भी हर किसी के लिए 

जुनून ए इश्क न बह, बन के खून के आंसू 
अभी लहू की जरूरत है ज़िन्दगी के लिए 

हर एक शख्स को दिल में जगह नहीं मिलती 
यहाँ तो होती है इज्ज़त किसी किसी के लिए 

ये उम्र ग़म के सहारे गुज़र तो जाती है 
मगर ख़ुशी भी तो लाज़िम है आदमी के लिए

किसी को क्या है ग़रज़ तुझको क़त्ल करने की
तेरा ग़रूर ही काफी है ख़ुदकुशी के लिए

कोई भी बंदा मेरा सर झुका न पायेगा
ये सर झुकेगा सिया तेरी बंदगी के लिए

CHARAGH-E-RAH JALAYA THA RAOSHNI KE LIYE ..
UJALA HO N SAKA PHIR BHI HAR KISI KE LIYE ..

JUNOON_E_ISHQ N BAH, BAN KE KHOON KE AANSU.
ABHI LAHU KI JAROORAT HAI ZINDGI KE LIYE .

HAR EK SHAKHSH KO DIL ME JAGAH NAHIN MILTI ..
YAHAN TO HOTI HAI IZZAT KISI KISI KE LIYE ..

YE UMR GHAM KE SAHARE GUZAR TO JATI HAI .
MAGAR KHUSHI BHI TO LAZIM HAI AADMI KE LIYE ..

KISI KO KYA HAI GHARAZ TUJH KO QATL KARNE KI .
TERA GHUROOR HI KAFI HAI KHUDKUSHI KE LIYE ..

KOI BHI BANDA MIRA SAR JHUKA N PAYEGA ..
YE SAR JHUKEGA SIYA TERI BANDGI KE LIYE ..

Sunday, 2 September 2012

चोट जब दिल पर लगे तो मुस्कुराना चाहिए

धूप का आसेब चेहरे से हटाना चाहिए 
अब्रपारों का खुनक़ इक शामियाना चाहिए 

अपना ग़म दुनिया की नज़रों से छुपाना चाहिए 
चोट जब दिल पर लगे तो मुस्कुराना चाहिए 

हाँ मेरे दिल की उमंगें हो रही हैं फिर जवां 
पावं की पाज़ेब को भी गुनगुनाना चाहिए 

ज़हरे _ख़ामोशी से है माहौल में तेज़ाबियत
अब कोई तूफ़ान फिर सर पर उठाना चाहिए

ज़हन की तख़ईल को काग़ज़ पे लाने के लिए
इक अदद अल्फ़ाज़ का मुझको खज़ाना चाहिए

एक लम्हा है बहुत दिल से निकलने के लिए
दिल में घर करने के ख़ातिर इक ज़माना चाहिए

फिर ख़ुशी की राह भी हमवार कर देते हैं ग़म
दर्द की बारिश में जी भर के नहाना चाहिए

अपना ग़म दुनिया की नज़रों से छुपाना चाहिए
चोट जब दिल पर लगे तो मुस्कुराना चाहिए

dhoop ka aaseb chehre se hataana chahiye
abrpaaron ka khunaq ik shaamiyaana chahiye

apna gham duniya ki nazron se chupana chahiye
chot jab dil par lage to muskurana chahiye

haan mere dil ki umange ho rahi hain fir jawan
pavn ki pajeb ko bhi gungunana chahiye

zahre_khaomoshi se hai mahoul mein tejaabiyat
ab koyi tufaan fir sar par utahna chahiye

zehan ki takheel ko kagaz pe laane ke liye
ik adad alfaz ka mujhko khazana chahiye

ek lamha hai bahut dil se nikalane ke liye
dil mein ghar karne ki khatir ik zamana chahiye

fir khushi ki raah bhi hamwaar kar dete hai gham
dard ki baarish mein jee bhar ke nahana chahiye

bojh dil ka khud bakhud kam ho hi jaayega "siya"
ashq peena chahiye aur mukurana chahiye

आज तक खाती रही खुद पर तरस

हाथ कुछ आया नहीं अब और बस
आज तक खाती रही खुद पर तरस 

उस जगह भी खिल उठे ताज़ा गुलाब
जिस जगह बोया गया था कैक्टस --

फूल ऐसे भी चमन में हैं हुज़ूर
छू नहीं सकता जिन्हें कोई मघस

अब्र है तो फिर भिगो दे ये ज़मीन
अश्क.है तो फिर मिरे दिल पर बरस -

जब तिरे बारे में सोचा है तो फिर
थक गयी है ज़ेहन की इक एक नस -

फिर उदासी रक्स आमादा हुई
मेरे घर तन्हाई को देखा की बस .

ए "सिया " मैं हो रही हूँ मुज्महिल
देख कर हिरस ओ हवस के ख़ार ओ ख़स

Haath kuch aaya nahi'n ab aur bus
Ajj tak khati rahi khud par taras

Us jagah bhi khil uthe taza gulab
jis jagah boya gaya tha kaktas

Fhool aise bhi chaman mein hai huzoor
Choo nahi'n sakta jinhe koi maghas

Abr hai to phir bhigo de ye zameen
Ashq hai to fir mire dil pe baras

Jab tire baare me socha hai to phir
Thak gayi hai zehan ki ik ek nas

Fir udasi raqs aamaada hui
Mere ghar tanhayi ko dekha hi bus

Ai "siya"main ho rahi hoon muzmahil
dekh kar hirs o hawas ke khar o khas