Wednesday, 12 September 2012

सादा जीवन गुज़ार लेते काश ..


हर तमन्ना को मार लेते काश ..
सादा जीवन गुज़ार लेते काश ..

पीठ पर जो तुम्हारी आये हैं
तुम वो सीने पे वार लेते काश 

दिल की आँखों से देख कर देखो 
चैन सब्र ओ करार लेते काश 

तेरा बरदान जानकर हम भी
 रंज ओ ग़म बेशुमार लेते काश

ज़िन्दगी तेरे इस्तेआरे को
 लफ्ज़ ए न पाएदार लेते काश

ख़्वाब में तू नज़र तो आया था 
अपनी हस्ती को वार लेते काश 

गुफ़्तगू का सलीक़ा आ जाता 
मेरे लहजे की धार लेते काश

बेहिसी का हिसार तोडना था 
ज़ख्म दिल पर हज़ार लेते काश 

मुश्किलें सारी दूर हो जाती 
तुम सिया को पुकार लेते काश 

har tamanna ko maar lete kash 
saada jeevan guzaar lete kash 

peeth par jo tumahari aaye hai'n
tum wo seene pe war lete kash 

dil ki aankho'n se dekh kar tujhko 
chain sar o qaraar lete kash 

tere bardaan jaan kar hum bhi 
ranj o gham beshumar lete kash 

zindgi tere isteaare ko
 lafz e na paidaar lete kash 

khwaab mein tu nazar to aaya tha 
apni hasti ko waar lete kash 

guftgoo ka saleeqa aa jaata 
mere lahje ki dhaar lete kash 

behisi ka hisaar todna tha 
zakhm dil par hazaar lete kash 

mushkile saari door ho jaati
 tum siya ko pukaar lete kash

1 comment:

  1. बहुत शानदार ग़ज़ल शानदार भावसंयोजन हर शेर बढ़िया है आपको बहुत बधाई
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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