Sunday, 2 September 2012

चोट जब दिल पर लगे तो मुस्कुराना चाहिए

धूप का आसेब चेहरे से हटाना चाहिए 
अब्रपारों का खुनक़ इक शामियाना चाहिए 

अपना ग़म दुनिया की नज़रों से छुपाना चाहिए 
चोट जब दिल पर लगे तो मुस्कुराना चाहिए 

हाँ मेरे दिल की उमंगें हो रही हैं फिर जवां 
पावं की पाज़ेब को भी गुनगुनाना चाहिए 

ज़हरे _ख़ामोशी से है माहौल में तेज़ाबियत
अब कोई तूफ़ान फिर सर पर उठाना चाहिए

ज़हन की तख़ईल को काग़ज़ पे लाने के लिए
इक अदद अल्फ़ाज़ का मुझको खज़ाना चाहिए

एक लम्हा है बहुत दिल से निकलने के लिए
दिल में घर करने के ख़ातिर इक ज़माना चाहिए

फिर ख़ुशी की राह भी हमवार कर देते हैं ग़म
दर्द की बारिश में जी भर के नहाना चाहिए

अपना ग़म दुनिया की नज़रों से छुपाना चाहिए
चोट जब दिल पर लगे तो मुस्कुराना चाहिए

dhoop ka aaseb chehre se hataana chahiye
abrpaaron ka khunaq ik shaamiyaana chahiye

apna gham duniya ki nazron se chupana chahiye
chot jab dil par lage to muskurana chahiye

haan mere dil ki umange ho rahi hain fir jawan
pavn ki pajeb ko bhi gungunana chahiye

zahre_khaomoshi se hai mahoul mein tejaabiyat
ab koyi tufaan fir sar par utahna chahiye

zehan ki takheel ko kagaz pe laane ke liye
ik adad alfaz ka mujhko khazana chahiye

ek lamha hai bahut dil se nikalane ke liye
dil mein ghar karne ki khatir ik zamana chahiye

fir khushi ki raah bhi hamwaar kar dete hai gham
dard ki baarish mein jee bhar ke nahana chahiye

bojh dil ka khud bakhud kam ho hi jaayega "siya"
ashq peena chahiye aur mukurana chahiye

1 comment:

  1. बहुत शानदार ग़ज़ल शानदार भावसंयोजन हर शेर बढ़िया है आपको बहुत बधाई
    बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको
    और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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