Saturday, 25 February 2012

मुश्किल में ही हर बन्दा उसे याद करे है।


मालिक भी उसी शख्स को खुद याद करे है 
जो उसकी इबादत करे फ़रियाद करे है 

दिल यादे ख़ुदा से कहाँ आबाद करे है
मुश्किल में ही हर बन्दा उसे याद करे है।

अल्लाह से ज़न्नत में लिखा लेगा घर अपना 
वो शख्स ग़रीबो की जो इमदाद करे है  

औलाद पे रहमत ही बरसती है हमेशा
माँ बाप की ख़िदमत अगर औलाद करे है। 

बरसों जो किया मश्के -सुखन आपने हरदम 
मज़बूत यहीं आपकी बुनियाद करे है 

खुश रहने का मिल जाये हुनर जिसको जहाँ में 
बस्ती वो खराबे में भी आबाद करे है 

मिट जाए ज़माने से ये सब ज़ुल्म ये नफ़रत
दिल मेरा हर इक पल यही फ़रयाद करे है।

जो भूल गया मुझ को उसे इतना बता दो
इक अहले वफ़ा अब भी तुझे याद करे है। 

इक शहर है वीरान सा कब से मेरे अंदर
अब देखो इसे कौन कब आबाद करे है। 

यह कैसा ज़माना है के यहाँ इल्म की इज़्ज़त
शागिर्द करे है न अब उस्ताद करे है।

क्या क्या न किया मैंने 'सिया'उसके लिए पर 
हर रोज़ नया वो सितम ईजाद करे है 

Tuesday, 21 February 2012

है पास तेरे मेरा यह सामान अभी तक


वह शख़्स लगे है मुझे अनजान अभी तक
 उससे है कुछ अधूरी सी पहचान अभी तक

है आज भी आँखों में मेरी अश्क की दौलत 
उतरे ही नहीं आपके एहसान अभी तक

ख़ुद भूखे हैं पंछी को खिलाते हैं वो दाना 
दुनिया में कुछ ऐसे भी हैं इन्सान अभी तक 

माना के हमेशा से मेरी जेब है ख़ाली
रक्खा है बचा कर मगर ईमान अभी तक

है उस को ख़बर नेकी ही काम आएगी इक दिन
 क्यूँ नेकी से बचता है यह इंसान अभी तक

कुछ शिकवे तो कुछ बीते हुए वक़्त की यादें 
है पास तेरे मेरा यह सामान अभी तक

आया था बहुत पहले जो इस दिल के मकां में
मुद्दत से "सिया" है वो ही मेहमान अभी तक

हर शख्स कह रहा है यहाँ पर खुदा हूँ मैं

ग़ज़ल

क्यूं तुझको लग रहा है कि तुझसे जुदा हूँ मैं
मुझमें तू खुद को देख तेरा आईना हूँ मैं

ऐ दिल ! सभी ने तोड़ दिया है यकीन तेरा
दुनिया की बात क्या करूँ ख़ुद से ख़फ़ा हूँ मैं

बस तेरा आसरा है मुझे ऐ मेरे खुदा
सजदे में तेरे हर घडी महवे-दुआ हूँ मैं

अल्लाह रे ज़माना-ए-हाज़िर का क्या करें
हर शख्स कह रहा है यहाँ पर खुदा हूँ मैं

कितना ज़माना हो गया भूली हूँ मैं हँसी
लगता हैं जैसे दर्द का इक सिलसिला हूँ मैं

तेरे बगैर मैं तो अधूरी थी शायरी
पहचान हुई खुद से ये जाना 'सिया' हूँ मैं

-सिया सचदेव

Wednesday, 15 February 2012

हालात कभी इतने खतरनाक नहीं थे

हर शख्स के दामन यूं कभी चाक नहीं थे
हालात कभी इतने खतरनाक नहीं थे 


ये आजकल के बच्चे हैं इनकी न पूछिए
पहले के जो बच्चे थे वो चालाक नहीं थे


कुछ तल्खियों ने बदला हमारे मिज़ाज को
पहले कभी हम इतने तो बेबाक नहीं थे

जिनपे लगे इलज़ाम फ़सादात के लिए
मासूम थे वो शख्स खतरनाक नहीं थे


इंसानियत का जिसको सलीका नहीं आया
गंगा में नहाकर भी कभी पाक नहीं थे


माना की तेरे सामने हस्ती मेरी नहीं
राहों की तेरे हम भी मगर ख़ाक नहीं थे


माना की ज़माने को "सिया' ग़म नहीं मेरा
मरने पे मेरे तुम भी तो ग़मनाक नहीं थे .

Sunday, 12 February 2012

साईं महिमा


मेरे दाता मेरे साईं  तेरी महिमा अपरमपार
तेरे दर से सब कुछ पाया तुने जीवन दिया संवार

तू सबका  भाग्यविधाता  तू  ही  सबका  दाता  है
किरपा से तेरे हुई हैं साईं मेरी जीवन नैया पार

आस हुई हर  पूरी  दाता मेहर हुई ऐसी  तेरी 
इस जीवन का हर पल बीते मेरे साईं तुझे निहार 

तू ही खिवैयाँ इस जीवन का और ना कोई मेरा 
मेरी इस बिगड़ी किस्मत को तूने दिया संवार

तू मेरा राखा हैं सब थाई .तू सदा रहा हैं सहाई 
तेरे दर पे आके करू तेरा मैं धन्यवाद लाख बार

मेरी हर मुश्किल में दाता तुने दिया सहारा 
मेरे दाता साईं, तुझपे तन मन दिया हैं वार 

Thursday, 9 February 2012

ये इश्क नहीं होता ग़र श्याम नहीं होता


नफरत का ज़माने में गर नाम नहीं होता
इन्सान कभी इतना बदनाम नहीं होता

राधा की मोहब्बत वो मीरा की इबादत है
ये इश्क नहीं होता ग़र श्याम नहीं होता

क़िस्मत से जियादा तुम हाथों पे यकीं रक्खो
हो सच्ची लगन जिस में नाकाम नहीं होता

 ये इश्क का अफसाना है सबसे अलग इसमें
आगाज़ तो होता है,अंजाम नहीं होता

यह जा के कोई कह दे इस दौर के ज़ालिम से
ज़ालिम का कभी अच्छा अंजाम नहीं होता

बेटी जो हुई पैदा  माहोल में मातम है
बेटा अगर आ जाये  कोहराम नहीं होता

यह दाद जो मिलती है शेरों पे सिया तुझ को
कोई भी बड़ा इस से ईनाम नहीं होता

सर पे साईं तेरी जो रहमत हैं


सर पे साईं तेरी जो रहमत हैं
जिंदगी में सकूं है राहत है

हमको मालूम हैं मेरे साईं
जो भी कुछ है तेरी इनायत है

फिर बला कैसे मुझ तलक आये
साईं जब कर रहा हिफाज़त है

हो मुरादे सभी की पूरी यहाँ
नाम में तेरे कितनी बरक़त हैं 

मुझको हर शय में नज़र आये तू 
इस कदर मुझको तुझसे निस्बत है

ऐ अनाथों के नाथ तुझ पे निसार
तेरे भक्तो को तेरी चाहत हैं

मुझ को जो भी मिला है दुनिया में
साईं सब कुछ तेरी ही रहमत है

साईं जो कुछ सिया ने लिक्खा है
उसके हर लफ्ज़ में मोहब्बत है

Wednesday, 8 February 2012

ज़िन्दगी ही समझ न पायी है


मैंने जब भी ग़ज़ल सुनाई है
 सारी महफ़िल से दाद पायी है 

ग़म से अपनी भी आशनाई है 
ज़िन्दगी भर की ये कमाई है 

हर बशर उसके चाहे से ही चले 
हर तरफ उसकी रहनुमाई है 

मैंने समझा हैं ज़िन्दगी को मगर
 ज़िन्दगी ही समझ न पायी है 

अब तो रहमत भरी नज़र कर दे
उम्र इस आस में बितायी है 

तेरी दीवानी हूँ मेरे कान्हा
 मेरी किस्मत में जग हँसाई है 

मन की आँखे जरा तू खोल सिया 
तेरे चारो तरफ खुदाई है

नज़्म _कन्या दान


मुझे आज लाडो बड़ी याद आये 
वो गोदी में खेली परी याद आये 
बड़े प्यार से अपनी मीठी जुबां से
 मेरी माँ मेरी माँ जो कह के बुलाये
 लगा के उसे अपने सीने से मैंने 
बाँहों में अपनी हैं झूले झुलाये 
माथे पे टीका काला लगाया 
परी को किसी की नज़र लग न जाये
 हसीन मेरे जीवन की सौगात है  तू
दुखो का ना साया कभी तुझपे आये
 तेरा अक्स मेरी निगाहों में हर दम 
मेरा रब तुझी में नज़र मुझको आये 

फूलों के पलना में कलियों में खेली 
तुझे चाहती है तेरी हर सहेली 
हुई तू सयानी बढ़ी फ़िक्र मेरी 
बलाएँ  तेरी मैंने हस हस के लेली 
होनी हैं कुछ दिन में तेरी सगाई 
कईं रात से नींद मुझको न आई 
तू है  मेरी गुडिया मेरी लाडली है 
क्या हो जाएगी तू मुझी से परायी 
यहीं सोचकर दिल मेरा डूब जाये 
मुझे तेरी लाडो बहुत याद आये 




मगर रस्म है तो  निभाना पड़ेगा 
मुझे खुद को पत्थर बनाना पड़ेगा 
तेरा दान होगा तो अभिमान होगा 
रहे खुश तू उस घर,ये अरमान होगा 
वहां पर भी खुशियों की सौगात पाए 
कोई दुःख तेरे पास हरगिज़ ना आये 
रहे दूर तुझसे ये विपदा के साये 
मुझे तेरी लाडो बहुत याद आये 



विदाई की तेरी ये मंज़र है आया 
हुई आंख नम दिल मेरा कसमसाया 
मगर दान करना था तेरी ओ बेटी 
है कन्या की किस्मत में फेरा ओ बेटी 
तुझे अपनी ससुराल जाना पड़ेगा 
तुझे भी चलन ये निभाना  पड़ेगा 
हैं मुक्ति सरीखा ये कन्या का दान 
दुखद हैं ये फिर भी बहुत हैं महान 
मैं माँ हूँ मेरा दिल समझ ही ना पाए 
तू आजा मैं बैठी हूँ पलके बिछायें
मेरी लाडली तू बहुत याद आये 

तू जो खुश है तो तेरे साथ ज़माना होगा

ग़म का तनहा ही तुझे साथ निभाना होगा 
तू जो खुश है तो तेरे साथ ज़माना होगा 

एक उजड़ी हुई महफ़िल को सजाना होगा
आज तुझको मेरे ग़म खाने पे आना होगा

एक हम क्या तेरा दीवाना ज़माना होगा
देख ले तुझे इक बार दीवाना होगा

फूल ही फूल हो दामन में जरुरी तो नहीं
ख़ार से भी कभी दामन को सजाना होगा

तेरी खातिर तेरे माँ- बाप ने क्या कुछ ना किया
कुछ न कुछ क़र्ज़ तो उनका भी चुकाना होगा

अजनबी हैं मगर अपना सा नज़र आता है
उस से लगता है कोई रिश्ता पुराना होगा

उनके माथे पे शिकन आ गयी सच है लेकिन
हाल ए दिल फिर भी सिया उनको सुनाना होगा

Gham ka tanha hi tujhe saath nibhana hoga
too jo khush hi to tere sath zamana hoga

Ek ujdi hui mehfil ko sajana hoga
Aaj tujh ko mere gham Khane pe aana hoga

ek hum kya tera deevana zamana hoga
dekh le jo tujhe ik baar divana hoga

teri khatir tere ma _baap ne kya kuch na kiya
kuch na kuch qarz to unka bhi chukana hoga

ajnabi hai magar apna sa nazar aata hai
us se lagta hai koi rishta purana hoga

unke maathe pe shikan aa gayee such hai lekin
Haal-e- dil phir bhi Siya unko sunana hoga

तो मेरे अपनों की पहले नज़र बदलने लगी।

मुसीबतों की मेरे घर हवा जो चलने लगी 
तो मेरे अपनों की पहले नज़र बदलने लगी।

खुदा बचाए मेरे मुल्क को तिजारत से
हवा कुछ ऐसी सियासत की आज चलने लगी 

भरोसा खुद पे बहुत था की तनहा जी लेगे
कमी किसी की मगर आज बहुत खलने लगी।

इसी की देर थी बस मां दुआएं दे मुझ को
फिर उसके बाद बला मेरे सर से टलने लगी।

ज़माना उसको समझने लगा है अब शायद
वह एक बात जो मेरी ग़ज़ल में ढलने लगी।

ग़रीब बाप पे पैसे न थे वह क्या करता
जो देखी गुडिया तो बच्ची वहीं मचलने लगी।

"सिया" ज़माने के रुख़ को कभी समझ न सकी
लगी जो वक़्त की ठोकर तो वह संभलने लगी।

रहमत


इस ग़ज़ल में पयाम उसका है
नाम उसका सलाम उसका है

उसकी रहमत है ज़िन्दगी मेरी
मेरे लब पे कलाम उसका हैं

मुझको है आसरा फ़क़त उसका
इश्क में सारा काम उसका है

हम फ़क़त आसमाँ को तकते हैं
सबसे ऊँचा तो बाम उसका है

जिसको पीकर सुरूर छा जाए
बंदगी का वो जाम उसका है

दैरो -काबा-ओ- मथुरा काशी में
हर जगह सिर्फ नाम उसका है

हमको लेना ही क्या ज़माने से
ज़िक्र बस सुबहो- शाम उसका है

हम तो कठपुतलिया है बस उसकी
बाकी सारा ही काम उसका है

बस इशारे पे रब के चलती जा
कितना बेहतर निजाम उसका है

एक मेला है ज़िन्दगानी भी
जिसमे हर इंतजाम उसका है

हम हैं मेहमान कुछ दिनों के फ़क़त
ये सभी ताम झाम उसका है

मेरा मिटटी के जैसा मोल 'सिया'
जो अता हो न दाम उसका है