Wednesday, 8 February 2012

तू जो खुश है तो तेरे साथ ज़माना होगा

ग़म का तनहा ही तुझे साथ निभाना होगा 
तू जो खुश है तो तेरे साथ ज़माना होगा 

एक उजड़ी हुई महफ़िल को सजाना होगा
आज तुझको मेरे ग़म खाने पे आना होगा

एक हम क्या तेरा दीवाना ज़माना होगा
देख ले तुझे इक बार दीवाना होगा

फूल ही फूल हो दामन में जरुरी तो नहीं
ख़ार से भी कभी दामन को सजाना होगा

तेरी खातिर तेरे माँ- बाप ने क्या कुछ ना किया
कुछ न कुछ क़र्ज़ तो उनका भी चुकाना होगा

अजनबी हैं मगर अपना सा नज़र आता है
उस से लगता है कोई रिश्ता पुराना होगा

उनके माथे पे शिकन आ गयी सच है लेकिन
हाल ए दिल फिर भी सिया उनको सुनाना होगा

Gham ka tanha hi tujhe saath nibhana hoga
too jo khush hi to tere sath zamana hoga

Ek ujdi hui mehfil ko sajana hoga
Aaj tujh ko mere gham Khane pe aana hoga

ek hum kya tera deevana zamana hoga
dekh le jo tujhe ik baar divana hoga

teri khatir tere ma _baap ne kya kuch na kiya
kuch na kuch qarz to unka bhi chukana hoga

ajnabi hai magar apna sa nazar aata hai
us se lagta hai koi rishta purana hoga

unke maathe pe shikan aa gayee such hai lekin
Haal-e- dil phir bhi Siya unko sunana hoga

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