Thursday, 9 February 2012

सर पे साईं तेरी जो रहमत हैं


सर पे साईं तेरी जो रहमत हैं
जिंदगी में सकूं है राहत है

हमको मालूम हैं मेरे साईं
जो भी कुछ है तेरी इनायत है

फिर बला कैसे मुझ तलक आये
साईं जब कर रहा हिफाज़त है

हो मुरादे सभी की पूरी यहाँ
नाम में तेरे कितनी बरक़त हैं 

मुझको हर शय में नज़र आये तू 
इस कदर मुझको तुझसे निस्बत है

ऐ अनाथों के नाथ तुझ पे निसार
तेरे भक्तो को तेरी चाहत हैं

मुझ को जो भी मिला है दुनिया में
साईं सब कुछ तेरी ही रहमत है

साईं जो कुछ सिया ने लिक्खा है
उसके हर लफ्ज़ में मोहब्बत है

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