Saturday, 23 November 2013

hindi ghazal .....रब तू मेरे पास बहुत है

रब तू मेरे पास बहुत है तुझपे ही विश्वास बहुत है सर्वत का हो भला जगत में बस इतनी अरदास बहुत है
मन में प्रेम भले ही न हो कहने को वो खास बहुत है
खुशियाँ भूल गयी दर मेरा 
इस दुःख का आभास बहुत है
दुष्कर्मी सड़को पर घूमें मन में ये संत्रास बहुत है
अब आज़ाद हुई है नारी ? झूठ है ये बकवास बहुत है
भूख, गरीबी, मज़बूरी हैं इस घर में उपवास बहुत है

सरस्वती वंदना

जय वीणा पुस्तक धारिणी उपकार कर 
दे ध्यान भक्ति ज्ञानपुँज अपार कर  

जय विद्या ज्ञान प्रदायनी माँ शारदे 
ये ज्ञान चक्षु खोल दे उद्धार कर 

मन नेह और विश्वास के दीपक जले 
जगतारिणी अब तूही बेडा पार कर

हम सत्य सयंम त्याग का जीवन चुने 
हो प्रेम सबके मन में, नेक विचार कर 

हम  स्वाभिमानी बन के साहस से जिए 
हे सरस्वती  सुखमय मेरा  संसार कर 

इस कंठ से गीतों की यूँ सरिता बहे  
वीणा से अपनी ऐसी तू झंकार कर 



Monday, 18 November 2013

मेरे नसीब का सूरज निकाल दे या रब

जो मुश्किलात हैं उनको ज़वाल दे या रब 
मेरे नसीब का सूरज निकाल दे या रब 

मेरे क़लम से मसावात के चराग़ जलें  ...(..masawaat ..yani samanta )
तू मेरे ज़ेहन को ऐसे ख़याल दे या रब 

भॅवर के बीच  फँसी है हयात की कश्ती 
करम से अपने इसे भी  निकाल दे या रब 

फरेब ओ मकर के जाले उतार दे सब लोग 
मेरे बयान में ऐसा कमाल दे या रब 

मेरी पसीने की रोटी सुकूँ की ज़ामिन  है 
मुझे तू जो भी दे,रिज़क ए हलाल  दे या रब 

हवा ए दहर से मुझको बचाये जो हर वक़्त 
करम की अपनी मुझे ऐसी शाल दे या रब 

jo mushkilaat haiN unko zawaal de ya rab 
mere naseeb ka suraj nikaal de ya rab 

mire qalam se masawaat ke charaagh jaleN
tu mere zehan ko aise khyaal de ya rab 

bhaNvar ke beech fansi hai hayaat ki kashti 
karam se apne ise bhi  nikaal de ya rab 

fareb o makar ke jaale utaar de sab log 
mere bayaan mein aisa kamaal de ya rab

meri paseene ki roti sukooN ki zaamin hai
mujhe tu jo bhi de rizq-e-halaal de ya rab......

hava e dahar se mujhko bachaye jo har waqt 
karam ki apni mujhe aisi  shaal de ya rab

Sunday, 17 November 2013

मिली शोहरत तो क्या बहका हुआ है

तेरा लहजा जो यूँ  बदला हुआ है 
तेरे सर में तक्कबुर आ गया है 

क़दम पड़ते नहीं हैं अब ज़मीं पर
मिली शोहरत तो क्या बहका हुआ है 

रक्खा क्यूँ हाथ दुखती रग पे मेरी 
पुराना ज़ख्म फिर ताज़ा हुआ   है 

मैं अब बुनती नहीं हूँ कोई सपना 
हकीकत से ही मेरा वास्ता है 

ए मेरी कजरवी कुछ तो बता दे। 
मेरी मंज़िल का गर तुझको पता है 

उजालों के परस्तारो  ये सोचो 
अंधेरों का भी लंबा सिलसिला है

हमारे ज़ब्त की मत बात पूछो 
तुम्हारा  हर सितम  हंस कर सहा है 

सभी के धुँधले से लगते है चेहरे 
अंधेरें चारसू फैला हुआ है 

ये दानवता का जो पसरा है साया 
हर इक इंसान क्या सोया हुआ है 

तुम अपनी आँख खोलो तब दिखेगा 
ख़ुदा चारों तरह बिखरा हुआ है 

 न इसकी क्यूँ ख़बर ली बाग़बाँ ने 
खिले बिन फूल ये मुरझा गया है 

नया है  दौर अब  माँ बाप की भी 
कहाँ अब कोई बच्चा मानता है
 
जला दंगो में है घर बार जिसका 
वो सर्दी में ठिठुरता कांपता  है 


tera lahja jo yun badla hua hai 
 ke tujh mein ab takkabbur aa gya hai 

qadam padte nahiN haiN ab  zameen par 
mili shohrat to kya behka hua hai 

rakkha kyun haath dukhti rag pe meri
purana zakhm phir taza  hua hai

main ab bunti nahi hooN koi sapna 
haqeeqat se hi mera wasta hai 

  aye meri kajrawi kuch to bata de 
meri manzil ka gar tujhko pata hai 
 
ujaloN  ke paristaro ye socho 
andheron ka bhi lamba silsila hai 

hamare zabt ki na baat pucho
tumahara har sitam hans kar saha hai 

sabhi ke dhundhleN se lagte hai chehre 
andhera charsu faila hua hai 


ye danvata ka jo pasra hai jo saya 
har ik insan  kya soya hua hai 

Tum apni  aankh  kholo to dikhega
khuda charoN taraf bikhra hua hai 

na iski kyun khabar li baghbaan ne 
 khlie bin phool ye murjha gaya hai


naya hai daur ab ma baap ki bhi 
kahaN koi bhi bachcha manta hai
 
jala dange mein hai ghar baar jiska 
wo sardi mein thithurta kanmpta hai



त्यों लगदा हैं जगत बेगाना





ज्यों ज्यों अपने अंतर जाना 
त्यों लगदा हैं जगत बेगाना 

वेख फकीरां ने कि मंगना 
खुश ओ पा के  फटा पुराना 

धी पुतरा तो एहीं  मंगदा 
मान ज़रा जा वड्डा सयाना 

प्यार जो मिलदा सी वडया तो 
हुन ओ कित्थे रया ज़माना

इक  आक्खे ते दूजा मनलें 
क्यों झगड़े ते  गल्ल वधाना 

मिट्टी दा ए तन है बन्दया 
मिट्टी दे विच ही मिल जाना 

कद तक कोई साथ निभान्दा 
इक दिन सबना ही टुर  जाना 


 jyo'N jyo'N apne antar jana 
tyo'N lagda hai jagat begana 

vekh faqeeraN ne ki mangna 
khush o pa ke fata puarana 

dhee puttra to aiheeN mangda 
maan zara ja vadda sayaana 

pyaar jo mida si vadya to 
hun o kitthe raya zamana 

ik aankheN te duja man laye 
kyo jhagde te gall  vadhana 

mitti da aye tan ve bandyaN 
mitti de hi vich mil jaana 

kad tak koi sath nibhanda
ik din sabna hi tur jana 





लगता हैं ख़त्म हो गए दिन इंतज़ार के

मुझको बुला रहे हैं सितारे पुकार के 
लगता हैं ख़त्म हो गए दिन इंतज़ार के 

आईना बन गयीं तिरी आँखे मेरे लिए 
मुद्दत के बाद देखा है खुद को सवाँर के 

रिश्तों के ख़ारज़ार में तन्हा खड़ी हूँ मैं 
अब ज़िंदगी से रूठ गए दिन बहार के 

ताज़ीम में झुकाया था सर जिनके सामने 
वो ले गए हैं आज मेरा सर उतार के

पूरी नहीं हुई हैं अभी ज़िम्मेदारियाँ
कुछ दिन ख़ुदा से माँग के देखूँ उधार के

दुश्मन से जीत आयी थी हर जंग मैं सिया
अपने ही घर में बैठी हूँ अपनों से हार के


مجھ کو بلا رہے ہیں ستارے پکار کے
لگتا ہے ختم ہو گئے دن انتظار کے

آئینہ بن گئیں تری آنکھیں میرے لئے
مدت کے بعد دیکھا ہے خود کو سوار کے

رشتوں کے خارذار میں تنہا کھڑی ہوں میں
اب زندگی سے روٹھ گئے دن بہار کے

تعظیم میں جھکایا تھا سر جن کے سامنے
وہ لے گئے ہیں آج میرا سر اتار کے

پوری نہیں ہوئی ہیں ابھی ذمہ داریاں
کچھ دن خدا سے مانگ کے دیکھوں قرضے کے

دشمن سے جیت آئی تھی ہر جنگ میں سیا
اپنے ہی گھر میں بیٹھی ہوں اپنوں سے ہار کے

mujhko bula rahe haiN sitaare pukaar ke 
lagta hai khtam ho gaye din intzaar ke 

aaina ban gayeN tiri aankhe mere liye 
muddat ke baad dekha hai khud ko nihaar ke 

rishtoN ke kharazaar mein tanha khadi hui 
ab zindgi se rooth gaye din bahaar ke 
tazeem mein jhukaya tha sar jinke saamne 
wo le gaye haiN aaj mera sar utaar ke 

puri nahiN hui haiN abhi zimmedariyaaN
kuch din khuda se maang ke dekhu udhaar ke 

dushman se jeet aayi thi har jung main siya 
apne hi ghar mein baithi hoon apno se haar ke 

मिले दो घड़ी उनसे कुछ बात की



निकल आई सूरत मुलाक़ात की 
मिले दो घड़ी उनसे कुछ बात की 

मुसव्विर से तस्वीर कैसे बने 
थकन उसकी आँखों में है रात की 

अगर यूहीं मुँह फेर लोगो तो फिर 
नदी सूख जायेगी जज़्बात की 

हमेशा ही करते हो मनमानियां 
कभी मेरे दिल की कोई बात की

ख़ुदा का दिया सब हैं मेरे तईं
ज़रूरत नहीं मुझको ख़ैरात की

मिलन का मैं वादा वफ़ा क्या करू
झड़ी लग गई आज बरसात की

छलक आयी आँखे भी उनकी सिया
कहानी सुना दी जो हालात की......

nikal aayi surat mulaqaat ki
mile do ghadhi unse kuch baat ki 

musv'vir se tasweer kaise bane 
thakan uski aankho mein hai raat ki 

agar yuheeN mooh fer logo to phir 
nadi sukh jaayegi jazbaat ki 

hamesha hi karte ho manmaniyaaN 
kabhi mere dil ki koi baat ki 

khuda ka dia sab to hai mere taeeN 
zarurat nahi mujhko khairaat ki 

milan ka main wada wafa kya karuN 
jhadi lag gayi aaj barsaat ki 

chhlak aai aankhe bhi unki siya 
kahaani suna di jo halaat ki 

Tuesday, 12 November 2013

nazm ...main aisa kar nahiN sakti

किसी का मैं बुरा सोंचू
किसी का दिल दुखाने की 
किसी को वरगलाने कि 
किसी को झूठ सच बोलूँ 
किसी के दिल से मैं खेलूँ 
मैं ऐसा कर नहीं सकती 

किसी के दर्द को दिल से 
बहुत महसूस करती हूँ 
कोई मुझसे ख़फ़ा हो तो 
मुझे तक़लीफ़ होती है 
जो अपना रूठ जाता है
मेरा दिल टूट जाता है 

कभी ऐसा भी होता है 
न जाने बेसबब ही क्यों 
उदासी घेर लेती है
मैं बैठे सोचती हूँ ये 
सिया ये क्या हुआ मुझको 
मैं क्यों ख़ामोश बैठी हूँ 
चलो कुछ शेर ही कह लूं 
ख्यालों में ज़रा बह लूँ 
तो मैं वो बात लिखती हूँ 
जो मैं महसूस करती हूँ 

kisi ka mai bura sochu kisi ka dil dukhane ki kisi ko wargalane ki
kisi ko jhooth sach bolu kisi ke dil se main khelu bada khud ko dikha kar main kisi ko main kahu chhota main aisa kar nahi sakti
kisi ke dard ko dil se bahut mehsus karti hooN koi mujhse khafa ho to mujhe takleef hoti hai jo apna ruth jaata hai Mera dil toot jata hai
kabhi aisa bhi hota hai na janae besasab hi kyo udaasi gher leti haiN main baithe sochti hooN ye siya ye kya hua mujhko main kyo khamosh baithi huN chaloon kuch sher hi kah looN khayaloN mein zara bah looN to main wo baat likhti hooN jo main mehesus karti hooN