Monday, 18 November 2013

मेरे नसीब का सूरज निकाल दे या रब

जो मुश्किलात हैं उनको ज़वाल दे या रब 
मेरे नसीब का सूरज निकाल दे या रब 

मेरे क़लम से मसावात के चराग़ जलें  ...(..masawaat ..yani samanta )
तू मेरे ज़ेहन को ऐसे ख़याल दे या रब 

भॅवर के बीच  फँसी है हयात की कश्ती 
करम से अपने इसे भी  निकाल दे या रब 

फरेब ओ मकर के जाले उतार दे सब लोग 
मेरे बयान में ऐसा कमाल दे या रब 

मेरी पसीने की रोटी सुकूँ की ज़ामिन  है 
मुझे तू जो भी दे,रिज़क ए हलाल  दे या रब 

हवा ए दहर से मुझको बचाये जो हर वक़्त 
करम की अपनी मुझे ऐसी शाल दे या रब 

jo mushkilaat haiN unko zawaal de ya rab 
mere naseeb ka suraj nikaal de ya rab 

mire qalam se masawaat ke charaagh jaleN
tu mere zehan ko aise khyaal de ya rab 

bhaNvar ke beech fansi hai hayaat ki kashti 
karam se apne ise bhi  nikaal de ya rab 

fareb o makar ke jaale utaar de sab log 
mere bayaan mein aisa kamaal de ya rab

meri paseene ki roti sukooN ki zaamin hai
mujhe tu jo bhi de rizq-e-halaal de ya rab......

hava e dahar se mujhko bachaye jo har waqt 
karam ki apni mujhe aisi  shaal de ya rab

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