Friday, 29 June 2012

तुम जो कहते हो अना है तो अना रखते हैं

दिल के ज़ख्मों पे यहीं एक दवा रखते हैं 
अपने महबूब के दामन की हवा रखते हैं 

सरबलंदी हमें अल्लाह अता करता हैं 
हम तो सर अपना सरे -नोके सिना रखते हैं. 

जिनको मंज़िल पे पहुचना है वो चलते है ज़रूर
फिक्र ख़ारों की कहाँ आबला-पा रखते हैं

ख्वाब हम अपने छुपाते है ज़माने भर से
उनपे एहसास की पलकों की रिदा रखते हैं

आग नफ़रत की किसे फूलने फलने देगी
अपने आमाल से हम इसको बुझा रखते हैं

मुश्किलें राह में आती है चली जाती है
हम तो हर हाल में जीने की अदा रखते हैं

अपनी इज्ज़त का हमें पास है लेकिन हमसे
तुम जो कहते हो अना है तो अना रखते हैं

हमसे तक़लीद किसी की नहीं होती है सिया
शेरगोई में भी अंदाज़ जुदा रखते हैं

dil ke zakhmo'n pe yaheen ak dawa rakhte hain
apme mehboob ke daaman ki hava rakhate hain

sarbaladi hame allah ata karta hain
hum to sar apna sare-noke sina rakhte hain

jinko manzil pe pahunchana hai wo chalte hai jarur
fiqr kharo'n ki kahan aabla -pa rakhte hain

khwaab hum apne chupaate hai zamaane bhar se
unpe ehsaas ki palko ki rida rakhte hain

aag nafrat ki kise fhoolne fhalne degi
apne aamaal se hum isko bhuja rakhte hain

mushkile raah mein aati hai chali jaati hai
hum to har haal mein jeene ki ada rakhte hain

apni izaat ka hame paas hai lekin humse
tum jo kahte ho ana hai to ana rakhte hain

humse taqleed kisi ki nahi hoti hai 'siya'
sher goyi mein bhi andaz juda rakhte hain ..

फिर भी क्यूं दिल को भाते हो

तुम अपनों को ठुकराते हो 
दुनिया से धोखा खाते हो 

प्यार नहीं मुझसे तो बोलो
मेरे नगमे क्यूं गाते हो 

सुख -दुःख में हूँ साथ तुम्हारे 
फिर क्यूं इतना घबराते हो 

गुस्सा होती हूँ मैं जब जब 
मुझको क्या क्या समझाते हो

मैं हूँ पूरब तुम हो पश्चिम
फिर भी क्यूं दिल को भाते हो

हर लम्हा मुश्किल से बीते
दूर जो मुझसे तुम जाते हो

tum apno ko thukrate ho
duniya se dhokha khate ho

pyaar nahi mujhse to bolo
mere nagme kyun gaate ho

sukh-dukh mein hoon saath tumahare
fir kyun itna ghabraate ho

gussa hoti hoon main jab jab
mujhko kya kya samjhate ho

main hoon purab,tum ho pashchim
fir bhi kyun dil ko bhaate ho

har lamha mushkil se beete
door jo mujhse tum jaate ho .....

ज़िन्दगी तुझसे तो हर तरह निभाया हमने


इक महल ख्वाब का आँखों में सजाया हमने...
ज़िन्दगी तुझको तो बस ख़्वाब में देखा हमने

शिकवा ए दिल भी करू तुझसे बता कैसे करू
खो दिया खुद को मगर तुझको न पाया हमने

रिश्ता _ए _दर्द समझ कर ही निभा लेना था
ज़िन्दगी तुझसे तो हर तरह निभाया हमने 

ढूढती फिरती है तुझको मेरी वीरान नज़र
इस ज़माने में कोई तुझसा न पाया हमने

उनकी बक्शी हुई सौगात समझ कर ए सिया 
अपनी तन्हाई को सीने से लगाया हमने ....


ik mahal khwaab ka aankho mein sajaya humne
zindgi tujhko to bus khwab mein dekha humne


shikwa e dil bhi karun tujhse bataa kaise karun
kho diya khud ko magar tujhko n paya humne

rishta e dard samajh kar hi nibha lena tha
zindgi tujhse to har tarah nibhaya humne

dhudhti firti hai tujhko meri veeran nazar
is zamaane mein koyi tujhsa n paya humne

unki bakhshi hui saugaat samajh kar e siya
apni tanhayi ko seene se lagaya humne

तन्हा तन्हा उदास रात लगे


बिन तेरे मुज़महिल हयात लगे
 तन्हा तन्हा उदास रात लगे


दिल को अच्छी जो तेरी बात लगे 
कितनी पुरनूर कायनात लगे  


लफ्ज़ कितने है तीर कितने है 
जिनको गिनने में कुल हयात लगे 


मेरी संजीदगी की शोहरत है 
 कैसे अच्छी हँसी की बात लगे 


 ज़िन्दगी उलझनों से है मामूर 
अब तो दिन भी अँधेरी रात लगे 


दौलत ए ग़म 'सिया 'करो तक़सीम
जिसकी क़िस्मत ये उसके हाथ लगे


bin tere muzmahil hayat lage
tanha tanha udas raat lage 


dil ko achchi jo teri baat lage
 kitni purnoor  qaynaat lage 


lafz kitne hain teer kitne hain
 inko ginne mein kul hayaat lage 


meri  sanjeedgi ki shohrat hai
kaise achchi hasi kii baat lage


zindgi uljhno se hai mamoor 
ab to din bhi andheri raat lage 


dualate gham "Siya"karo taqseem
 Jis ki qismat yeh uske haath lage

Monday, 4 June 2012

अश्कों ने लिख दी रुदाद

करती हूँ जब रब को याद 
दिल ख़ुद हो जाता है शाद

लफ्ज़ नहीं है ये फ़ौलाद
इनको चोट रहेगी याद

नेक अमल से जीवन की
बढती जाती है मीयाद

पड़ती हूँ जब मुश्किल में
होती है ग़ैबी इमदाद

नामौजूं कहले फिर देख
दुनिया है कितनी जल्लाद

मुल्ला पंडित दोनों ही
क्यूं भड़काते है उन्माद

पढ़ सकते हो तो पढ़ लो
अश्कों ने लिख दी रुदाद

शेर कहे तो हुआ यकीं
"सिया" को मिल जाएगी दाद

karti hoon jab rab ko yaad
dil khud ho jata hai shaad

lafz nahi hai ye faulaad
inko choot rahegi yaad

nek amal se jeevan ki
badhti jaati hai meeyaad

padti hoon jab mushkil mein
hoti hai gaibi imdaad

namauju kah le fir dekh
duniya hai kitni jallad

mulla pandit dono hi
kyun bhadkaate hai unmaad

padh sakte ho to padh lo
ashko ne likh di rudaad

sher kahe to hua yakee'N
siya ko mil jayegi daad ....

फिर धुवाँ बन के हम फ़ना हो जाये

वो जो इस बार हमनवां हो जाएँ 
हम भी खुशियों से आशना हो जाएँ 

मेरी आँखों के बहते सागर में 
डूबने वाले लापता हो जाएँ 

तुझसे बिछड़े तो इक दिए की तरह 
फिर धुवाँ बन के हम फ़ना हो जाये 

ठोकरों में है ज़िन्दगी अपनी 
हम तेरे घर का रास्ता हो जाएँ

दर्द को दिल में इस तरह रक्खें
किसी गूंगे की हम सदा हो जाएँ

गावं में कुछ वजूद भी है "सिया"
शहर में जाके लापता हो जाएँ .....
.....................................

wo jo is baar humnavaa'nho jayeen
'ham bhi khushiyoN se aashna ho jaa'eN'.

meri aankho ke bahte saagar mein
doobne wale laapata ho jaayen

tujhse bichde to ik diye ki tarah
fir dhuvan ban ke hum fanaa ho jaayen

thokroo mein hai zindgi apni
hum tere ghar ka raasta ho jaayen

dard ko dil mein is tarah rakkhe
kisi gunge ki hum sada ho jaayen

gaavn mein kuch vajood bhi hain 'siya"
shahar mein ja ke laapata ho jaye..

सितम की भी कोई तो मीयाद होगी

कोई हो न हो पर तेरी याद होगी
चलो दिल की दुनिया तो आबाद होगी

सितम मुझ पे तुम और भी कर के देखो
न लब पे गिला और न फ़रियाद होगी

मेरे घर में फिर भी अँधेरा रहेगा
जहां में सहर रात के बाद होगी

वहां बस मोहब्बत के गुल ही खिलेंगे
वो बस्ती जो नफ़रत से आज़ाद होगी

इसी आसरे पर सहे ज़ुल्म हम ने
सितम की भी कोई तो मीयाद होगी

सिया इंतज़ार अब तो है उस घड़ी का
के जब जिस्म से रूह आज़ाद होगी ....