Friday, 29 June 2012

तन्हा तन्हा उदास रात लगे


बिन तेरे मुज़महिल हयात लगे
 तन्हा तन्हा उदास रात लगे


दिल को अच्छी जो तेरी बात लगे 
कितनी पुरनूर कायनात लगे  


लफ्ज़ कितने है तीर कितने है 
जिनको गिनने में कुल हयात लगे 


मेरी संजीदगी की शोहरत है 
 कैसे अच्छी हँसी की बात लगे 


 ज़िन्दगी उलझनों से है मामूर 
अब तो दिन भी अँधेरी रात लगे 


दौलत ए ग़म 'सिया 'करो तक़सीम
जिसकी क़िस्मत ये उसके हाथ लगे


bin tere muzmahil hayat lage
tanha tanha udas raat lage 


dil ko achchi jo teri baat lage
 kitni purnoor  qaynaat lage 


lafz kitne hain teer kitne hain
 inko ginne mein kul hayaat lage 


meri  sanjeedgi ki shohrat hai
kaise achchi hasi kii baat lage


zindgi uljhno se hai mamoor 
ab to din bhi andheri raat lage 


dualate gham "Siya"karo taqseem
 Jis ki qismat yeh uske haath lage

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