Monday, 24 November 2014

कब तअल्लुक़ तेरा ग़ैरों से गवारा है मुझे

तुझ से रिश्ता है जो वो जान से प्यारा है मुझे
कब तअल्लुक़ तेरा ग़ैरों से गवारा है मुझे

सारी ख़ुशियाँ मेरी वाबस्ता हैं तेरे दम से 
एक तेरा ही तो दुनिया में सहारा है मुझे 

मैंने जिस तरह भी बरता है तुझे, जाने दे 
ज़िन्दगी तूने अजब तौर गुज़ारा है मुझे 

मुझ पे दुनिया की खुली तल्ख़ हक़ीक़त जब से 
दर्द ने गहरे समंदर में उतारा है मुझे 

जाने किस सोच में बैठी थी मैं तन्हा  यूँ ही 
कैसी आहट सी हुई किसने पुकारा है मुझे 

जीत जाने की ख़ुशी ख़ाक हुई पल भर में 
हाँ सिया उसने बड़ी शान से हारा है मुझे 

tujh se rishta hai jo wo jaan se pyaara hai mujhe
Kab ta'alluk tera ghairon se gawara hai mujhe

Sari khushiyan meri wabasta hain tere dam se
ek tera hi to dunniya mein sahara hai mujhe

main ne jis taraha bhi barta hai tujhe, jaane de
zindagi tu ne ajab tour guzara hai mujhe

mujh pe duniya ki khuli talkh haqeeqat jab se
dard ne gahre samandar me utara hai mujhe

Jane kis soch mein baithi thi main tanha yun hi
kaisi aahat si hui kisne pukaara hai mujhe

jeet jaane ki khushi khaak hui pal bhar mein 
haan siya usne badi shaan se haara hai mujhe 

siya sachdev

2 comments:

  1. जीत जाने की ख़ुशी ख़ाक हुई पल भर में
    हाँ सिया उसने बड़ी शान से हारा है मुझे ...........वाह ....आप की कलम में जादू है सिया जी

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  2. सुन्दर प्रस्तुति...

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