Saturday, 20 September 2014

मैं बहुत खुश हूँ ये अफ़वाह उड़ा दी जाये

मुझ पे हँसने की ज़माने को सज़ा दी जाये 
मैं बहुत खुश हूँ ये अफ़वाह उड़ा दी जाये 

शोर शहरों में बहुत है सुने कोई भी तो क्या 
जाके सन्नाटों को सहरा में सदा दी जाये 

मेरे ख़त उसने जला  डाले चलो अच्छा हुआ 
मेरी हर एक निशानी भी मिटा दी जाये 

मसअला जितना है बात उसपे भी बस उतनी हो 
क्या ज़रूरी है की हर बात बढ़ा दी जाए 

इसको अखलाक़ भी कहते हैं रवादारी भी 
जो भी दिल तोड़े सिया  उसको दुआ दी जाए 

Mujh.pe hansne ki zamaane ko saza di jaaye Main bahut khush hu'n ye afwaah uda di jaaye

Shor shahro'n me bahut hai sune koi bhi to kya. Jaake sannato'n ko sahra me'n sada di jaae

Mere khat us ne jala daale chalo achchha hua Meri.har ek nishani bhi mita di jaaye

Mas'ala jitna ho baat uspe bhi bus utni ho Kya zuroori hai ki har baat badha di jaaye

isko akhlaq bhi kahte hai rawadaari bhi
jo bhi dil tode 'siya' usko dua di jaaye

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (21-09-2014) को "मेरी धरोहर...पेड़" (चर्चा मंच 1743) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'जी आपके इन उत्साहवर्धक शब्दों को सादर अभिनन्दन ! आपके शब्द लेखनी को बल देते हैं . सादर आभार अभिव्यक्त करती हूँ सादर नमन

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  3. सुशील कुमार जोशी जी धन्यवाद और आभार आपकी सराहना और स्नेह के लिए सादर नमन

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