Saturday, 3 May 2014

इस दुनिया से अपना नाता तोड़ लिया

इक इक करके सबने ही मुंह मोड़ लिया 
इस दुनिया से अपना नाता तोड़ लिया 

जहाँ से लौट के आना भी है नामुमकिन 
ऐसे जग से अपना रिश्ता जोड़ लिया 

जिस्म लगे बेजान मगर हम जीते हैँ 
हम से सब ख़ुशियों ने रिश्ता तोड़ लिया 

पत्थर तो बदनाम  बहुत है ज़ख्मो मे 
हमने तो शीशे से ही सर फोड़ लिया 

घुट घुट कर आंसू की  बूँदें पीते है 
क़तरों ने नदियां से रिश्ता जोड़ लिया 

जब तक न टूटे सांसों कि डोर सिया 
मैंने राम के नाम से रिश्ता जोड़ लिया 

ik ik kar ke sab ne hi monh mod liya
is duniya se apna nata tod liya

jahaan se lout ke aana bhi hai na mumkin
aese jag se apna rishta jod liya

jism lage bejaan magar hum jeete hain
hum se sab khushiyon ne rishta tod liya

pathar to badnaam bahot hain zakhmo me
apna sar sheeshe se ham ne phod liya

ghut ghut kar Ansoo ki Boondein peete hai 
qatron ne nadiya se rishta jod liya

jab tak na toote saanso ki dor siya
main ne ram ke naam se rishta jod liya

6 comments:

  1. आपकी इस उत्कृष्ट अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (11-05-2014) को ''ये प्यार सा रिश्ता'' (चर्चा मंच 1609) पर भी होगी
    --
    आप ज़रूर इस ब्लॉग पे नज़र डालें
    सादर

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  2. आपके दुख को मै अच्छे से समझती हूँ क्यूं कि एक एक करके मेरे अपनों ने बी इस जग से नाता तोड लिया है। मर्मस्पर्शी कविता।

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  3. जब तक न टूटे सांसों कि डोर सिया
    मैंने राम के नाम से रिश्ता जोड़ लिया
    यह 'राम ' ही तो अंतिम सहारा है जिसे किसी ने नहीं देखा पर वह सबकी मदद करता है अंतर्मन की सुलगती पीड़ा को अभिव्यक्त करती सुन्दर रचना

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट अभिव्यक्ति की चर्चा कल रविवार (25-05-2014) को ''ग़ज़ल को समझ ले वो, फिर इसमें ही ढलता है'' ''चर्चा मंच 1623'' पर भी होगी
    --
    आप ज़रूर इस ब्लॉग पे नज़र डालें
    सादर

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  5. बढ़िया व सुन्दर रचना , आदरणीय बढ़िया लेखन है आपका , धन्यवाद !
    Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

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