Thursday, 27 March 2014

वो शख्स झूठ बोल के मुझसे जुदा हुआ

    क़ुर्बत के बावजूद भी क्यूँ फ़ासला हुआ 
    था अपने दरमयां जो ताल्लुक वो क्या हुआ 

    जिस का हर एक लफ्ज़ मैं सच मानती रही 
    वो शख्स झूठ बोल के मुझसे जुदा हुआ 

    मेरे यक़ी के साथ कोई खेलता रहा 
    लो दिल के साथ फिर से मेरे हादसा हुआ 

    इक वो के जैसे कोई तिजारत में कामयाब 
    और एक मैं के जैसे हो कोई ठगा हुआ

    रिश्ता ये बोझ ही था जिसे ढो रहे थे हम
    अच्छा है ये की आज से रस्ता जुदा हुआ

    कच्चे घड़े पे नाज़ किया तुमने किस लिए
    सोचा नहीं हैं वक़्त का दरिया चढ़ा हुआ

    कड़वी लगेगी बात अगर सच कहा तुम्हें
    हमने तो इसलिए है अभी मुँह सिया हुआ..

    qurbat ke bawajood bhi kyun faasla hua
    Tha apne DarmiyaN jo tAlluq wo kya hua.

    jis ke har eak lafz main sach maanti rahi
    wo shaks jhoot bol ke mujh se juda huwa

    mere yaqeen ke sath koyi khelta raha
    lo dil ke sath phir se mere haadsa hua

    ik wo ke jaise koyi tijarat mein kamyaab
    aur ek main ke jaise ho koyi thaga hua

    rishta ye bojh hi tha jise dho rahe the hum
    achcha hai ye ki aaj se rasta juda hua

    kachche ghadhe pe naaz kiya tum ne kis liye
    socha nahi ..hai'n waqt ka darya chadha huwa

    kadvi lage gi baat agar sach kaha tumhe
    ham ne to iss liye hai abhi monh siya huwa .

2 comments:

  1. आपकी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    --
    आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल सोमवार (31-03-2014) को ''बोलते शब्द'' (चर्चा मंच-1568) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!

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