Saturday, 22 March 2014

वैसे इक दिन मौत से भी तो आलिंगन आवश्यक है,

जैसे जीवन से साँसों का ये बंधन आवश्यक है,
वैसे इक दिन मौत से भी तो आलिंगन आवश्यक है,

धूल अगर जम जाये तो फिर खुद ही उसको साफ़ करो
जो असली तस्वीर दिखाये वो दर्पण आवश्यक है

दया, अहिंसा क्षमा, मैत्री का हो समावेश जिस में
उसी ह्रदय से करुणा का भी आलिंगन आवश्यक है

दुर्भावों और दुर्विचार से मन को मलिन न करना तू
शब्द मुखर होने से पहले ही मंथन आवश्यक है ।

सुखद और उज्जवल भविष्य का मार्ग तुम्हें यदि पाना हो
कर्मभूमि चुनने से पहले भी चिंतन आवश्यक है

जीवन सुखमय हो जाता है अनुशासन से प्राणी का 
लेकिन इच्छा शक्ति में हर पल संवर्धन आवश्यक है ।

अभिनव ज्ञान ज्योति से अपने मन आँगन को चमकाओ
नयी चेतना लाना हो तो परिवर्तन आवश्यक ह

7 comments:

  1. आपकी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    --
    आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल सोमवार (24-03-2014) को ''लेख़न की अलग अलग विद्याएँ'' (चर्चा मंच-1561) पर भी होगी!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!

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  2. bahut bahut shukria bhai ,,,,khush rahiye'N

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    1. सुन्दर बेहतरीन
      आपनी नज़रों में हमेशा रखिएगा दीदी

      हालात-ए-बयाँ/Halat-E-Bayaan: विरह की आग ऐसी है

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  3. बहुत हि सुंदर रचना लिखी हैं आपने , आ० सिया जी धन्यवाद व स्वागत हैं मेरे लिंक पे -
    नया प्रकाशन -: बुद्धिवर्धक कहानियाँ - ( ~ प्राणायाम ही कल्पवृक्ष ~ ) - { Inspiring stories part -3 }

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  4. सुन्दर भावपूर्ण रचना है ... हार्दिक बधाई ...

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  5. कृतज्ञभाव धन्यवाद देती हूँ आपका स्नेह भी मेरी सामर्थ्य है , अनवरतता बनाए रखें. यह भी शुभकामना देते रहें कि मैं आपके स्नेह को सार्थक सिद्ध कर सकूँ. सादर और ससम्मान

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