Saturday, 1 March 2014

दर्द थम जाएगा लगते नहीं आसार अभी



हादसे गुज़रे है दिल पर मेरे दो चार अभी 
दर्द थम जाएगा लगते नहीं आसार अभी 

 याद आयी है तेरी फिर मुझे इक बार अभी 
भूलना तुझको मुझे लगता है दुश्वार अभी 

हमने हर चंद सवालों का दिया चुप से जवाब 
फिर भी लफ़्ज़ों की  तेरे कम न हुई धार अभी 

उसने हमदर्दी  का इज़हार किया प्यार नहीं 
लो बिखरने लगे रिश्तों के सभी तार अभी 

 फ़र्क पड़ता नहीं उसको तेरी बर्बादी से 
 यूँ किया मुझको सहेली ने ख़बरदार अभी 

वो हर इक बात का मफ़हूम बदल देता है 
उससे कुछ कहना सिया है तेरा बेकार अभी 


1 comment:

  1. दिल को छू लेले वाली रचना सिया जी .........बधाई

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