Friday, 17 January 2014

hindi ghazal

होठों पर कुछ मधुबन जैसा 
आँखों में है सावन जैसा 

ख़ुशी हुई है उससे मिल कर
मन अंदर है नर्तन जैसा

असहनीय है पीड़ा तेरी
क्रंदन तेरा बिरहन जैसा

तुझ बिन है सब रीता रीता
कुछ तो होता जीवन जैसा

किसकी राह तके है जोगन
दर्द सहे है बिरहन जैसा

इक असीम सागर जैसा है
प्रेम नहीं हैं बंधन जैसा 

No comments:

Post a Comment