Friday, 6 December 2013

मेरी उड़ान को कोई अम्बर नहीं मिला

मैं जिसको ढूढ़ती थी वो अवसर नहीं मिला
मेरी उड़ान को कोई अम्बर नहीं मिला

अनुचित थे जिसके काम गलत आचरण भी थे
उसको समाज में कभी आदर नहीं मिला

मासूम बच्चियां भी सुरक्षित नहीं यहाँ
इंसान और दरिंदे में अंतर नहीं मिला .

खिलने से थोड़ा पहले ही मुरझा गए थे फूल 
वो जिनको साँस लेने का अवसर नहीं मिला

पैसा नहीं था इतना पिता दे सके दहेज़
बेटी गरीब की थी तभी वर नहीं मिला -

साँसो का क़र्ज़ था सो यहीं पर दिया उतार
हम थे किराएदार हमें घर नहीं मिला

अट्टालिकाएं कितनी बनायीं हैं रात दिन
लेकिन ज़मीन के सिवा बिस्तर नहीं मिला

siya

No comments:

Post a Comment