Sunday, 1 December 2013

मुझपे रब की बड़ी इनायत है

ये जो दुनिया में मेरी शोहरत है 
  मुझपे रब की बड़ी  इनायत है 

आज बेचैन भी नहीं ये दिल 
बाद मुद्दत के थोड़ी राहत है 

मैं ये सुनती रहीं बुजुर्गों से 
इश्क़ करना तो इक इबादत है

अपनी आँखों को खोल कर देखो 
ज़िंदगी कितनी खूबसूरत है 

पढ़ सको तो कभी पढ़ो इसको 
मेरे चेहरे पे जो इबारत है

ज़िंदगी के सफ़र में ए हमदम 
हर क़दम पर तेरी ज़रूरत है 

भूल जाओ कहा सुना मेरा 
दिल में थोड़ी सी ग़र मुरव्वत है

आप ने ज़ुल्म की हिमायत की 
आपकी ज़ेहनियत पे हैरत है 

आईना बनके ज़िंदगी करना 
मेरे माँ बाप कि नसीहत है

आपके इस निज़ाम ए हस्ती में 
मौत सबसे बड़ी हकीक़त है

शेर गोई नहीं कोई आसाँ 
इल्म की भी ज़रा ज़रूरत है 

अब मै इल्ज़ाम दूँ तो किसको दूँ 
आज कल हर जगह सियासत है

आईना बनके ज़िंदगी करना 
मेरे माँ बाप कि नसीहत है

हौसला देख कर सिया मेरा 
हर मुसीबत के दिल में हैरत है


No comments:

Post a Comment