Sunday, 23 June 2013

rubai

हर दर्द की तफ़सीर नहीं होती है
हर पावँ में जंज़ीर नहीं होती है
ये बात समझने में लगे हैं बरसों 
हर ख़्वाब की ताबीर नहीं होती है 

Har dard ki tafseer nahi'n hoti hai 
Har pavn mein janjeer nahi hoti hai 
ye baat samjhne mein lage hain barso'n 
Har khwaab ki taabeer nahee'n hoti hai

1 comment:

  1. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.

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