Friday, 5 April 2013

दुनिया की जुस्तजू भी है सजदे में सर भी है

माँ बाप की दुआओं में इतना असर भी है 
मैं जी रही हूँ शान से शानों प् सर भी है

ये भी है खुसूसियत है मिरे दौर की जनाब 
दुनिया की जुस्तजू भी है सजदे में सर भी है

उस बेवफा ने छोड़ दिया रास्ते में साथ 
सो दास्तान ए इश्क़ मिरी मुख़्तसर भी है

उड़ती हुई निगाह वो डाले तो खिल उठू 
काग़ज़ तो आंसुवों से मिरे दिल का तर भी है

 उक़बा की फिक्र है तो इबादत किया करो 
दुनिया है जिसका नाम फ़रेब ए नज़र भी है 

सदियों से उसके हिज्र में रोती हूँ मैं"सिया" 
अब लोग पूछते हैं की अपनी ख़बर भी है 

ye bhi khusoosiyat hai mire daur ki janab 
duniya ki justju bhi hai sajde mein sar bhi hai

us bewafa ne chhod diya raaste mein saath 
so dastaan e ishq miri mukhtsar bhi hai

udti hui nigah wo daale to khil utthu 
kaghaz to aansuvo'n se mire dil ka tarr bhi hai

uqba ki fiqr hai to ibadat kiya karo 
duniya hai jiska naam fareb e nazar bhi hai

sadiyo'n se uske hizr mein roti hoon main siya 
ab log puchte hain ki apni khbar bhi hai?

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