Sunday, 21 April 2013

हम आज भी रिश्तों को निभाना नहीं भूले


हम तो अभी बचपन का ज़माना नहीं भूले 
शाखों से परिंदों को उड़ाना नहीं भूले 

हमने तो यहीं आपसे सीखा है सदा माँ 
हम आज भी रिश्तों को निभाना नहीं भूले

एहसास की लज्ज़त है अभी जिसमें नुमायां
हम माँ का वहीं शाल पुराना नहीं भूले

माँ का मुझे वो डाँटना और साथ में रोना
सीने से मुझे फिर वो लगाना नहीं भूले

माँ बाप की इज्ज़त है सदा धर्म तुम्हारा 
बच्चो को यहीं बात सिखाना नहीं भूले 

बचपन की हमें याद दिलाती है ये बारिश
बारिश की फुहारों में नहाना नहीं भूले .

ममता से भरा होता था इक इक वो निवाला 
माँ के बने हाथो का वो खाना नहीं भूले 

रस्ते में भले आये सिया कितनी मुसीबत 
उम्मीद के फूलों को खिलाना नहीं भूले



 hum to abhi bachpan ka zamana nahi bhule
shakho se parindo'n ko udana nahi bhule

 humne to yaahen aapse seekha hai sada ma 
hum aaj bhi rishto'n ko nibhana nahi bhule


ehsaas ki lazzat hain abhi jismein numaya'n 
hum ma ka waheen shal puarana nahi bhule 

Maan ka wo mujhe daantna phir saath men rona...
seene se mujhe phir wo lagaana nahin bhoole..

ma _baap ki izzat hai sada dharm tumahara 
bachcho ko  yaheen baat sikhana nahi bhule


bachpan ki hameN yaad dilaati hai.n ye barish
bairish ki fuharo'n mein nahana nahi bhule

mamta se bhara hota tha ik ik wo niwala
ma ke bane hatho ka wo khana nahi bhule

raste mein bhale aaye siya kitni museebat 
ummeed ke fholoN ko khilana nahi bhule

1 comment:

  1. एहसास की लज्ज़त है अभी जिसमें नुमायां
    हम माँ का वहीं शाल पुराना नहीं भूले

    आँख के पोरों मे नमी उतार आई है
    आज फिर मुझे माँ की याद आई है....

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