Sunday, 3 March 2013

सब्र अपना आज़माना चाहिए


मुश्किलों को घर बुलाना चाहिए 
सब्र अपना आज़माना चाहिए 

मेरे हिस्से में ही आये ख़ार क्यों 
ये शिकायत भूल जाना चाहिए
 
बोझ दिल का होगा कुछ हल्का तभी 
हाल ए दिल उनको सुनाना चाहिए 

वो जो पहलू से उट्ठे तो यूं लगा 
उनको जाने का बहाना चाहिए 

लुट गए दिल के सभी अरमान अब 
दर्द का मुझको खज़ाना चाहिए 

दर्द तो मैंने कमाया हैं बहुत 
अब ख़ुशी का इक बहाना चाहिए  

फिर अँधेरे दिल से होंगे दूर सब 
दीप रोशन इक जलाना चाहिए 

रौशनी की इक किरन चमके ज़रा 
कुछ तो जीने का बहाना चाहिए 

पड़ गयी माथे पे सूरज की किरन 
नींद से अब जाग जाना चाहिए 

इस जहाँ से भर गया दिल मेरा 
अब नया इक आशियाना चाहिए 
 
कौन समझेगा यहाँ दिल की ज़बां 
हाल ए दिल सबसे छुपाना चाहिए 

मुख़्तसर सी जिंदगी है ए सिया 
प्यार से मिलना मिलाना चाहिए

mushkilon ko ghar bulana chahiye 
sabr apna aazmana chahiye 

 Mere hisse mein he aaye khar kyun 
ye shikayat bhul jaana chahiye 

Bojh dil ka hoga kuch halka tabhi 
haal e dil unko sunana chahiye 

Wo jo pehlo sey uthey to yoon laga
unko  jane ka bahana  chahiye 

lut gaye dil ke sabhi armaan ab
dard ka mujhko khazana chahiye 

Dard to maine kamaye hai bahut 
ab khushi ka ik bahana chahiye ...

fir andhere dil se honge door sab 
deep roshan ik jalana chahiye 

roshni ki  Ik Kiran chamke zara 
kuch to jeene ka bahana chahiye 

pad gayi mathe pe suraj ki kiran 
neend se ab jaag jana  chahiye 

is jahan se bhar gaya hai dil mera 
ab naya ik aashiyaana chahiye 

kaun samjhega yahan dil ki zabaan 
Haal e dil sabse chupana chahiye 

mukhtsar si zindgi hai ab siya
pyaar se milna milana chahiye 

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