Saturday, 26 January 2013

दिल से दुःख दर्द सब भुलाने दो

जिंदगी ख़ुशनुमा बनाने दो
दिल से दुःख दर्द सब भुलाने दो 

खुद ही चलना वो सीख जाएगा 
उसको कुछ देर लडखाने दो 

जुस्तजू थी ख़ुशी मिलेगी कभी 
न सही ग़म से ही निभाने दो

धुधला धुंधला हर एक मंज़र है 
इक किरन रौशनी की आने दो

खुशबुए गुल उड़ेगी चारो ओर
तितलियों को करीब आने दो

लोग तो मज्हका उड़ाते हैं,
दिल पे मत लेना यार जाने दो ..

अपने कातिल से खूंबहा लेकर
कह रहा है वो मुस्कुराने दो

ये जो फुटपाथ पर हैं इनको भी
हक़िम ए वक़्त शामियाने दो

मेरी हस्ती को ए खुदा मेरे
नूर से अपने जगममगाने दो

मांगती हूँ सिया यहीं मालिक
अपनी रहमत के तुम खज़ाने दो...

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