Wednesday, 28 November 2012

रेत पर नाम लिखा और मिटाया तुमने

मेरी रुसवाई का यूं जश्न मनाया तुमने 
रेत पर नाम लिखा और मिटाया तुमने 

फिक्र की धूप में झुलसी हूँ कई सदियों तक
मैंने पाया है तुम्हे मुझको न पाया तुमने

मैंने जब चाहा भुला दूं तिरी यादों को तभी
दर्द का गीत मुझे आके सुनाया तुमने

इश्क ने सुध ही भुला थी मेरे तन मन की
टूट ही जाती मगर मुझको बचाया तुमने

वक़्त ने मुझ से उसी वक़्त हंसी छीनी है
जब भी रोती हुई आँखों को हंसाया तुमने

खौफ़ ने आ के वहीं मिरे पावं वहीं रोक दिए
जब मिरी सम्त कभी हाथ बढाया तुमने ..

meri ruswayi ka yun jashn manaya tumne
ret par naam likha aur mitaya tumne

fiqr ki dhoop mein jhulsi hoon kayi sadiyo'n se
maine paya hai tumeh mujhko na paya tumne

maine jab chaha bhula du'n tiri yado'n ko tabhi
dard ka geet mujhe aake sunaya tumne

ishq ne sudh hi bhula thi mere tan man ki
toot hi jaati magar mujhko bachaya tumne

waqt ne mujh se usi wqat hansi cheeni hai
jab bhi roti hui aankho ko hansaya tumne

khauf ne aake mire pavn wahin rok diye
jab miri samt kabhi hath badhya tumne ..

No comments:

Post a Comment