Sunday, 4 November 2012

तू मेरे ज़िस्म का हिस्सा हुआ है

जो मेरा था वो सब तेरा हुआ है 
तू मेरे ज़िस्म का हिस्सा हुआ है 

ख़ुदा अब लाज रखना दोस्ती की 
बड़ी मुद्दत से वो अपना हुआ है

मोहब्बत की नज़र से जब भी देखो 
यक़ीनन ग़ैर भी अपना हुआ है 

ताज्ज़ुब है मेरी खामोशियों का 
ज़माने में बहुत चर्चा हुआ है

खड़ी हूँ लाश पर अपनी मैं ख़ुद ही
मेरा क़द आपसे ऊँचा हुआ है

बुरा कुछ भी नहीं है इस जहां में
हुआ जो कुछ बहोत अच्छा हुआ है

ये गुंचा सिर्फ मुरझाने के डर से
सकूते शाख पर सहमा हुआ है

दिखायेगा हमें वो रास्ता क्या
जो ख़ुद ही राह से भटका हुआ है

बना लेगा ख़ुद अपनी राह बेशक
वो पानी जो सिया बहता हुआ है

jo mera tha wo sab tera hua hai
tu mere zism ka hissa hua hai

khuda ab laj rakhna dosti ki
badi muddat mein wo apna hua hai

mohbbat ki nazar se jab bhi dekha
yaqeenan gair bhi apna hua hai

ta'ajub hai meri khaamoshiyo'n ka
zamaane mein bahot charcha hua hai

khadi hoon lash par apni main khud hi
mera qad aapse uncha hua hai

bura kuch bhi nahi hai is zahan mein
hua jo kuch bahot achcha hua hai

ye guncha sirf murjahne ke dar se
saqoote shakh par sahma hua hai

dikhayega hame wo rasta kya
jo khud he raah se bhatka hua hai

bana lega khud apni raah beshaq
wo pani jo siya bahta hua hai ..

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