Thursday, 4 October 2012

तेरे हिसार में रहती है ज़िन्दगी मुखलिस

तिरे बदन में गुलाबों की ताजगी मुखलिस
तेरे हिसार में रहती है ज़िन्दगी मुखलिस 

मैं पेश पेश थी तेरा दिफाह करने में 
मेरा यक़ीन तो कर है ये बरतरी मुखलिस 

जो नफरतों के समंदर लिए था सीने में 
मोहब्बतों से मेरी बन गया वहीं मुखलिस 

हिसार जिस्म को रखती है अपने क़ाबू में 
फिज़ा में गूंजने वाली है धौकनी मुखलिस 

जहां जबां पे हकूमत लगाये हो पहरा 
वहां पे शोर मचाती है खामुशी मुखलिस 

फ़ज़ा में बजता है अब भी तराना ए तौहीद
तहारतो का रवैयाँ  है आज भी मुफलिस 

कभी रहो तो कनातों पसंद लोगों में 
तो फिर लगेगी तुम्हे अपनी आगही मुफलिस 

अगरचे साफ़ है दिल का हसीन आइना 
तो फिर करेगा कभी ख़ुद सपुर्दगी मुखलिस 

ताल्लुकात की बूढी हसीन झीलों में 
मजे से तैरती रहती है  दोस्ती मुखलिस 

tire badan mein gulabo'n ki tazgi mukhlis 
tire hisaar mein rahti hai zindagi mukhlis 

main pesh pesh thi tera difaah karne mein 
mira yaqeen to kar hai ye bartari mukhlis 

jo nafrato'n ka samndar liye tha seene mein
mohbaato'n se meri ban gaya waheen mukhlis

hisaar_e_jism ko rakhti hai apne qabu mein 
faza mein goonjane wali hai dhaukani mukhlis 

jahan jaban pe haqumat lagaye ho pahra 
wahan pe shor machati hai khamushi mukhlis 

faza mein bajta hai ab bhi tarana e tauheed 
tahartoo'n ke ravaiye hai aaj bhi mukhlis

kabhi raho to qanato pasand logo mein  
to fir lagegi tumhe'n apni aagahi mukhlis 

agarche saaf ho dil ka haseen aaina 
to fir karenge sabhi khud sapurdagi mukhlis 

talluqaat ki bhudhi haseen jheelon mein 
maze se tairti rahti hai dosti mukhlis 


1 comment:

  1. बहत सुंदर गजल | कुछ शब्दों का अर्थ समझ में नहीं आया | मगर कुछ शाडोन का अर्थ समझ नहीं पाया | अगर कुछ कठिन शब्दों का अर्थ भी अंत में दे देतीं साथ में तो अच्छा रहता |
    मेरी नई पोस्ट:-
    करुण पुकार

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