Saturday, 7 April 2012

वक़्त बेवक्त जो बे_बात बदल जाते हैं


दिल धडकता है तो नग्मात बदल जाते हैं 
इश्क़ होता है तो दिन रात बदल जाते हैं 

उसके जाते ही हवा ख़ून जलाती हैं मेरा 
और फिर शहर के हालात बदल जाते हैं 

वक़्त बदला है तो मेयार ए शिकायत बदला  
चंद लम्हों में सवालात बदल जाते हैं 

साख बनती ही नहीं उनकी कभी दुनिया में 
वक़्त बेवक्त जो बे_बात बदल जाते हैं 

वक़्त के हाथ में रहती हैं किताबे दुनिया 
और हर रोज़ ही सफहात बदल जाते हैं

फूल को छूके जो आई तो महक जाये हवा 
नेक सोहबत से ख्यालात बदल जाते हैं

अपने ख़ालिक पे सिया जिनको भरोसा ही नहीं 
मुफलिसी में वहीं हज़रात बदल जाते हैं ....

1 comment:

  1. उसके जाते ही हवा ख़ून जलाती हैं मेरा
    और फिर शहर के हालात बदल जाते हैं

    फूल को छूके जो आई तो महक जाये हवा
    नेक सोहबत से ख्यालात बदल जाते हैं

    bahut hi gahri baat kah gai ho siya.....
    kai kai baar padne ko jee karta hai

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