Sunday, 8 April 2012

आह भी हैं बेअसर दिल है बहुत वीराना आज

छूट जायेगा तेरी दुनिया का ये मैखाना आज 
क्या मेरी हस्ती का भर जायेगा ये पैमाना आज 

जब सुना महफ़िल में आया है मेरा जाने_बह़ार 
वज्द में फिर आ गया है ये दिल ए दीवाना आज 

घर की दीवारों ने सुन ली है जो दिल की दास्तां
देख लेना बन के निकलेगी यही अफ़साना आज 

शाम से जलता हैं दिल बुझता नहीं वक्ते सहर 
आह भी हैं बेअसर दिल है बहुत वीराना आज

कल की कालिख के हैं कुछ धब्बे तेरे किरदार पर
अब समझ पाई हूँ मैं,तुझको भी है समझाना आज

शम्मा ख़ुद ही बुझ गयी कुछ देर तक जलने के बाद
क्या करे जाये कहा जिंदा हैं जो परवाना आज

चारसूं कोई नहीं है नूरे _ यज्दाँ के सिवा 
खोल कर तो देख लो दिल का मेरे तहखाना आज

Chhoot jaiyega teri dunya ka ye maikhana aaj
Kya meri hasti ka bhar jaiga ye paimana aaj

Jab suna mehfil mein aaya hai mera jaan e bahaar
wazd me phir aagaya hai ye dil e deewana aaj

Ghar ki deewaron ne sunli hai jo dil ki dastan
dekh lena ban ke niklegi yaheen afsana aaj

Shaam se jalta hai dil bujhta. Nahi waqt e sahar
aah bhi hai beasar,dil hain bahut veerana aaj

Kal ki kalikh ke hai’n kuch dhabbe tere kirdaar per,
Ab samajh payii hu’n mai’n tujhko bhi hai samjhana aaj.

Shamma khud hi bujh gayii kuch der tak jalne ke baad,
Kya kare jaye kaha’n zinda hai jo parvana aaj.

charsu'N koyi nahi hai noore yazdan ke siwa
khol kar to dekh lo dil ka mere tahkhana aaj ....

2 comments:

  1. बढिया है

    शाम से जलता हैं दिल बुझता नहीं वक्ते सहर
    आह भी हैं बेअसर दिल है बहुत वीराना आज

    बहुत सुंदर

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  2. कल की कालिख के हैं कुछ धब्बे तेरे किरदार पर.....

    dhone se bhi nahi jaate
    kuch daag daman pe lage aise.......

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