Sunday, 8 April 2012

chand sher aapki khidmat mein

मेरी फ़ितरत भी जुदा , तेरा भी अंदाज़ जुदा 
खुद से शिकवा है मुझे, तुझको ज़माने से गिला

meri fitrat bhi juda,tera bhi andaz juda 
khud se shiqva hai mujhe,tujhko zamanae se gila 

siya 



कभी सहरा में कोई गुल खिला है 
यहाँ हर शख्स अपने से जुदा है 
दिया है दिल को अपने यूं दिलासा 
बिछड़ना ही मुकद्दर में लिखा है 

kabhi sahra mein koyi gul khila hai 
yahan har shakhs apne se juda hai 
diya hai dil ko apne yoon dilaasa 
"Bichhadna hi muqaddar me likhaa hai"
siya



Is zamaane mein nahi ab to mohabbat ka chalan,
Nafraten aag lagaate hain, sulagtee hai jalan.

इस ज़माने में नहीं अब तो मोहब्बत का चलन 
नफरतें आग लगाती हैं,सुलगती है जलन 

siya 



न पूछ मुझ से मेरी हसरतों के बारे में 

मैं चाहे जितना समेटूं , बिखर ही जाती हैं

na puch mujhse meri hasrato'n ke bare mein 
main chahe jitna sametu ,bikhar hi jaati hain 

siya


"haqeeqat khud jaga deti he aksar sone waloN ko
sunhehre khwab ki khatir' Siya ' kuchh der sone do

हकीक़त ख़ुद जगा देती है अक्सर सोने वालों को 
सुनहरे ख्वाब की ख़ातिर सिया कुछ देर सोने दो 
siya
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becheharagi ne shahar pe qabza jama liya
 hum dhudhte hai koy to chehra dikhayi de 

बेचेहरगी ने शहर पे क़ब्ज़ा जमा लिया
 हम ढूढ़ते है कोई तो चेहरा दिखाई दे 
siya
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मुझको दुनिया की कड़ी धूप न छू पाएगी
 माँ मेरे सर पे दुआओं भरा आँचल कर दे 

mujhko duniya ki kadi dhoop n chu payegi
 maa mere sar pe duaon bhara aanchal kar de 
siya 
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थके हुए है परिंदे अगर इजाज़त हो
ज़रा सी देर तिरे शहर में क़याम करे

thake hue hai parinde agar ijazat ho
 jara si der tire shahar mein qayaam kare'n

siya
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छोड़ कर चल तो दिए दश्त ए जुनू में तन्हा
अब ज़माने में कहीं दिल नहीं लगता मेरा
chodh kar chal to diye dasht e junu mein tanha
Ab zamaane meN kaheeN dil naheeN lagta mera
siya
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तकल्लुफ से तुमको शिकायत बहुत थी
मगर अब गिला है के बेबाक हूँ मैं 

siya
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मेरे हौसले थक ना जाये कहीं फिर
अब ऐसा न हो फिर क़दम लडखडाये

mere housle thak na jaaye kaheen fir
ab aisa na ho fir kadam ladkhdaaye

siya
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nahi ab bhrosa meri zindgi ka 
munasib ho to ek din aap 'aaye'n'

नहीं अब भरोसा मेरी ज़िन्दगी का
मुनासिब हो तो एक  दिन आप आयें
siya ........................................ 

तमन्नाओं के नाम पर देख लो तुम 
मेरी हर ख़ुशी की जली है चिताएं
tamnnao'n ke naam par dekh lo tum 
meri har khushi ki jali hai'n chitaye

siya 
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 तेरी परवरिश ने सिखाया है माँ ये 
किसी का भी नाहक न ये दिल दुखाये 

teri parvarish ne sikhaya hai ye maa 
kisi ka bhi nahak n ye dil dukhaye 

siya 
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तेरी दुआ से सभी नेमते हुई हासिल 
मगर, सताए मेरी माँ' तेरी कमी हर वक्त.

siya


खुल न पाई शऊर की आँखे 
आज तक ख़ुद से अजनबी हूँ मैं 

siya
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फूल को छूके जो आये तो महक जाये हवा
नेक सोहबत से ख्यालात बदल जाते हैं
siya
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था लबों पर सुकूते ख़ामोशी
दर्द आँखों ने कह दिया दिल का

डूब जाये जो कश्ति ए उम्मीद
ऐसा टूटा ये हौसला दिल का ..

siya
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सब मुसाफिर हैं इस सराए में
एक दिन जाना बारी बारी है

siya
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रिश्ते नातों से कट नहीं सकती
मैं हूँ इन्सां सिमट नहीं सकती
फ़र्ज़ सारे मुझे निभाने है
मैं रिवाजों से हट नहीं सकती ..

rishte_nato se kat nahi sakti
main hoon insaan simat nahi sakti
farz sare mujhe nibhane hain
main riwazon se hat nahi sakti

siya
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ज़िन्दगी कैसे दूँ मैं तेरे सवालो का जवाब
हर घडी तेरे सवालात बदल जाते हैं

siya
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उसको शिकम की आग ने करतब सिखा दिए
जो हमको ज़िन्दगी का सलीक़ा सिखा गया

रोटी की जुस्तजू में गवां दी है जिसने जान
दुनिया समझ रही हैं तमाशा दिखा गया

siya
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इस तरह से भागती हैं ज़िन्दगी रफ़्तार से
सुबह का ग़म शब् को अनजाना लगा

siya
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1 comment:

  1. उसको शिकम की आग ने करतब सिखा दिए
    जो हमको ज़िन्दगी का सलीक़ा सिखा गया

    रोटी की जुस्तजू में गवां दी है जिसने जान
    दुनिया समझ रही हैं तमाशा दिखा गया

    jisko galeech kah ke dutkaara tha kabhi
    wo fate-haal mujhe aaina dikha gaya
    aur mai jo duniya ko khitaab karta tha
    mujhse hi mera taarrukh kara gaya

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