Saturday, 7 April 2012

जाते जाते कोई एहसान जताते जाओ


अपनी पलकों पे मेरे अश्क सजाते जाओ 
दूर रह के भी मुझे अपना बनाते जाओ 

रोशनी के लिए मैं भी हूँ परेशां लेकिन 
ये जरुरी तो नहीं आग लगाते जाओ 

मिल गया भेस में  इन्सां के फ़रिश्ता कोई 
बात ये सारे ज़माने को बताते जाओ 

इस भरी दुनिया में कोई तो है मेरा अपना 
साथ हो तुम मेरे एहसास दिलाते जाओ 

ये मोहब्बत का तक़ाज़ा तो नहीं हैं फिर भी 
जाते जाते कोई एहसान जताते जाओ 

फिर तेरे इश्क़ ने बाज़ार किया हैं मुझको 
तुम भी औरो की तरह दाम लगाते जाओ 

हक़परस्तों से गुज़ारिश है यहीं एक सिया 
मेरी आवाज़ में आवाज़ मिलाते जाओ 

apni palkoN pe mere ashq sajate jao 
door rah ke bhi mujhe apna banate jao 

roshni ke liye main bhi hoon pareshan lekin .
ye jaruri to nahi aag lagate jao 

mil gaya bhesh mein insaan ke farishta koyi
bat ye sare zamane ko batate jao 

is bhari duniya mein koyi to hain mera apna 
sath ho tum mere  ehsaas dilate jao 

ye mohbaat ka takaza to nahi hain fir bhi
jate jate koyi  ehsaan jatate jao 

fir tere ishq ne baazar kiya hain mujhko 
tum bhi auro ki tarah daam lagate jao

haqparasto  se guzarish hai yaheen ek siya 
meri aawaz mein aawaz milate jao ...

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