Thursday, 23 June 2011

हमने काँटों पे चलने का सफ़र सीखा है


हमने काँटों पे चलने का सफ़र सीखा है
आग पानी में लगाने का हुनर सीखा है

तुम हवा के गरम झोंके से भी घबराते हो
हमने मर मर के ,जीने का हुनर सीखा है

कोई उम्मीद लगाना नहीं किसी से कभी
 लब पे शिकवा ना लाने का हुनर सीखा है

चोट खाकर भी अब एहसासे_ग़म नहीं होता
हस के अश्को को छुपाने का हुनर सीखा है

अपनी ही धुन में , अपने आप ही में गुम है
हमने भी बच के  गुजरने का हुनर सीखा है

जहाँ की रौनके मुझको  ना रास आती है
हमने तन्हाई  में  रहने का हुनर सीखा है

सिया

1 comment:

  1. हमने काँटों पे चलने का सफ़र सीखा है
    आग पानी में लगाने का हुनर सीखा है

    तुम हवा के गरम थपेड़े से भी घबरा जाओ
    हमने मर मर के जीने का हुनर सीखा है

    motivated karti ye panktiyaan taarife kaabil hai
    siya ji mujhe ghazal ki basic jaankaari radif kaafia matla maatra laiy aadi hetu koi kitaab ho to sugesst kariye meter me ghazal nahi banti

    meri ghazle padhkar aap meri help kariye aapki meharbaani hogi

    ajmani61181.blogspot.com

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