Sunday, 22 May 2011

लौट के ना आयेगे


तेरे कदमो में हम सर को नहीं झुकायेंगे
रो चुके हैं बहुत अब अश्क ना बहाएगे

हम ना आयेगे तेरे दर  पे सवाली बन के
आपके सामने  दामन नहीं फैलाएगे

तूने क्या ना सितम किये मुझ पर
हम कभी शिकवा लबो पे नहीं लायेगे

रूठ कर तुमसे बहुत दूर चले जायेगे
देखना आपको फिर याद कितना आयेगे

तेरी नज़रे तलाशती रहेगी फिर हमको
आपको फिर नज़र कहीं  नहीं हम  आयेगे

याद आएगी जब सताएगी वफाये  मेरी
बिन मेरे आप भी पल भर ना सकूँ पायेगे

सिर्फ रह जाएगी तेरे पास  मेरी  यादे बाकी
तुम पुकारोगे  भी तो  लौट के ना आयेगे


सिया

1 comment:

  1. भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति

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