Monday, 2 May 2011

मैं कोई इक किताब लिख दूँ

दिल में हैं मेरे कि मैं कोई इक किताब लिख दूँ 
कुछ ऐसे लफ्ज़ तलाशू कुछ इत्तेफाक  लिख दूँ


ये इलाजे -बेकरारी से अब तो  निजात हो 
मैं उसमें अपने हर इक पल का हिसाब लिख दूँ


मैंने क्या पाया क्या खोया क्या अब मिलेगा मुझे
जगती आँखों में बसते हैं जो वो ख्वाब लिख दूँ

अपनी  मज़बूरी पे भी हंस के जो जिंदगी को जिए
नाम उसके मैं जिंदा-दिल का ये खिताब लिख दूँ 


हो कोई इक शख्स जो  फ़ूल के जैसा दिल वाला
दिल करता है उसके नाम सारे सबाब लिख दूँ

सिया 

2 comments:

  1. BAHUT HI ACHA LIKHA APP NEA. GOD BLESS YOU.

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  2. "ये इलाजे -बेकरारी से अब तो निजात हो
    मैं उसमें अपने हर इक पल का हिसाब लिख दूँ"...

    बहुत बढ़िया

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