Sunday, 1 May 2011

मुझे क्या ???


जल रहा हैं शहर नफरत के शोलो में मुझे क्या
मेरे सब अपने हैं महफूज घर में  फूलो से मुझे क्या

भूखे बच्चो की खातिर बेच दी इक माँ ने अस्मत
मेरे बच्चो पे हैं दुनिया भर की नेमत मुझे क्या

कुछ दरिंदो ने लूटा हैं किसी बेटी की इज्ज़त को
मेरी बेटी घर लौटी हैं सही सलामत मुझे क्या

चन्द कागज के रुपयों के लिए लहू से लथपथ कर डाला
तड़प कर तोड़ डाला दम बेचारे ने सड़क पर मुझे क्या

किसी दिन तुम पे जो गुजरेगी तो हो जाओगे हतप्रभ
क्या बीतेगी तेरे दिल पर कहेगे सब यहीं   की मुझे क्या

सिया
 

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