Sunday, 29 September 2013

सिर्फ थोड़ी सी मोहब्बत चाहिए

कब हमें उनकी इनायत चाहिए
सिर्फ थोड़ी सी मोहब्बत चाहिए

थोड़ा लहज़े में नज़ाकत चाहिए 
और आँखों में शराफ़त चाहिए

ख्व़ाबगाहों से निकल आयें जनाब 
ज़िंदगी में कुछ हकीक़त चाहिए

रब से ज़ायद मांगती कुछ भी नहीं 
मुझको बस हस्बे ज़रूरत चाहिए

ज़िंदगी आसान होती जायेगी
रहमत ए आलम की रहमत चाहिए

आप ने सबको नसीहत की जनाब
आपको भी कुछ नसीहत चाहिए

इन बुजुर्गों से सदा हमको सिया
रहनुमाई और शफ़क़त चाहिए

इस ज़बां पर भी ज़रा काबू रहे
दिल में भी थोड़ी मुरव्वत चाहिए

शेर गोई है नहीं आसाँ सिया
इल्म की भी थोड़ी दौलत चाहिए

ऐ सिया क़दमों को मां के चूम लो
तुम को गर दुनिया में जन्नत चाहिए

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