Monday, 3 June 2013

जीतना है दिल मधुर व्यवहार लेकर

स्वप्न नैनों में नए आकार लेकर 
चल दी पी के घर नया संसार लेकर 

माँ की ममता और पिता का प्यार लेकर
ये दुआएँ आपकी उपहार लेकर 

कुछ नए रिश्तों का ये संसार लेकर
जीतना है दिल मधुर व्यवहार लेकर 

माथे बिंदिया मांग में सिंदूर सोहे 
इक सुहागन का अमर सिंगार लेकर

जा रही बाबुल तेरे आँगन की चिड़िया
नयनों से अश्रु की बहती धार लेकर

जब कभी साजन हुए नाराज़ मुझसे
मान जायेगे तनिक मनुहार लेकर

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