Saturday, 18 May 2013

जहाँ में कोई भी अब हम ज़बां नहीं मिलता


जो दिल को भाये वो तर्ज़ ए बयाँ नहीं मिलता 
जहाँ में कोई भी अब हम ज़बां नहीं मिलता 

क्या पूछते हो की किसने जलाया फूल सा दिल 
सुलगता रहता है फिर भी धुवाँ नहीं मिलता
 
मैं एक रात सुकूं से जहाँ गुज़ार सकूँ 
भटक रही हूँ मगर वो मकां नहीं मिलता ,

ये दुनिया देख  हैरान हो रही हूँ मैं 
मुझे तो कोई कहीं कारवां नहीं मिलता 

पलों में भूलना आदत है इस ज़माने की 
बड़े बड़ो का भी नाम ओ निशां नहीं मिलता,

न जाने आंधियाँ कितनी चली हैं पिछले दिनों 
के अब तुम्हारे क़दम का निशां नहीं मिलता 

ज़रा निगाह को कुछ मोतबर बना लीजे 
जहाँ में चाहने वाला कहाँ नहीं मिलता 

 अब उससे मिलने की उम्मीद भी नहीं बाकी 
 सभी तो मिलते है वो बदगुमान नहीं मिलता 

मैं तुमसे मिलने अकेली हूँ चल पडूँगी सिया 
मुझे तो कोई कहीं कारवां नहीं मिलता ...


चुपचाप दिल सुलगता है कोई धुवाँ नहीं

मेरे लिए जहाँ में सूद ओ जिया नहीं 
चुपचाप दिल सुलगता है कोई धुवाँ नहीं 

आँखे तो अपनी खोल के देखो जहाँ में तुम 
सजदे का शौक़ हो तो कहा आस्तां नहीं 

पूछा था उससे दिल तो न तोड़ेगे तुम कभी 
आँखों से उसने मुझसे कहाँ था की हाँ नहीं 

वादे सबा से मैंने कहा था की पी को ला 
सरगोशियाँ सी कान में पहुँची यहाँ नहीं 

बरसों बरस गुज़ार दिए तब पता चला 
बेगाना ये जहान कोई अपना यहाँ नहीं 

तू ज़ब्त करके रख सभी ग़म अपने ही दिल में 
समझे पराया दर्द ये ऐसा जहाँ नहीं 

ये दुनिया चार दिन का ठिकाना है दोस्तों 
कोई सदा के वास्ते आता यहाँ नहीं 

ज़ुल्मत कहीं भी रक्स न कर पाएगी जनाब 
हमने नए चराग़ जलाये कहाँ नहीं 

तुमसे बिछड़ के माँ मुझे महसूस ये हुआ 
तुम जैसा कोई सर पे मेरे सायेबान नहीं 

mere liye jahan mein sood -o_ziyaa'n nahi 
chupchap dil sulgata hai koi dhuva'n nahi'n

aankhe to apni khol ke dekho jahan mein 
sajde ka shauq ho to kahan aastan nahi'n

pucha tha usse dil to na todoge tum mira 
aankho se usne mujhse kaha tha ki haan nahi'n

wade saba se maine kaha pee ko le ke aa 
sargoshiya si kaan mein pahunchi yahan nahi ..

barso baras guzaar diye tab pata chala
begana ye jahan koi apna yahan nahi'n

tu zabt kar ke rakh sabhi gham apne hi dil mein
samjhe paraya dard ye aisa jahan nahi 

ye duniya char din ka thikana hai dosto'
koi sada ke waste aata yahan nahi'n

zulmat kaheen bhi  raqs na kar paayegi janab 
humne naye charagh jalaye kahan nahi'n 

tumse  bicchad ke ma mujhe  mehsus ye hua 
tum jaisa koi sar pe mere sayebaa'n nahi'n

Thursday, 16 May 2013

इतना हँसी के आँख से आंसू निकल गयी

जब ये सुना हयात के माथे के बल गए 
इतना हँसी के आँख से आंसू निकल गयी 

क्यों कर अमीर ए शहर ने देखा नहीं कभी
कितने ग़रीब पावँ के नीचे कुचल गए

फ़िर रहनुमा ने हमको दिखाए हसीन ख़्वाब
आदत सी पड़ गयी है सो हम फिर बहल गए

आँखे तो क़ैदखाने से बाहर न आ सकी
पर जिंदगी के ख़्वाब अँधेरे में पल गए

मैं जिंदगी के तार मिलाती भी क्या सिया
वो गर्दिशे पड़ी के सभी तार गल गए

jab ye suna hayaat ke mathe ke bal gaye
itna hansi ke aankh ke aansu nikal gaye

kyo kar ameer e shahar ne dekha nahi kabhi
kitne gareeb pavn ke neeche kuchal gaye

fir rahnuma ne humko dikhaye haseen khwaab
aadat si pad gayi hai so hum fir bahal gaye

aankhe to qaidkahne se bahar na aa saki
par zindgi ke khwaab andhere mein pal gaye

main zindgi ke taar milati bhi kya siya
wo gardishe padi ke sabhi taar gal gaye

siya

Friday, 10 May 2013

चाहती जैसा हूँ वैसा नहीं रहने देता



ये जहाँ मुझको भी मुझसा नहीं रहने देता 
चाहती जैसा हूँ वैसा नहीं रहने देता
रौशनी का वो मुझे दरस मिला है तुमसे 
ये मेरे गिर्द अँधेरा नहीं रहने  देता 

उम्र से पहले ही कर देता हैं उनको बालिग़ 
टी वी अब बच्चो को बच्चा नहीं रहने देता 

हिंदू मुस्लिम में या सिख इसाई तकसीम है लोग 
ये जुनूं बन्दे को बंदा नहीं रहने देता 

एक लम्हा भी सुकूं से न गुज़रने पाए 
वो सिया  चैन से जिंदा नहीं रहने देता 


ye jahan mujhko bhi mujhsa nahi rahne deta 
''Chahti jaisa hun waisa nahi rehne deta''

roshni ka wo mujhe dars mila hai tumse
ye mere gird andhera nahi rahne deta
umr se pahle hi kar deta hain unko balig
t.v ab bachcho ko bachcha nahi rahne deta ....
Hindu muslim me ya sikh Isai me taksim hain log,
'Ye' junoo'n bande ko banda nahi rehne deta
ek lamha bhi sakoo'n se na guzarne paye
wo siya chain se zinda nahi rahne deta...

Saturday, 4 May 2013

भूल जो मुझको न पाया देर तक


आज फिर वो याद आया देर तक 
 भूल जो मुझको  न पाया देर तक 

दिल मेरा उसने जलाया देर तक 
संगदिल फिर मुस्कुराया देर तक

सारे रिश्ते यूँ  बिखरने से लगे 
कोई अपना रह न पाया देर तक 

जब तलक़ बेटी न घर लौटी मिरी 
 खौफ़ से  दिल थरथराया देर तक

मेरी  माँ भूखी है कितनी देर से 
 मेरे बिन उसने न खाया देर तक 

मैं भी तेरे बिन नहीं थी चैन से 
दूर तू भी रह न पाया देर तक
रौशनी जब हद्द से बाहर आ गयी 
उसने तन मन धन जलाया देर तक 

 
fir wo yaad aaya der tak 
bhul jo mujhko n paaya der tak 

dil mera usne jalaya der tak 
sang dil fir muskuraya der tak 

sare rishte yun bikharne se lage 
koi  apna rah n paya der tak 

jab talaq beti na ghar lauti miri 
khauf se dil thartharaya der tak 

meri ma bhukhi hai kitni der se 
mere bin usne n khaya der tak
main bhi tere bin  kahan thi chain se 
door tu bhi rah na paya der tak

roshni jab hadd se bahar aa gayi 
usne tan man dhan jalaya der tak

Friday, 3 May 2013

दर्द में भी कमी नहीं होती


मुझमें गर आगही नहीं होती 
ज़ेहन में रौशनी नहीं होती 

ज़ख्म ए  दिल हैं की बढ़ते जाते हैं 
दर्द में भी कमी नहीं होती 

टूट कर यूं न मैं बिखरती ग़र 
अपने दिल की सुनी नहीं होती

उडती फिरती हूँ इक परिंदे सी 
मुझमें जब बेक़ली  नहीं होती

ग़म न होते जो अपने जीवन में 
क़द्र खुशियों की भी नहीं होती 

लाख दुनिया ने ज़ुल्म ढाए पर 
हौसलों में कमी नहीं होती 

लाश ढोते  है अपने कांधो पर 
जिनके दिल में ख़ुशी नहीं होती 

मौत का ख़ौफ़ ही नहीं मुझको 
मौत क्या जिंदगी नहीं होती 

तू न मिलता तो ए सिया मेरी 
शायरी शायरी नहीं होती 

mujh mein gar aagahi nahi hoti
zehan mein roshni nahi hoti 

Zakhm e dil hain ki badhte jaate hain,
Dard mein bhee kami nahi'N hoti

toot kar yoon n main bikharati gar
apne dil ki suni nahiN hoti


Udti phirtee main ik parinde se
Kash kuch bebasi nahi'N hoti 

Gam n hote jo apne jeevan mein,
qadr khushiyoN ki bhi nahiN hoti

lakh duniya ne zulm dhaaye par
houslo'n mein kami nahin hoti.

laash dhote haiN apne kandho par
jinke dil mein khushi nahiN hoti

 tu na milta to aye siya meri 
shayari shayari nahi hoti 

Thi "Siya" unki  baat nashtar see,
Warna dil mein chubhee nahee'n hotee.