Friday, 10 May 2013

चाहती जैसा हूँ वैसा नहीं रहने देता



ये जहाँ मुझको भी मुझसा नहीं रहने देता 
चाहती जैसा हूँ वैसा नहीं रहने देता
रौशनी का वो मुझे दरस मिला है तुमसे 
ये मेरे गिर्द अँधेरा नहीं रहने  देता 

उम्र से पहले ही कर देता हैं उनको बालिग़ 
टी वी अब बच्चो को बच्चा नहीं रहने देता 

हिंदू मुस्लिम में या सिख इसाई तकसीम है लोग 
ये जुनूं बन्दे को बंदा नहीं रहने देता 

एक लम्हा भी सुकूं से न गुज़रने पाए 
वो सिया  चैन से जिंदा नहीं रहने देता 


ye jahan mujhko bhi mujhsa nahi rahne deta 
''Chahti jaisa hun waisa nahi rehne deta''

roshni ka wo mujhe dars mila hai tumse
ye mere gird andhera nahi rahne deta
umr se pahle hi kar deta hain unko balig
t.v ab bachcho ko bachcha nahi rahne deta ....
Hindu muslim me ya sikh Isai me taksim hain log,
'Ye' junoo'n bande ko banda nahi rehne deta
ek lamha bhi sakoo'n se na guzarne paye
wo siya chain se zinda nahi rahne deta...

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